27.12.18

LogicalNews द्वारा कराए गए साल 2018 के Top 10 जिलाधिकारियों के सर्वे के नतीजे घोषित

लख़नऊ

Logical News द्वारा किये जा रहे साल 2018 के UP के Top 10 जिलाधिकारियों के सर्वे में 5 दिनों तक हमे कुल 92268 वोट हमें प्राप्त हुए है जो कि विभिन्न जिलों व विभिन्न जिलाधिकारियों के समर्थकों द्वारा हमारे पर भेजे गए।

Method of Survey-
सर्वे के लिए logical news ने कोई भी options जनता को नही दिए थे, लोग अपनी इच्छा से जिसको चाहे वोट कर सकते थे हमारे Whatsapp व FB , Twitter पेज पर direct message के रूप में भेजे गए वोटों को सम्मिलित करते हुए हमने सभी वोट को सम्मिलित कर हम अंतिम नतीजे पर पहुचे है।
विभिन्न अधिकारियों को मिले वोट व उनके बारे में लोगों द्वारा व्यक्त किये गए विचार निम्न है, हमारा प्रयास है कि जिलाधिकारी भारत की व्यवस्था में एक अति महत्वपूर्ण स्थान है, DM लोगो के साथ सीधे जुड़ता है व उनके दुःख सुख में शामिल होता है ऐसे में सरकार व तंत्र को भी के जानकारी होनी चाहिए कि किस अधिकारी को लोग कितना सम्मान दे रहे है व जिलाधिकारियों में भी इस सर्वे से अधिक जनता से जुड़ाव का उत्साह पैदा होगा।- 

1. श्री महेन्द्र बहादुर सिंह जी (DM रामपुर);-10927;-
रामपुर के जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर के लिए जिले के अध्यापकों, प्रधानों, क्षात्रों, महिलाओं व पुरुषों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, 27 DEC को रामपुर के लोगो ने इतनी वोटिंग की की हमरा सर्वर जाम हो गया था, साथ ही लोगो ने उनके द्वारा शिक्षा व जनसंवाद में किये गए कामों की तारीफ भी खुलकर की है, साथ ही बाँदा, फतेहपुर व हरदोई के लोगो ने भी वोटिंग की व कई तरह के कमेंट भी भेजे, वोटिंग बंद हो जाने के बाद बहुत से लोग मायूस नजर आए, FB ट्विटर व व्हाट्सएप सभी प्लेटफॉर्म पर DM रामपुर के लिए भारी मात्रा में वोटिंग की गई, LogicalNews की ओर से सभी वोटर्स को बहुत बहूत बधाई।

2. श्रीअखिलेश तिवारी जी (पूर्व DM बाराबंकी)- 9864;-

2018 के पूर्वाध में बाराबंकी के जिलाधिकारी रहे श्री अखिलेश तिवारी जी हमारे सर्वे में सबसे आगे थे परन्तु आखिर दिनों में कुछ वोटों से No1 से पीछे आ गए, जिलाधिकारी के पद पर न रहते हुए भी करीब 10000 वोट्स पाना उनकी लोकप्रियता को सिद्ध करता है, जिन नेताओ ने बाराबंकी में उनके कार्यकाल पर आरोप लगाए थे उनकी बातों को जनता ने नही माना, अखिलेश जी के लिए बाराबंकी, लखनऊ, गोरखपुर, बस्ती देवरिया से वोटिंग हुई, महिलाओं व क्षात्रों ने दिए वोट्स, साथ ही उनके सरल स्वभाव व जनता की समस्याओं को सुलझाने की प्रवृत्ति की तारीफ की, ऐसे लोकप्रिय अधिकारी को जनता के बीच रखना चाहिए सरकार को, logical न्यूज़3 की ओर से बहुत बधाई


3. श्री अटल कुमार राय जी (DM बिजनौर);-8675;-
साल 2016 की तरह ही इसबार भी बिजनौर जिले के लोगों ने Logicalnews के बेस्ट DM सर्वे में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया सेटल कुमार राय के विषय में लोगों ने उनकी तारीफों में सभी तरह के कमेंट भेजे हैं हमारे व्हाट्सएप टि्वटर फेसबुक सभी स्थानों पर अटल कुमार राय को विजेता बनाने के लिए वोटिंग की गई , डीएम बिजनौर संभवत इस सर्वे के पुनः विजेता होते लेकिन क्योंकि बिजनौर के लोगों ने थोड़ी देर में वोटिंग शुरू की इसलिए ऐसा नहीं हो सका, श्री अटल कुमार राय विषय में लोगों ने लिखा कि वो जनता की समस्याओं को सुलझाने में माहिर है, लिखा है कि अगर किसी मामले में न्याय चाइये तो DM साहब ही आखिरी रास्ता है।

4. श्री मन्नान अख्तर जी (DM जालौन);- 8210;-
जालौन logicalnews के बहुत कम पाठक थे फिर भी ये सर्वे की जानकारी होते ही लोग अपने जिले के नए व ऊर्जावान जिलाधिकारी मन्नान अख्तर जी को वोट देने में लग गए हम औकात मन्नान अख्तर इस सर्वे में नंबर एक पर हो सकते थे परंतु लेट शुरू करने के कारण ऐसा नहीं हो सका, बुंदेलखंड के जिलों में जहां पर जिला अधिकारी एवं अन्य सरकारी अधिकारियों के द्वारा जनता के हित में कोई भी योजनाएं शुरू ना किए जाने के मामले बार-बार आते हैं ऐसे में मन्नान अख़्तरर जी के बारे में लोगों ने बहुत अच्छे कमेंट किये है, पेयजल,  स्वच्छता व आवारा पशुओं के रखरखाव के विषय में मन्नान अख्तर जी के द्वारा किए गए कामों की चतुर्दिक तारीफ हुई, सभी धर्म व वर्ग के लोगो द्बार किये गए वोट, जालौन, बाँदा, लख़नऊ, प्रयागराज से वोटिंग।

5. श्री शिव सहाय अवस्थी (DM झांसी);- 7734; 

झांसी जिले में लॉजिकल न्यूज़ के पहले से ही अधिक मात्रा में पाठक है, जिन्होंने इस सर्वे में बढ चढ़ कर हिस्सा लिया है, शिव सहाय अवस्थी जी के लिए तीसरे दिन से वोट्स मिलने शुरू हुए है ऐसे में उनका पांचवें नंबर पर पहुंचना वह लगभग 8000 वोट प्राप्त करना भी कमाल है यह उनकी जिले में लोकप्रियता को दिखाता है शिव सहाय अवस्थी जी के लिए झांसी सीतापुर व हरदोई से वोटिंग।

6. श्री कौशल राज शर्मा जी (DM लख़नऊ);- 7612;- 
DM लख़नऊ कौशल राज शर्मा जी 2016 के हमारे सर पर में भी टॉप टेन में रहे थे, चौथे वह पांचवें दिन में लखनऊ जिलाधिकारी के लिए सर्वाधिक मात्रा में वोटिंग हुई श्री कौशल जी के विषय में लोगों की राय एक परिपक्व अधिकारी की है, उनके लिए लखनऊ कानपुर इलाहाबाद वाराणसी से अच्छी मात्रा में वोटिंग आखिरी 2 दिनों में हुई, लख़नऊ में जनप्रिय है DM कौशल राज, सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों व स्टूडेंट्स ने किए वोट।
7. श्री सुहास LY(DM प्रयागराज);- 4186;- जज्बे का दूसरा नाम है सुहास इक पैर  खराब होकर भी दुनिया की सभी कठिनाइयों को जितने वाले सुहास की प्रशसनिक क्षमता का लोहा मानता है LogicalNews, लोगो का कहना है की DM साहब के संज्ञान में आए मामले का निराकरण होगा जरूर, आगामी कुम्भ के आयोजन हेतु सरकार की पसंद तभी है सुहास जी, 

8. योगेश्वर राम मिश्रा जी (पूर्व DM वाराणसी) - 4082;-
 सर्वसुलभ व जनप्रिय अधिकारी श्री योगेश्वर राम जी निःसंदेह उत्तर प्रदेश के सबसे लोकप्रिय DM हैं, बाराबंकी वाराणसी फैजाबाद जैसे उत्तर प्रदेश की कई जिलों में DM रहे है, आज तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले अधिकारी हैं जो अभी तक लोगो के दिलो पर राज कर रहे है, उनकी क्रियाप्रणाली की तारीफ उन सभी जिलों के लोग दिल खोलकर करते हैं जहां वह अब तक काम कर चुके हैं उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के सबसे लोकप्रिय अधिकारी है योगेश्वर जी। 

9. अमृत त्रिपाठी जी (DM शाहजहांपुर);-2518;-
 अमृत त्रिपाठी जी की प्रशासनिक क्षमता का कोई सानी नहीं है, हमारे सर्वे में  प्रतापगढ़ सीतापुर से शाहजहांपुर के लोगों ने उनकी प्रशासनिक क्षमता को बार-बार तारीफ की शाहजहांपुर के सरकारी कर्मचारियों छात्रों व व्यापारियों द्वारा श्री त्रिपाठी जी के बारे में वोटिंग की गई एवं उनके द्वारा मामलों में त्वरित कार्यवाही की तारीफ की गई, 2016 से इस साल उनको मिले वोटों की संख्या कम हो गई है।

10. श्रीमती रितू माहेश्वरी जी (DM गाजियाबाद);-1802;-
 ऐसा माना जाता है कि गाजियाबाद नोएडा जैसी बड़े जिलों की जनता सामान्य रूप से अपने जिलाधिकारियों से ना तो परिचित होती है और ना ही उनके साथ इंटरेक्शन करने में कोई चाहत रखती है, पर इसमें को तोड़ने में कामयाब रही है तुम्हें सॉरी जी गाजियाबाद नोएडा दिल्ली सहित कई जिलों के लोगों ने उनके पक्ष में वोट किया है सबसे ज्यादा वोटिंग गाजियाबाद से हुई जो इसमें तक को तोड़ता है कि बड़े जिलों के बड़े नगरों के लोग DM के बारे में जानकारी नहीं रखते, गाजियाबाद के विकास के लिए रितु माहेश्वरी जी के द्वारा किये गए प्रयास काबिले तारीफ़ है।

Logicalnews की ओर से सभी Top10 जिलाधिकारियों को बहुत बहुत बधाई व 2019 की शुभकामनाएं


LogicalNews.in

21.12.18

जनता को लूट रही है सरकारी व प्राइवेट बैंकें ,3.5 साल में मिनिमम बैलेंस के नाम पर सरकारी बैंकों ने उड़ाए 10000 करोड़ रुपए।


सरकारी बैंकों ने केवल पिछले साढ़े 3 साल में 10 हजार करोड़ रुपये की रकम जनता से बटोर ली है। यह रकम सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस न रखने और एटीएम विद्ड्रॉल पर लगने वाले चार्ज के जरिए एकत्रित की गई है। सरकार ने यह सूचना संसद में दिए गए डेटा में बताई है।

संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया है कि साल 2012 तक मंथली एवरेज बैलेंस पर एसबीआई चार्ज वसूल कर रहा था, लेकिन 31 मार्च 2016 से यह बंद कर दिया गया। हालांकि प्राइवेट बैंकों सहित अन्य बैंक अपने बोर्ड के नियमों के अनुसार यह चार्ज वसूल कर रहे हैं। एसबीआई ने 1 अप्रैल 2017 से यह अतिरिक्त चार्ज वसूल करना शुरू कर दिया। हालांकि 1 अक्टूबर 2017 से मिनिमम बैलेंस में रखी जाने वाली रकम को कम कर दिया गया। 

वित्त मंत्रालय ने बताया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को उनके बोर्ड के मुताबिक विभिन्न सेवाओं पर चार्ज करने की अनुमति प्रदान कर रखी है। हालांकि बैंको को निर्देश दिए गए हैं कि उनके चार्ज उचित होने चाहिए। रिजर्व बैंक ने यह भी निर्देश दिए हैं 6 मेट्रो शहरों मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक महीने में अन्य बैंकों के एटीम से 3 ट्रांजैक्शन और बैंक के एटीएम से कम से कम 5 ट्रांजैक्शन फ्री रखे जाएं। 

मंत्रालय ने बताया है कि फ्री ट्रांजैक्शन के बाद बैंक अपने बोर्ड से अप्रूव किए गए नियमों के मुताबिक प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 20 रुपये की रकम वसूल कर सकते हैं। जवाब में यह भी बताया गया है कि सरकारी बैंकों का अपने एटीएम बंद करने का कोई प्लान नहीं है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ऐसी चर्चाओं ने जोर पकड़ा था कि मार्च 2019 तक सरकारी बैंकों के 50 प्रतिशत एटीएम बंद कर दिए जाएंगे।

15.12.18

राफेल डीलः केंद्र सरकार ने कैग रिपोर्ट और पीएसी के रेफरेंस वाले पैरा में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी

दिल्ली

सरकार ने राफेल पर फैसले में टाइपिंग की त्रुटियों को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। फैसले में राफेल डील पर सीएजी रिपोर्ट तैयार होने और उसे संसद की लोकलेखा समिति (पीएसी) के समक्ष रखे जाने का जिक्र है। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलतबयानी का आरोप लगाते हुए फैसले पर सवाल उठाया है। वैसे यह भी तय है कि सीएजी और पीएसी का जिक्र हटा भी दें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई असर नहींपपड़ने वाला।

सरकार ने हलफनामे में बताया है कि राफेल की कीमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दी गई सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट की लाइनों को समझने में गड़बड़ी के कारण सीएजी और पीएसी का विवाद खड़ा हुआ। सरकार के अनुसार सीलबंद लिफाफे में अदालत को बताया गया था कि राफेल की कीमत की पूरी जानकारी सीएजी को दे दी गई है और सामान्य प्रक्रिया के तहत सीएजी अपनी रिपोर्ट पीएसी को सौंपेगा, जहां उसकी पड़ताल की जाएगी।

बाद में पीएसी की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाएगा, जिसमें कीमत से संबंधित कुछ बातें सार्वजनिक भी होंगी। लेकिन फैसले को पढ़ने से यह लगता है कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी को सौंपी जा चुकी है और पीएसी ने उसे संसद के पटल पर रख भी दिया है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभी तक सीएजी ने अपनी रिपोर्ट ही तैयार नहीं की।

सरकार ने अदालत से कहा है कि अपने फैसले के पैरा 25 की दो पंक्तियों के लिखने में हुई त्रुटियों को दूर करे। ताकि राफेल पर किसी तरह की विवाद की गुंजाइश नहीं रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में टाइपिंग की गलतियों और किसी अन्य तरह की त्रुटि को दूर करने का कानूनी प्रावधान है। यदि अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया जाए, तो वह फैसले में संशोधन कर सकती है। सरकार ने इसी प्रावधान के तहत सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है।
4

वहीं उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि फैसले से पैरा 25 को हटा दिया जाए यानी सीएजी और पीएसी का जिक्र नहीं भी किया जाए, तो मूल फैसले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फैसला राफेल डील से सभी आयामों का विस्तार से विश्लेषण के आधार पर दिया गया है।

15.10.18

जानिए Me Too Movement के बारे में सबकुछ, कैसे एक 13 साल की बच्ची ने 2006 में दिया me too नाम

MeToo Movement.

सोशल मीडिया ने अबतक समाज मे  बहुत से अच्छे काम किये है जिनमें से एक है #MeToo Movement आइये जानते है इसके बारे में।

भारत मे तनुश्री दत्ता व नानापटेकर विवाद के बाद चर्चा में आया ये सोसल मीडिया मोमेंट 2006 से चल रहा है जब *तराना बरके (Tarana Burke)* नाम की न्यूयॉर्क की क्रिश्चियन सोसल एक्टिविस्ट ने महिलाओं के खिलाफ हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में अमेरिका में एक व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का प्रयास किया

तराना बरके ने अलबामा में एक 13 साल की लड़की Heaven जो कि अपनी माँ के प्रेमी द्वारा किये गए sexual Abuse से पीड़ित थी से इस बारे में बात करने का प्रयास किया पर वो इस बारे में कुछ भी खुलकर बोलने से बच रही थी बातचीत के दौरान उसने कहा *MeToo A victim of the same* और उसके बाद *My Space* पर सबसे पहले Me Too शब्द का इस्तेमाल किया गया था 

*Alyssa Milano*
Metoo आंदोलन धीरे धीरे खत्म हो चुका था पर हॉलीवुड अभिनेत्री आल्यासा मिलानो ने 2017 में इसको पुनर्जीवित किया व  Facebook और Twitter पर महिलाओं को इस हैशटैग के साथ अपनी बात सोशल मीडिया में रखने के लिए प्रेरित किया व खुद प्रोड्यूसर डायरेक्टर हार्वे विंस्टन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए, 

अलिसा मिलानो के ट्वीट के बाद 2 दिन में 10 लाख ट्वीट्स Metoo से संबंधित पोस्ट हुए थे,  इससे प्रेरित होकर अक्टूबर 2017 में अमेरिकी फ़िल्म प्रोड्यूसर Harvey Weinstein के खिलाफ 15 महिलाओं ने Metoo मोमेंट के तहत सोशल मीडिया में रेप व छेड़छाड़ के मामलों का खुलासा किया, 

Harvey Weinstein sexual abuse allegations -
विंस्टन ने पहले तो इन मामलों को हल्के में लेकर झूठा बताया पर जब 80 महिलाओं ने ऐसे आरोप लगाए तो वो बचाव में उतरे पर कुछ दिनों बाद विंस्टन कंपनी व Academy of Motion Pictures and Arts से निकाल दिए गए,
विंस्टन के खिलाफ 6 महिलाओं ने क्रिमिनल आरोप लगाए जिनपर न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस व लंदन में मुकदमा किया गया व 25 जून 2018 को विंस्टन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और अब वो जमानत पर है विंस्टन मामले में METOO पर 2017 में सबसे पहला आर्टिकल लिखने वाले New York Times and NewYorker को 2018 का पुलित्ज़र पुरुष्कार दिया गया है।

भारत मे अबतक कई नेताओं फिल्मी कलाकारों वह पब्लिक फिगर के ऊपर मी टू मोमेंट के तहत बड़ी बड़ी बातें सामने आ रही हैं इन मामलों के सच्चाई की जांच के बगैर कुछ भी कह पाना असंभव है कई मामलों में यह सच होते हैं कई मामलों में Metoo मूमेंट का उपयोग प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है फिर भी एलिसा मिलानो या तराना बुर्के द्वारा प्रारंभ किया गया ये मोमेंट बड़े काम का है जिसने कई भेड़ियों को बेनकाब किया है

विदेशों में एमिली जॉय व हन्नाह पाश नामक महिलाओं ने चर्च जैसे पवित्र स्थान पर महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन दुराचार पर Me Too के द्वारा लोगो का ध्यान आकर्षित किया है जिसमे कई पादरी जेल गए है,  

भारत मे भी बढ़ना चाहिए Me Too-
भारत मे जहां पुलिस शिकायत आसान नही व  मंदिरों व मस्जिदों में भी ऐसी घटनाएं होती है , महिलाओं को चाहिए कि Me Too का इस्तेमाल ऐसे मजहबी भेड़ियों को सामने लाएं औपचारिक शिकायत से सोशल मीडिया में ऐसी शिकायत करने ज्यादा आसन है क्योंकि बड़े लोगो के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज नही करती है जबकि Social Media ये प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है।

TheLogicalNews
(Stay Updated)

24.7.18

भर्ष्टाचार निरोधक कानून संसद में पास, घूस लेना व देना दोनों अपराध

नई दिल्ली:

 भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन पर आज संसद ने मुहर लगा दी. पिछले हफ़्ते राज्य सभा से पारित होने के बाद आज इसे लोकसभा ने भी पारित कर दिया. अब राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद जल्द ही नया कानून अमल में आ जाएगा. लंबे समय से अटके इस बिल में घूस लेने के साथ साथ घूस देने को भी अपराध बनाया गया है.

क्या है प्रमुख बिंदु
रिश्वत को लेकर नए कानून में कई प्रावधान किए गए हैं. मसलन केवल रिश्वत लेना ही अपराध नहीं बनाया गया है बल्कि रिश्वत लेने की अपेक्षा रखना या आग्रह करना भी अपराध की श्रेणी में ही रखा गया है. रिश्वत लेने के अपराध में सज़ा का प्रावधान कम से कम 6 महीने कैद से बढ़ाकर 3 साल कैद और अधिकतम 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कैद कर दिया गया है.

जल्द होगा निपटारा
इसी तरह पहली बार रिश्वत देने या उसकी पेशकश करने को भी अपराध बना दिया गया है. इसके लिए भी न्यूनतम सज़ा 3 साल की कैद और अधिकतम सज़ा 5 साल तक कि क़ैद निर्धारित की गई है. नए कानून की एक अहम बात ये है कि इसमें पहली बार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को निपटाने की समय सीमा निर्धारित की गई है. अप्रत्याशित मामलों को छोड़कर 2 साल के भीतर ऐसे मामलों का निपटारा करना अनिवार्य होगा. इसी तरह सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ जांच की अनुमति भी 3 महीने के भीतर देना अनिवार्य बनाया गया है.

सरकारी अधिकारियों को मिली काम करने की छूट
हालांकि नए कानून में सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए बड़ी राहत दी गई है. अब ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी जांच के पहले जांच एजेंसियों को सरकार से इजाज़त लेनी होगी. कई सालों से इस बात की मांग हो रही थी कि किसी अधिकारी द्वारा लिया गया फ़ैसला ग़लत तो साबित होता है लेकिन उसकी नियत ख़राब नहीं है तो उसे परेशान नहीं किया जाए. इसी के मद्देनजर नए कानून में इस बात का प्रावधान किया गया है.

Mob Lynching ( भीड़ द्वारा पिटाई) पर हंगामा खूब पर खुद में सुधार कोई नहीं

Article By - Naseema Khan 
(Special correspondence LogicalNews Mumbai)
मॉब लॉन्चिंग पर हंगामा क्यों, खुद में सुधार क्यों नही

आजकल मीडिया ,संसद व सेकुलर नेताओ में मॉब लॉन्चिंग या भीड़ द्वारा पिटाई के मामले बहुत छाए हुए है, दादरी कांड हो या बंगलोर या अलवर सभी मे मुस्लिम युवकों को भीड़ ने पीटकर मार डाला था इन सभी मामलों को लेकर संसद में काफी हंगामा हुआ व मोदी सरकार को ग्रह सचिव की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनानी पड़ी,

इन सभी मामलों में कुछ बातें साफ है कि लोगो मे गुस्सा है और गुस्सा एक वर्ग के खिलाफ ही है, ऐसा क्यों है व समाज मे ऐसा क्या हुआ जिसके कारण कोई कह रहा कि गाय को जीने का अधिकार है मुसलमान को नही तो कोई भारत को हिन्दू पाकिस्तान व हिन्दू तालिबान तक कहने से नही चूक रहा।

LogicalNews ने इस विषय मे पड़ताल की तो कुछ बड़े तथ्य सामने आए जिनसे इस स्थिति को समझ सकते है व आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है, आखिर भारत का बहुसंख्यक जनमानस अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो से इतना नफरत में क्यों है मील तथ्यों के अनुसार इसकी जड़ पुरानी सरकारों की नीतियां है।

क्यों बढ़ी आपसी नफरत-
समाज में लोगों को ऐसा लगता है कि अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों ने बहुसंख्यकों की हितों व साधनों पर कब्जा किया है व उनको डराने का प्रयास किया है सोशल मीडिया व मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद चलाए जाने व लड़कियों/महिलाओं का धर्मपरिवर्तन कर शादी करने की बातें घर घर पहुँची जिनसे आम हिन्दू-जैन-बौद्ध- सिक्ख समाज मुसलमानों के प्रति आंदोलित हुआ जिसका नतीजा सामने है इस स्थिति के लिए किसी पार्टी को जिम्मेदार ठहराना उचित नही।

पुरानी सरकारों की योजनाएं व उनका स्वरूप भी वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार है
पिछली सरकारों ने जातिवाद व धर्मवाद में समाज को वोट के लिए तोड़ा व चाहे वह फ़िल्म हो या कला या राजनीति बहुसंख्यकों को ऐसा अहसाह होने लगा कि हम दोयम दर्जे के नागरिक है हर नेता अपने साथ मुस्लिम दाढ़ी वालो को रखता था पर कोई भी तिलक लगवाने वाले या पगड़ी वाले को साथ रखने को तैयार नही था जिसके फलस्वरूप हिंदु-सिक्ख-जैन-बौद्ध संगठित होने शुरू हुए व राजनीति जाती से उठकर मुस्लिम VS गैर मुस्लिम हो गई, झूठा सेकुलरिज्म अब लोग बर्दाश्त नहीं करना चाहते।

कमजोर न्याय व्यवस्था
देश की न्याय, क़ानून व पुलिस व्यवस्था इतनी लचर है कि लोगों को ये भरोसा जरूर है कि अगर तुरंत निर्णय नहीं लिया तो अपराधी बच जाएंगे भर्ष्टाचार इस सोच को और पक्का कर रहा है इन स्थितियों के लिए कल की मोदी सरकार नही बल्कि भारत की पुरानी राजनीतिक जड़े जिम्मेदार है, 

चाहे गोहत्या हो या लव जिहाद के मामले रहे हो या बड़े माफियाओं के मामले रहे हो पैसा देकर India में सबकुछ खरीदा जा सकता है इस सोच ने देश मे फैसला तुरत लेने की आदत डाल दी है जो मॉब लॉन्चिंग के लिए जिम्मेदार है ऐसा 
करोडों बार हुआ है कि लोगों ने गोहत्यारों को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया पर वो थाने से छूट गए या कोर्ट से छूट गएजनता को छूने वाले इमोशनल मामलो में सख्त कानून होने चाहिए, भारत मे 3 विवाह के कानून है हिन्दू मैरिज एक्ट1955, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 व मुस्लिम पर्सनल लॉ( शरीयत ) 1935 इसी का सहारा लेकर लव जिहाद का धंधा चलता है 

ऐसे में आखिर क्यों मुसलमान धार्मिक गुरु सामने आकर नही कहते की गौहत्या व लव जिहाद बंद करो क्यों नही कहते कि हम समान नागरिक संघीता चाहते है जब आप ने अपने को खुद ही बहुसंख्यक समाज से अलग कर रखा है तो राजनेता संसद में बोलकर वोट तो ले सकते है पर आपसी भाईचारा नही पैदा कर सकते, बढ़े संचार माध्यमों ने इन चीजों को और भयावह बना दिया है।

LogicalNews

21.7.18

28वी GST काउंसिल की बैठक में कई वस्तुओं से हटाया गया GST सस्ती होंगी ये चीजें

दिल्ली
मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की बैठक के बाद कई वस्तुओ पर GST की दर शून्य की गई  इन चीजों के दाम काफी कम हों जाएंगे

*GST के दायरे से बाहर होने वाली चीजें*

-सैनिटरी पैड्स

-राखियां (बहुमूल्यों रत्नों से न बनी हो)

-संगमरमर से बनी मूर्तियां

-झाड़ू बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल

-साल के पत्ते

नीचे दी गई  वस्तुओं के GST दर घटाई गई है इनके दाम में भी कमी आएगी -

*GST 12% से घटाकर 5%*-

-हैंडलूम दरी

-फास्फोरिक एसिड युक्त उर्वरक

-बुनी हुई टोपियां (1000 रुपये से कम कीमत की)


*GST 28% से घटाकर 18%*

-लिथियम आयन बैटरी

-वैक्यूम क्लीनर

-फूड ग्राइंडर, मिक्सर

-शेवर्स, हेयर क्लिपर्स

-हैंड ड्रायर्स

-वाटर कूलर्स

-आइसक्रीम फ्रीज़र

-रेफ्रिज़रेटर

-कॉस्मेटिक्स

-परफ्यूम और सेंट

-पेंट और वार्निश

इसके अलावा तेल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीज़ल में मिलाने के लिए दिया जाने वाले इथेनॉल (Ethenol) पर GST की दर 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है.


LogicalNews






11.6.18

सिंगापुर के सिंटोसा द्वीप पर राष्ट्रपति ट्रैम्प व नार्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन की हुई मुलाकात जानें UPDATES

राष्ट्रपति ट्रैम्प व उत्तर कोरियाई जनरल किम जोंग उन के बीच सिंगापुर में हुई मुलाकात, जाने खास बातें।

बैठक के दौरान ट्रंप ने किम से कहा, 'मुझे विश्वास है कि हम दोनों देशों के संबंध अच्छे होंगे।'
-  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि वे और किम जोंग उन एक बड़ी समस्या और दुविधा का सामाधान निकालेंगे।

- उत्तर कोरियाइ नेता किम जोंग उन के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण के उद्देश्य हुई बैठक में ट्रंप ने कहा एकसाथ काम करके, हम इसका ख्याल रखेंगे। 

परमाणु युद्ध और सबक सिखाने की धमकी देने वाले दुनिया के दो बड़े नेताओं डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन ने सभी पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से हाथ मिलाया। इस ऐतिहासिक शिखर वार्ता का इंतजार पूरी दुनिया बेसब्री से कर रही थी। सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और हंसकर बात भी की।
एक-दूसरे से हंसकर मिले ट्रंप-किम 

Live feeds, Indian Time.
-  सुबह 7: 20 बजे : मीटिंग खत्म कर दोनों नेता बाहर निकले।

-  सुबह 6:40 मिनट : सेंटोसा ट्वीप के कैपेला रिजॉर्ट के अंदर दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ बैठकर बात की।इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे विश्वास है हम दोनों के संबंध अच्छे रहेंगे। पुराने मतभेदों को भुलाकर अब हम आगे आ चुके हैं। वहीं, किम जोंग ने कहा कि तमाम बाधाओं को दूर कर हमारी मुलाकात हुई है, यहां तक पहुंचना आसान नहीं था।

- सुबह 6.35 बजे: ट्रंप और किम ने कैपेला रिजॉर्ट में एक-दूसरे से हाथ मिलाया। इस दौरान दोनों हंसकर एक-दूसरे से बात करते नजर आए। 

- सुबह 6.15 बजे: उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन  सेंटोसा द्वीप पहुंचे।
- सुबह 5.45 बजे: किम जोंग उन का काफिला होटल से निकला। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप भी होटल शांगरीला से निकले।
इसलिए ऐतिहासिक रही ये बैठक 

दोनों नेताओं के बीच की ये मुलाकात कई मायनों में ऐतिहासिक इसलिए कही जा रही थी, क्योंकि पहली बार अमेरिका के किसी सिटिंग राष्ट्रपति ने किसी उत्तर कोरियाई नेता से मुलाकात की है। तो वहीं वहीं, सत्ता संभालने के 7 साल बाद किम जोंग उन पहली बार इतनी लंबी विदेश यात्रा पर आए हैं। 

परमाणु निरस्त्रीकरण था बैठक का उद्देश्य
इस बैठक का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाना और कोरियाइ प्रायद्वीप में पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण था। जाहिर है कि बीते दिनों दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं रहे। एक-दूसरे को परमाणु हमले की धमकी देने वाले देशों के बीच ये मुलाकात इसके चलते और भी खास मानी जा रही है।
आशा है इस मुलाकात के बाद दुनिया पर मंडराता विश्व युद्ध का खतरा टालेगा और नार्थ कोरिया विकास के मार्ग पर अग्रसर होगा।

LogicalNews
(Stay Updated)

10.6.18

अपने क्षेत्र में एक्सपर्ट्स को मोदी सरकार का बुलावा,लेटरल एंट्री का आदेश जारी, बिना UPSC के बनेगे IAS

दिल्ली

*IAS अधिकारियों की गिरफ्त से सरकार को बाहर करने की दिशा में मोदी सरकार का बड़ा प्रयास, लेटरल एंट्री शुरू करने का आदेश जारी, बिना UPSC के बनेंगे अधिकारी*
बहुप्रतीक्षित लैटरल एंट्री की औपचारिक अधिसूचना सरकार की ओर से जारी कर दी गई है। आज इन पदों पर नियुक्ति के लिए DoPT के लिए विस्तार से गाइडलाइंस के साथ अधिसूचना जारी की गई। सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी।

*10 मंत्रालयों में बनेंगे विशेष लेटरल एंट्री IAS*
10 मंत्रालयों में होगी विशेषज्ञ की नियुक्ति जोकि UPSC से नही बल्कि किसी भी PSU, प्राइवेट कंपनियों,बैंक्स में 15 साल का अनुभव रखते हो।

*नियुक्ति प्रक्रिया*
इन अधिकारियों को UPSC नही बल्कि इंटरव्यू होगा सेलेक्शन और कैबिनेट सेक्रटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमिटी इनका इंटरव्यू लेगी। योग्यता के अनुसार सामान्य ग्रेजुएट और किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव रखने वाले भी इन पदों के लिए आवेदन दे सकते हैं। आवेदन में योग्यता इस तरह तय की गई है कि उस हिसाब से कहीं भी 15 साल का अनुभव रखने वालों के सरकार के टॉप ब्यूरोक्रेसी में डायरेक्ट एंट्री का रास्ता खुल गया है। आवेदन देने की अंतिम तारीख 30 जुलाई है। 

इन मंत्रालयों में होगी 'विशेषज्ञ' की नियुक्ति-
शुरुआती पहल के अनुसार अभी सरकार 10 मंत्रालयों में एक्सपर्ट जॉइंट सेक्रटरी को नियुक्त करेगी। ये 10 मंत्रालय और विभाग हैं- फाइनैंस सर्विस, इकनॉमिक अफेयर्स, ऐग्रिकल्चर, रोड ट्रांसपोर्ट, शिपिंग, पर्यावरण, रिन्यूअबल एनर्जी, सिविल एविएशन और कॉमर्स। इन मंत्रालयों और विभागों में नियुक्ति कर विशेषज्ञता के हिसाब से ही पोस्टिंग होगी। 

बहुत दिनों से लटका था मामला, आज हुआ आदेश जारी-
ब्यूरोक्रेसी में  लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी। लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया। फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई। पीएम मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमिटी बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट में इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। 

सूत्रों के अनुसार ब्यूरोक्रेसी के अंदर इस प्रस्ताव पर विरोध और सहयोग आशंका दोनों रही थी, जिस कारण इसे लागू करने में इतनी देरी हुई। अंतत: पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद मूल प्रस्ताव में आंशिक बदलाव कर इसे लागू कर दिया गया। हालांकि पहले प्रस्ताव के अनुसार सेक्रटरी स्तर के पद पर भी लैटरल ऐंट्री की अनुशंसा की गई थी लेकिन सीनियर ब्यूरोक्रेसी के विरोध के कारण अभी जॉइंट सेक्रटरी के पद पर ही इसकी पहल की गई है। सरकार का मानना है कि लैटरल एंट्री IAS अधिकारियों की कमी को पूरा करने का भी प्रभावी जरिया बनेगा साथ ही सरकार में उच्च पदों पर कुंजी रूपी IAS की जगह विषय व काम के जानकार पहुँच सकेंगे।

LogicalNews
(Stay Updated)

7.6.18

शर्म के 4 साल, पढ़े प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक हरि शंकर व्यास का ये आंखें खोलने वाला लेख।

 भारत में हिंदी पत्रकारिता के जाने माने राजनीतिक विश्लेषक हरिशंकर व्यास ने BJP के पिछले 4 सालों के शाशन को शर्म के 4 साल का नाम दिया है पढ़े  LogicalNews के साथ शेयर किया गया उनका ये लेख- 


इसलिए कि इन चार सालों में दुनिया ने जाना, समझा, देखा कि हिंदुओं को राज करना नहीं आता! मेरे इस निष्कर्ष से कोई सहमत हो या न हो लेकिन चार साल की जो दास्तां है उससे क्या दुनिया ने यह नहीं जाना कि भारत का प्रधानमंत्री, हिंदूओं का पृथ्वीराज चौहान गधों से प्रेरणा लेता है! वह हार्वड मतलब ज्ञान का सम्मान करने के बजाय हार्ड वर्क की डुगडुगी बजा कर पकौड़ा बेचने को रोजगार सृजन बताता है। जिसका अर्थशास्त्र नोटबंदी है, बैंकों का लगातार दिवालिया होना है। जिसके राज ने सवा सौ करोड़ नागरिकों पर यह चाबुक चलाया कि तुम सब चोर हो, टैक्स नहीं देते हो इसलिए तुम लोग पहले लेन-देन का व्यवहार सुधारो। कैसलेश बनो! इधर चाबुक, उधर इनकम टैक्स, सरकारी एजेंसियों के नोटिसों का वह सिलसिला जिसने उद्यमशीलता, काम की इच्छा और जोश सबको सोख डाला है।

सोचें, एक फुदकती, दौड़ती आर्थिकी के खून को सोख कर उसे डायलिसिस पर ला डालने का जो अर्थशास्त्र नरेंद्र मोदी-अरूण जेतली ने पिछले चार सालों में दिखलाया है वैसा दुनिया के किसी देश में क्या पहले कहीं देखने को मिला और यदि नहीं तो इससे क्या दुनिया में मैसेज नहीं बना होगा कि हिंदुओं को राज करना नहीं आता!

तभी मैं नोटबंदी की घोषणा और उसके असर को समझते हुए यह थीसिस लिए हुए हूं कि इससे बड़ा हिंदूओं से दूसरा कोई विश्वासघात नहीं हो सकता कि आए थे हिंदूओं का मान बढ़ाने मगर उलटे आपने उन्हे चोर करार दिया। आए थे मुसलमानों को ठीक करने और ठोक दे रहे हंै हिंदू व्यापारियों को! आए थे हिंदूओं को एकजुट बनाने के लिए और करोड़ो-करोड़ हिंदूओं को टीवी चैनलों से जयचंद, राष्ट्रद्रोही करार करवा दे रहे हैं। आए थे पाकिस्तान को ठीक करने और चीन को औकात दिखलाने के लिए लेकिन बिना गैरत के लाहौर जा कर नवाज शरीफ के यहां पकौड़े खा लिए तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ झूला झुले!

क्या तो अर्थ नीति, क्या सुरक्षा नीति, क्या विदेश नीति और क्या समाज नीति और क्या धर्म नीति और क्या शासन नीति!
हां, है कोई बात जिससे झलका हो कि 90 साल से जिस संघ ने हिंदू वैकल्पिक राजनैतिक ख्याल में अपने प्रचारक तैयार किए, विचार बनाए और नेहरू के आईडिया ऑफ इंडिया के विकल्प में हिंदुओं ने मोदी के आईडिया ऑफ इंडिया को 2014 में जो अभूतपूर्व जनादेश दिया तो उसके बाद देश के चाल, चेहरे, चरित्र में बुनियादी परिवर्तन का कोई काम हुआ है! जो मौलिक हो, कांग्रेस से चुराया हुआ नहीं हो?

एक काम, एक बात कोई बताए जो देश की बुनियादी तासीर के सत्व-तत्व को बदलने वाली हो। वही नौकरशाही वाला ढर्रा, नौकरशाही की फाइलों में बनती योजनाओं, उससे बनते फर्जी-झूठे आंकड़े और जनता रामभरोसे! आंकडों, योजनाओं की फेहरिस्त, जुमलों को ले कर नरेंद्र मोदी, अमित शाह के रट्टे में कुछ भी मौलिक, नया नहीं है। पंडित नेहरू की विशाल पंचवर्षीय योजनाओं से ले कर अटलबिहारी वाजपेयी के शाईनिंग इंडिया आज के वक्त से ज्यादा जनता की फील लिए हुए आंकड़े बने थे।

और नोट करें, तब किसी ने यह नहीं सुना कि पकौड़े बेचो, पान की दुकान खोलो तो देश बनेगा या यह कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्री अपनी कर्मवीरता इन बातों से साबित करेंगे कि वे कितने घंटे काम करते हैं या कितने पुश अप, दंड-बैठक लगाते हैं।

सचमुच शर्म के इन चार सालों में वह सब है जो हम हिंदूओं को बुद्वीविहीनता, कर्महीनता में कनवर्ट कर दे रहा है। 2014 में मुझे उम्मीद थी कि हिंदूओं के बुद्वी युग, कर्म युग और साहस युग में प्रवेश का वक्त आया! मगर सोचंे, इन चार सालों में क्या हुआ? मानों नरेंद्र मोदी के राज के साथ सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा सभी का हम हिंदुओं को श्राप लगा जो भारत से, भारत के विचार-बहस और नेरैटिव से बुद्वी विलुप्त हुई पड़ी है और उसकी जगह संकल्प है हिंदुओं को मूर्ख बनाने का। उन्हे भक्त बनाने का, उन्हे डराने का। तभी आज जो बुद्वी, विचार, सोच के संस्कार लिए हुए है उनका न पढ़ने का मन होता है, न टीवी चैनल देखने का होता है और न बहस में हिस्सा लेने का।

भारत में आज बुद्वी रूठ गई है। सरस्वती का श्राप ऐसा लगा है कि जिन नरेंद्र मोदी की जुबां चार साल पहले भरोसे, विश्वास, कर्म के तर्क लिए हुए थी वह अब काली हुई, चिल्लाती हुई, बेसुरी, बेतरतीब घटिया जुमलों को उगलती लगती है तो उनके साथ उनके भक्तों की सोशल मीडिया पर दशा सिर्फ रूदाली और गालियों वाली हो गई है। देवी सरस्वती रूठ गई हंै इसलिए हिंदू आज सरस्वती, बुद्वी का पुजारी नहीं मूर्खताओं में जी रहा तो लक्ष्मीजी का रूठना भी नोटबंदी की बुद्वीहीनता के चलते जैसे जो हुआ इसे बूझना मुश्किल नहीं है। साहस युग याकि देवी दुर्गा के रूठने, उनके श्राप की हकीकत यह है कि इन चार सालों में प्रमाणित हुआ है कि दुनिया के सर्वाधिक कायर, गुलाम, डरपोक जीव यदि कोई है तो वह हिंदू है।

हां, यह शर्म का सबसे बड़ा बिंदु है कि नरेंद्र मोदी-अमित शाह नाम के दो लोगों ने अपनी सत्ता भूख में ऐसा आंतक बना डाला कि संघ हो, उसके संगठन हो, भाजपा के नेता हो सब साष्टांग लेटे हुए है। मैं पहले भी इस बात को लिख चुका हूं कि सत्ता से हिंदू कितना डरता है। हिंदू की हजार साल की गुलामी ने उसके ऐसे डीएनए बना डाले है कि उसमें देवी दुर्गा की निडरता का आर्शीवाद फल ही नहीं सकता। कितने कायर है हम हिंदू यह पिछले चार सालों में न केवल मीडिया, उद्योगपतियों, अफसरों, जजों, समाजसेवियों, धर्मगुरूओं ने जाहिर किया है बल्कि इसे सर्वाधिक किसी ने जाहिर किया है तो वह संघ परिवार और भाजपाई हिंदूओं ने किया है। सोचंे, चार सालों के मोदी-शाह के राज में ऑमेजन-वालमार्ट-रिटेल की जो परिघटना है उससे क्या संघ, उसके स्वदेशी संगठनों को हिल नहीं जाना चाहिए था। पर चू करने की हिम्मत तक नहीं। मोदी-शाह का चार साल का व्यवहार सचमुच में संघ की कथित सामाजिकता, पारिवारिकता, बुर्जगों का मान-सम्मान, सामूहिक निर्णय प्रक्रिया की ईंट-ईंट पर बुलडोजर है। क्या नहीं लगता कि चार साल में लालकृष्ण आडवाणी, डा मुरलीमनोहर जोशी सहित तमाम बुजुर्गों की जो अनदेखी हुई, जो उनका असम्मान हुआ वह संघ, भाजपा के कथित संस्कारों के लिए जहां शर्मनाक है वहीं इस जमात के चुपचाप सहते जाने की कायरता का प्रतिमान भी है?

मगर कायर, गुलाम, भक्त के डीएनए और यह बुद्वीहीनता कि इस पृथ्वीराज के साथ ही हिंदूओं का मरना-जीना है वाली सोच में राष्ट्रवादी हिंदू भी उतना ही डरा हुआ है जितना आम हिंदू हाकिम के आगे डरा हुआ रहता है।
डर, गुलामी, भक्ति क्योंकि हिंदू का इतिहास अनुभव है इसलिए इसमें अस्वभाविकता नहीं। मगर इनसे भी गंभीर चार साल का त्रासद मसला यह है कि मोदी-शाह राज मतलब हिंदू शर्म का यह अनुभव कि हिंदूओं को राज करना नहीं आता!

हां, 15 अगस्त 1947 से ले कर 26 मई 2018 का भारत राष्ट्र-राज्य का बार-बार रेखांकित होता तथ्य है कि अवसर बार-बार आए। सबकों मिले लेकिन वह उम्मीदों, वक्त-दुनिया के विकास, उसकी चाल की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। वह भयावह तौर पर जाया हुआ और तभी चार सालों के अनुभव ने अपनी यह थीसिस बनाई है कि हिंदूओं को राज करना नहीं आता। 90 साल के हिंदू आईडिया अनुष्ठान का यदि यह हश्र है तो बतौर कौम हम हिंदूओं को क्या सोचना नहीं चाहिए?

पर हम हिंदू सोच भी कैसे सकते हैं आख़िर ? हमें सरस्वती का श्राप है और भक्ति हमारी नियति है!

 नया इंडिया के चीफ एडिटर हरिशंकर व्यास जी के एडिटोरियल पेज से साभार।


LogicalNews
(Stay Updated)

3.6.18

एयर इंडिया के भविष्य पर मंडराता खतरा

दिल्ली

एयर इंडिया को बेचने के लिए केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने निजी निवेशकों से मांगे थे EOI (Bids) जिसकी समय सीमा खत्म होने के बाद अभी तक किसी ख़रीदार ने महाराजा को खरीदने में नही दिखाई रुचि, मंत्रालय ने ट्वीट कर इस बारे में सूचना दी व कहा आगे फिर प्रयास किये जाएंगे, 

गौरतलब है कि AIR INDIA पर इस समय लगभग 700 करोड़ डॉलर या 48000 करोड़ रुपए का कर्ज है 76% हिस्सेदारी बेचना चाह रही सरकार चाहती है कि ख़रीदार 500 करोड़ डॉलर का कर्ज भी चुकाए, जिसके लिए कोई तैयार नही, इंडिगो व जेट एयरवेज ने भी शुरुआत की बातचीत के बाद किया किनारा।

2007 में इंडियन एयरलाइंस के विलय के दौरान नौकरशाही द्वारा लिए गए नए बोइंग विमान खरीदने के गलत निर्णय व यूनियन बाजी ने महाराजा को बनाया कंगाल, जबकि अभी भी शान की सवारी AIR INDIA में 30 करोड़ लोग करते है सफर, 

ऐसे में 1 साल बाकी बची वर्तमान सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर शायद ही कोई निर्णय ले पाएगी और नीति आयोग सहित विश्व के बड़ी एयरलाइंस कंसल्टेंसी का मानना है कि अगर इसको बेचा नही गया तो महाराजा को बंद होने से कोई नहीं रोक सकता, 

इसी बीच AIR INDIA की यूनियन भी सोशल मीडिया में SAVE Air India कैम्पेन चला रही है, इन सबके बीच ।महाराजा का भविष्य खतरे में।

LogicalNews
(Stay Updated)

14.5.18

पढ़े हिंदू युवा वाहिनी में हुई उठापटक पर LogicalNews की एक रिपोर्ट, जानिए कौन है सुनील सिंह जिन्होंने की है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बगावत

लख़नऊ

कल राजधानी के VVIP गेस्ट हाउस में हुए एक सम्मेलन ने UP की राजनीति में भूचाल ला दिया है जिंसमे प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनके ही संगठन हिन्दू युवा वाहिनी ने मोर्चा खोल दिया है,
इस मीटिंग में उपस्थित लगभग 300 हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया व BJP-RSS से इतर एक राष्ट्रवादी-हिंदूवादी राजनीतिक विकल्प के रूप में हिन्दू युवा वाहिनी को तैयार करने का संकल्प लिया।

मामला तबतक तो शांत था पर शाम को गोरखपुर से लख़नऊ लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को बड़ा बनाते हुए VVIP गेस्ट हाउस के व्यवस्थापक RP सिंह को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया, इसके बाद मामले ने राष्ट्रीय रूप ले लिया।

कौन है सुनील सिंह-
सुनील सिंह हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष हैं गोरखपुर के निवासी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे करीबी रहे सुनील सिंह से 2017 विधानसभा चुनाव के समय बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने के कारण योगी आदित्यनाथ ने इनसे दूरी बना ली थी व सुनील सिंह को HYV से बाहर करने का आदेश भी कार्यालय से जारी किया गया था, बाद में डुमरियागंज के विधायक राघवेंद्र प्रताप को योगी ने HYV का प्रदेश प्रभारी बनाया राघवेंद्र ने राकेश राय को नया अध्यक्ष बनाया।

सुनील सिंह की HYV में कानूनी व व्यक्तिगत स्थिति

गौरतलब है कि हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण सुनील सिंह पूरे संगठन में सबसे प्रभावशाली स्थिति में थे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा दूर किए जाने के बाद भी कार्यकर्ताओं के लिए काम करते रहने के कारण संगठन में उनकी छवि दिन-ब-दिन सुधरती चली गई , हिंदू युवा वाहिनी के संविधान के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष को निकालने का अधिकार 7 लोगों की एक कमेटी को है जिसमें से पांच लोग सुनील सिंह के साथ हैं ऐसे में वर्तमान समय में भी हिंदू युवा वाहिनी के कानूनी रूप से प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह ही है व योगी जी के करीबी होने के कारण पूरे संगठन पर उनका प्रभाव स्थापित है।

क्या होंगे इस घटना के परिणाम

वर्तमान समय में BJP और RSS हिंदुओं के ठेकेदार बने बैठे हैं वह हिंदुत्व के नाम पर सारा वोट भाजपा और RSS से उठा रहे हैं ऐसे में लगभग अन्य सभी हिंदूवादी संगठन शुद्ध अथवा मृत हो गए हैं ऐसे में यदि हिंदू युवा वाहिनी भाजपा RSS से अलग होकर काम करता है तो बहुत बड़े वर्क समर्थन हिंदू युवा वाहिनी को मिलेगा जिस बात को समझ कर ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे ने रात में फोन करके योगी जी से कहा कि इस पर कोई एक्शन लिया जाए जिसके परिणाम स्वरुप वीवीआईपी गेस्ट हाउस के व्यवस्थापक को सस्पेंड किया गया यदि यह संगठन व्यापक प्रदेश पर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो जाता है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान भाजपा RSS को 2,000 1922 के चुनाव में देखना पड़ेगा साथ ही साथ आगामी राजस्थान और मध्यप्रदेश के चुनाव में भी इसका बुरा असर भाजपा को झेलना पड़ेगा

LogicalNews
(Stay Updated)

20.4.18

कठुआ मामले में बड़ा खुलासा, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में आया सामने बच्ची से नही हुआ था रेप, बेवजह फैलाया गया हंगामा

जम्मू

कठुआ मामले में बड़ा खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई बात बच्ची से नहीं हुआ था दुष्कर्म, 

जम्मू क्षेत्र के कठुआ जिले के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की चार्जशीट में जो साक्ष्य और तथ्य पेश किए गए हैं उनमें कई कड़ियां ऐसी हैं, जो आपस में मेल नहीं खातीं। कठुआ जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (SIT ) को जो बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भेजी है, वह एक नहीं बल्कि दो हैं। अमूमन मृतका की एक ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट अस्पताल से भेजी जाती है। दो डॉक्टरों की रिपोर्ट में भी अंतर है, जिससे यह मामला और पेचीदा हो गया है।

यह तथ्य तब सामने आए जब आरोपितों के वकील असीम साहनी को कठुआ अस्पताल से दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दोनों रिपोर्ट में कहीं पर भी बच्ची के साथ दुष्कर्म का कोई जिक्र तक नहीं है।

पहली रिपोर्ट : शरीर पर छह जख्म, खोपड़ी सलामत
पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची के शरीर पर छह जख्म हैं, जबकि दूसरी रिपोर्ट में सात जख्म का जिक्र है। एक जख्म कान के पास लगभग दो सेंटीमीटर है। यह जख्म ऐसा होता है जो गिरने की वजह से भी आमतौर पर होता है। खोपड़ी में कोई फ्रेक्चर नहीं है। क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में दावा किया गया है कि बच्ची का गला घोंटने के बाद उसके सिर पर पत्थर मारा गया। जानकारों के अनुसार अगर पत्थर मारा जाए तो जख्म की तीव्रता अधिक होती। बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह थ्योरी भी मेल नहीं खा रही।

पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए तथ्य-
मौत का कारण सांस रुकने से हुए हार्ट अटैक बताया गया
पुलिस ने 17 जनवरी को रसाना के जिस स्थान से शव बरामद किया, वहां पर उसे पत्थर मारने का दावा क्राइम ब्रांच ने किया है, लेकिन उस पत्थर पर भी खून का निशान नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि बच्ची की मौत पहले हो चुकी थी। 

अगर बच्ची की हत्या 17 जनवरी को होती तो पत्थर पर खून के निशान जरूर होते। इतना जरूर कहा गया है कि बच्ची की मौत का कारण सांस रुकने से हुए हार्ट अटैक से बताया गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि बच्ची के पेट में नशीली दवाई मिली है। जहां तक बच्ची के शरीर पर चोट के निशान की बात है तो उसके दाहिने बाजू, पेट और निचले हिस्सों पर खरोचें हैं।

दूसरी रिपोर्ट: जांघ पर खरोंचें और हाइमन था फटा
दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जांघ पर कुछ खरोंच पाई गई हैं, जो गिरने के कारण भी हो सकती हैं। रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह किया गया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ है। इतना जरूर है कि बच्ची का हाइमन फटा हुआ है। 

जम्मू के श्री महाराजा गुलाब सिंह (SMGS) अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ का कहना है कि हेमेन घुड़सवारी, तैराकी, साइक्लिंग, जोर का काम आदि करने से भी टूट सकता है। रिपोर्ट में बच्ची के गुप्तांग और एफएसएल भेजे गए कपड़ों में भी कोई वीर्य नहीं पाया गया है। हालांकि क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट में यह दावा जरूर किया है कि जांच के लिए एफएसएल में भेजे गए कपड़े धो दिए गए थे।

रिपोर्ट से हत्या कहीं और होने व शव फेंकने की आशंका-
JK पुलिस की या तो ये बड़ी चूक है या जानबूझकर लीपापोती कि गई उसने आरोपितों के अंडर गारमेंट्स भी FSL में नहीं भेजे। अगर भेजे होते तो जांच में कुछ मदद मिल सकती थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची के गुप्तांग में हल्का खून का धब्बा जरूर है। यह चोट के कारण भी हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बच्ची का शव जिस दिन मिला, उसकी मौत 36 से 72 घंटे पहले हुई है। इससे लगता है कि हत्या कहीं और की गई और शव रसाना में फेंका गया।

मिले बाल पर भी उठे सवाल
एक और उल्लेखनीय बात यह है कि बच्ची के बाल, जिन्हें देवस्थान से बरामद करने का दावा किया गया, वे मार्च में क्राइम ब्रांच ने दिल्ली एफएसएल को भेजे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या देवस्थान की 17 जनवरी के बाद कोई सफाई नहीं हुई? ज्ञात हो कि इस देवस्थान पर लोग रोजाना नतमस्तक होते हैं व कुलदेवता के मंदिर में लोग झाड़ू लगाने को पवित्र मानते है ऐसे में वो सबूत भी झूठा साबित होगा, 

ऐसे में JK पुलिस की चार्जशीट पर मीडिया व जनता में सवाल उठना लाजिमी है



LogicalNews

8.3.18

गोरखपुर उपचुनावों को लेकर LogicalNews की रिपोर्ट, क्या बचेगी BJP और CM योगी की शाख या लहराएगा अखिलेश का परचम


गोरखपुर

गोरखपुर उपचुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं सीएम योगी अखिलेश यादव कई भाजपा नेता बराबर चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं, पिछले 29 सालों से यहां के सांसद का पता गोरखनाथ मंदिर का रहा है. साल 1998 से लगातार पांच बार इस सीट से योगी आदित्यनाथ निर्वाचित हुए. उनसे पहले उनके गुरु और श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के अगुआ रहे महंत अवैद्यनाथ 1989 से लगातार तीन चुनावों में यहां का प्रतिनिधित्व करते थे.शायद इसीलिए इस बार का चुनाव बेहद ख़ास हो गया है .

BJP की शाख का प्रश्न-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी ये साबित करने में जी जान से जुटी है कि परंपरागत रूप से मंदिर के प्रभाव वाली ये सीट योगी के उम्मीदवार न रहने के बावजूद पार्टी के पास ही रहेगी,
मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश में वो पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं. राष्ट्रीय राजनीति में कर्नाटक से लेकर त्रिपुरा तक के चुनावों में पार्टी की ओर से प्रभावी इस्तेमाल के बाद उनकी छवि और कद में इजाफा हुआ है. ऐसे में उनके लिए अपनी परंपरागत सीट पर पार्टी को प्रभावशाली जीत दिलाना बेहद जरूरी है.

कांग्रेस का दावा
कांग्रेस ने यहां से पेशे से चिकित्सक और सामाजिक रूप से बेहद सक्रिय डॉक्टर सुरहिता करीम को अपना प्रत्याशी बनाया है.मूल रूप से से बंगाली हिन्दू समुदाय से ताल्लुक रखने वाली सुरहिता चटर्जी के पति डॉ वजाहत करीम एक मशहूर चिकित्सक और फिल्म निर्माता के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं पर उनको LOVE जिहाद की निशानी मान रहे लोग अब वोट देने से रहे

सपा- बसपा का समीकरण
पिछले हफ्ते 23 साल से प्रदेश की राजनीति में एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी रही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के अचानक गठजोड़ ने मामले में नाटकीय मोड़ ला दिया है.
गोरखपुर संसदीय सीट के 19 लाख 50 हज़ार वोटरों में निषादों की संख्या लगभग 3,50000 के बीच बताई जाती है, अगर इनके साथ लगभग 8% दलित (खास कर जाटव) वोटर और 9% मुस्लिम वोटर व 10% यादव आ जाएं तो चुनाव जीतना BJP के लिए असंभव होगा।

समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रवीण निषाद इस इलाके में बहुत कम समय में काफी तेजी से उभरी निषाद पार्टी के संयोजक डॉ संजय निषाद के बेटे हैं जिन्होंने पिछले दिनों पिछड़े मुसलमानों में गहरी पैठ रखने वाली पीस पार्टी के साथ मिलकर अब सपा का दामन थाम लिया है.मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई कर चुके प्रवीण निषाद पिता की तरह ही छापामार किस्म की लडाइयों के शौक़ीन दिखते हैं जिसमें सुर्खियाँ आसानी से हासिल होती हैं.

क्या कह रहे है लोग-
मंगलवार की सुबह परिवार सहित गोरखनाथ मंदिर पहुँच कर गोरक्षनाथ के गुरु रहे मछेंदर नाथ की मूर्ति के सामने माथा नवाने वाले प्रवीण ने LogicalNews से कहा, "एक हिंदू धर्मानुयायी होने के नाते आशीर्वाद मांगने का अधिकार तो सबको है" जब हमने उनसे अपनी राजनीतिक पसंदके बारे में पूछा तो उनका कहना था कि मंदिर में श्रद्धा है पर वोट देना जरूरी नही योगी होते हो अलग बात थी, 

हालांकि बसपा के कोआर्डिनेटर घनश्याम खरवार ने LogicalNews से कहा, "बहनजी के अनुशासित कार्यकर्ता उनके आदेश के बाद पूरी ताकत से सपा प्रत्याशी के प्रचार में जुट गए हैं. दरअसल विपक्षियों को 1999 का लोकसभा चुनाव दोहराने की उम्मीद है जब निषादों के कद्दावर नेता रहे जमुना निषाद ने निषाद,मुस्लिम और यादव वोटों के बूते योगी आदित्यनाथ को बेहद कड़ी टक्कर दी थी. उस चुनाव में योगी की जीत का अंतर महज सात हज़ार वोटों तक सिमट गया था.
उन्हें लगता है कि इस बार योगी के प्रत्याशी न होने से ये खाई भी पट जायेगी.लेकिन भाजपा भी आश्वस्ति के शिखर पर है. 

कहाँ गया हिंदुत्व कार्ड-
जिस हिंदुत्व कार्ड की बदौलत पिछले 35 सालों से गोरखनाथ मंदिर का आचार्य महंत अथवा मंदिर से जुड़े व्यक्ति चुनाव जीते रहे थे वह हिंदुत्व का इस चुनाव में खास महत्व नहीं रख रहा है यह बात विशेष रूप से सोचने लायक है कि ऐसा क्यों हुआ हमने जब लोगों से बात की तो यह महसूस हुआ की मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी जी द्वारा हिंदू युवा वाहिनी को बराबर इग्नोर किए जाने की बात इस बार के चुनावी चर्चा में है जिसके कारण लोग इस चुनाव को हिंदू vs मुस्लिम की नजर से नहीं देख रहे हैं अथवा सर्कुलर वर्सेस हिंदुत्व का कार्ड काम नहीं कर पा रहा है जबकि अभी सिर्फ एक साल हुआ है ।

LogicalNews का निष्कर्ष
वर्तमान परिस्थितियों में गोरखपुर में आज के न्यूज़ इस निष्कर्ष पर निकली है वह यह दिखाता है कि हम से मिलने मैं वाले 10 मैसेज 7 व्यक्तियों ने BJP को या भाजपा प्रत्याशी को वोट न देने में रुचि अधिक है अतः योगी जी के द्वारा की गई जनसभा को और सरकार के कार्यों का कोई खास असर नहीं पड़ता दिख रहा है ऐसे में यदि भाजपा चुनाव हारती है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी लोगों को लगता है कि योगी जी खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं तो वह सपा को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं साथ ही योगी जी के द्वारा की गई मेहनत पर ही पूरा प्रणाम टिका है यदि योगी जी जनता को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में करने में सफल होते हैं तो चुनाव जीतने की संभावना है परंतु फिर भी हमें लगता है कि यह चुनाव अगर बीजेपी जीतती है तो भी अंतर बहुत कम होगा


LogicalNews
(Stay Updated)

1.3.18

होलिका दहन आज जानिए शुभ समय व कुछ सरल तांत्रिक उपाय जो कर सकते है आपने जीवन को परिवर्तित

लख़नऊ

आज फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाना है। होली की तैयारी पूरी हो चुकी है और होलिका विशेष रूप से तैयार कर दी गई है लेकिन होलिका का दहन किस शुभ मुहूर्त में करें यह जानना बड़ा ज़रूरी है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को प्रदोष काल में होलिका दहन विशेष रूप से शुभ माना गया है। हालांकि हर शहर में मुहूर्त का समय अलग-अलग होता है। 

होलिका दहन मुहूर्त 2018 लख़नऊ में

होलिका दहन मुहूर्त
18:30:47 से 20:59:49 तक
कुल अवधि
2 घंटे 29 मिनट


कुछ सरल तांत्रिक प्रयोग-

1.होलिका के दहन के समय परिवार के लोगों को होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा के दौरान होलिका में चना, मटर, गेहूं, अलसी अवश्य डालना चाहिए। यह धन लाभ का अचूक उपाय बताया जाता है।

2. होली वाली रात को पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जरूर जलाएं और पीपल की सात परिक्रमा लगाएं। ऐसा करने से भाग्य की सभी बाधाएं दूर होती हैं।

3. होलिका दहन के बाद अगले दिन होली खेलने से पहले मंदिर में जाकर देवी-देवताओं को गुलाल चढ़ाएँ।

4. जब होली जल रही हो, उस दौरान होलिका में कपूर डालें। ऐसा करने से हमारे आसपास मौजूद हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

5.होलिका दहन के समय सरसों के कुछ दानें होलिका को अर्पित करें माता लक्ष्मी को सरसों के दाने प्रिय है होली को एक बड़ा यज्ञ कुंड समझते हुए सरसों के दाने अर्पित करने से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है व आगामी वर्ष में धन संपत्ति की कमी नही रहती।

आप सभी सम्मानित पाठकों को LogicalNews की पूरी टीम की ओर से होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

LogicalNews
(Stay Updated)

25.2.18

Social Media buzz क्या बंद होने वाला है Aircel.

लख़नऊ

UP East व दिल्ली में गुड़गांव की कंपनी टेलिकॉम ऑपरेटर Aircel का नेटवर्क कई दिनों से बाधित हैं, 3 दिन से Customers के फ़ोन से गायब है नेटवर्क, परेशान ग्राहकों को डर है कि कही Aircel कंही बंद नहो जाए और हमारे no फंस जाएं।

इन्ही मामलों की हमारे पास शिकायत आने के बाद LogicalNews ने जानकारी ली मिली सूचना के अनुसार ,आज Aircel ने अपनी सेवांए प्ररम्भ की है हमने इस मुद्दे पर कंपनी ने गुड़गांव के CEO कैज़ाद हीरजी से बात की उनके अनुसार AIRCEL बंद नही होने जा रहा है पर हमको कंपनी की ओर से FUND मिलना बंद हो गया है

CEO के अनुसार नेटवर्क में दिक्कत कुछ टावर कंपनियों के साथ तालमेल के वजह से आ रही है,ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जाएंगी व निकट भविष्य में हम कही नही जा रहे हैं।

गौरतलब है कि 22,23 व 24 फरवरी2018 के बीच ही UP व दिल्ली से 12 लाख लोग AIRCEL का नेटवर्क छोड़कर PORT करने की रिकेस्ट कर चुके है।, अतः हमारी सर्च में aircel अभी खतरे में नही है पर ज्यादा दिन तक ये ऑपरेटर चल नही पाएगा।इसलिए अगर आप port करना चाहते हैं तो इसमें कोई बुराई नही है।



LogicalNews
(Stay Updated)

21.2.18

2007 में हुए गोरखपुर दंगा मामले में आज आएगा फैसला, इस मामले में CM योगी गए थे जेल

 इलाहाबाद

गोरखपुर में साल 2007 में हुए साम्प्रदायिक दंगे के मामले में उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाए या न चलाया जाए, इस बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट गुरुवार को अपना फ़ैसला सुनाएगा.

मामले में योगी के अलावा कई अन्य लोग भी अभियुक्त हैं.हाईकोर्ट ने इस मामले में पिछले साल 18 दिसंबर को अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था. क़रीब 11 साल पहले गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे.

इस मामले में राज्य सरकार ने पहले आदित्यनाथ योगी को अभियुक्त बनाने से ये कहकर मना कर दिया था कि उनके ख़िलाफ़ कोई साक्ष्य नहीं हैं. बाद में मामले की सीआईडी क्राइम ब्रांच से जांच हुई और फिर सरकार की ओर से हाईकोर्ट में क्लोज़र रिपोर्ट लगा दी गई.

लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि बिना किसी जांच और कार्रवाई के ही सरकार ने क्लोज़र रिपोर्ट फ़ाइल कर दी. हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार की और उस पर सुनवाई की.

याचिकाकर्ताओं के वकील SFA. नक़वी कहते हैं, "इस मामले में राज्य सरकार ने क्लोज़र रिपोर्ट लगा दी थी, लेकिन हमारी इस आपत्ति के बाद कि सरकार के मुलाज़िम अपने ही मुख्यमंत्री के ख़की मांग कैसे करेंगे? कोर्ट ने सरकार से दोबारा जवाब तलब किया, सुनवाई पूरी हुई और अब फ़ैसले की घड़ी आ गई है. इसके अलावा CID क्राइम ब्रांच की बजाय किसी अन्य एजेंसी से भी जांच कराने की हमारी मांग है."

27 जनवरी 2007 को गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था. आरोप है कि इस दंगे में दो लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे, CM योगी पर एक दरगाह जलाने का भी आरोप है,

इस मामले में दर्ज एफ़आईआर में आरोप है कि तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ, गोरखपुर के विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और गोरखपुर की तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी ने रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था और उसी के बाद दंगा भड़का था.

इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के कई नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई थी. इन लोगों पर एफ़आईआर दर्ज कराने के लिए गोरखपुर के एक पत्रकार परवेज़ परवाज़ और सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात ने याचिका दाख़िल की थी.

परवेज़ परवाज़ बताते हैं, "मैंने अपनी आँखों से देखा था कि रेलवे स्टेशन के पास मंच पर ये लोग भाषण दे रहे थे और एक के बदले 10 मुसलमानों को मारने जैसी बातें कह रहे थे. तमाम साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद सरकार को कुछ भी नहीं मिला, ये समझ से परे है. इसीलिए शायद कोर्ट ने भी इनसे सब कुछ जल्द पेश करने को कहा."

FIR दर्ज होने के बाद सरकार ने मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इसे किसी अन्य एजेंसी को सौंपे जाने की मांग की थी. इस दौरान अंजू चौधरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने काफ़ी दिनों तक स्टे कर रखा था, लेकिन 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे वापस ले लिया.

इसी दौरान राज्य में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारें रहीं, लेकिन मामले की पैरवी में दोनों सरकारों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.,वहीं इस साल मार्च में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्य के मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट से ये कहते हुए केस को बंद करने की मांग की कि जांच एजेंसी को कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल सके.

हालांकि, उस वक्त यह सवाल उठा था कि गृह विभाग के अफसर अपने ही मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी कैसे दे सकते हैं. इसी का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सरकार से दोबारा अपना पक्ष रखने का समय दिया है.

LogicalNews

20.2.18

खतरे में PNB बैंक, लोगों का भरोसा उठने के बाद फेल होने का खतरा बढ़ा

लख़नऊ

*खतरे में PNB बैंक का अस्तित्व*


नीरव मोदी घोटाले के बाद से बैंकिंग सेक्टर के साथ शेयर बाजार में भी हड़कंप, PNB के शेयरों में भारी गिरावट की वजह से पिछले 5 दिन में बैंक के मार्केट वैल्यूएशन में 10,939 करोड़ रुपये की कमी आ चुकी है,



लोगों का भरोसा PNB से उठ रहा है, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी FITCH ने बैंक को NEGATIVE सूची में डाल दिया है, हालांकि आज शेयरों में मामूली उछाल भी देखने को मिला पर जनता का विश्वास घटना बैंक के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर सकता है



कोई भी बैंक अपने पास स्थित पूंजी या सरकार की गारंटी से नही बल्कि जनता के भरोसे से चलता है अगर ग्राहक अपना पैसा निकालने लगे तो बैंक का फेल होना तय है, ऐसे में कुछ भी करके किसी बड़ी BANKING CRISIS से बचने के लिए सरकार को सामने आना पड़ेगा।


ऐसे में नीरव मोदी के वकील ने भी PNB पर कई आरोप लगाए है कि मेरा इन सब मामलों  से कोई लेना देना नही है बल्कि PNB के द्वारा लगाए गए आरोपों से मेरे ब्रांड और व्यापार का नुकसान हुआ है, 


कुछ भी हो पर PNB को बहुत समझ कर कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि अफवाहों के दौर में बैंक के बाहर पैसा निकालने वालो की लाइन लंबी होती जा रही है।


LogicalNews


6.2.18

मालदीव में बढ़ता जा रहा राजनीतिक संकट, पूर्व राष्ट्रपति की मदद के लिए भारत भेज सकता है सेना


मालदीव संकट

मालदीव में बढ़ता जा रहा राजनीतिक संकट, सुप्रीम कोर्ट ने जिन 9 बड़े राजनेताओं की रिहाई का आदेश दिया था, उसे अब वापस ले लिया है.

राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन की ओर से सोमवार को देश में आपातकाल लगाए जाने के 24 घंटे के अंदर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदल लिया है. 

खास बात यह है कि आपातकाल लगाए जाने के बाद सुरक्षा बलों ने जबरन सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश कर लिया था. बाद में चीफ जस्टिस को गिरफ्तार कर लिया गया और यह फैसला उनकी गैरमौजूदगी में लिया गया है. कल वहां 2 बड़े जज को गिरफ्तार कर लिया गया था.

भारत समर्थक पूर्व राष्ट्रपति  मोहम्मद नशीद भी इन्ही 9 में है, उन्होंने भारत से मदद मांगी है जबकी अब्दुल्ला यामीन चीन समर्थक है, 1 फरवरी को यमीन समर्थक कम्युनिस्टों ने किया था तख्तापलट, भारत नशीद की सहायता हेतु अपनी सेनाएं भेजने पर कर सकता है विचार।


LogicalNews
(Stay Updated)

3.1.18

भीमा कोरेगांव मामले में LogicalNews को रिपोर्ट, नेताओं की सियासत से समाज का बटवारा

Mumbai

महाराष्ट्र में दलितों और मराठा समुदाय के बीच कई जगह हिंसक झड़पें होने की ख़बरें हैं. इन झड़पों की शुरुआत कोरेगांव भीमा, पाबल और शिकरापुर से हुई, जहां बवाल में कथित रूप से एक व्यक्ति की मौत हो गई, इस मामले को कुछ असफल नेताओ ने हवा दी और जातीय भेदभाव की आग पूरे महाराष्ट्र में फैल गई,
पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिराह के दौरान हुई हिंसा के आरोप गुजरात के विधायाक  जिग्नेश मेवानी और JNU के छात्र उमर खालिद पर लगे हैं. 

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक मंगलवार देर शाम अक्षय बिक्कड और आनंद डॉन्ड नाम के दो युवकों ने पुणे के डेक्कन पुलिस स्टेशन में जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद के खिलाफ लिखित में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद यह हिंसा फैली है. 

मामले को बढ़ता देख BR अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर भे नेता बनने निकल पड़े है और आज महाराष्ट्र बंद का आवाहन किया है, मुंबई का Eastern Express Highway ब्लाक है ठाणे , पुणे में जनजीवन अस्तव्यस्त हो चुका है, मुंबई में रोड़ों की ब्लाक होने से बचाने  के लिए धारा 144 लगाई गई है, संसद में हंगामा हुआ अव प्रधानमंत्री से सफाई देने की मांग विपक्षी दल कर रहे है।

गौरतलब है कि 200 साल पहले  1 जनवरी 1818 को स्वराज्य की मांग कर रहे मराठा सेनाओ से ब्रिटिश सेनाओ का युध्द हुआ था जिंसमे मराठा सेनाओ का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय व बॉम्बे इन्फेंट्री की ब्रिटिश सेना का नेतृत्व जरनल जोसफ स्मिथ के हाथ मे था, पुणे पर अंग्रेजों के कब्जे से बचाने के लिए रास्ते मे ब्रिटिश सेना की टुकड़ी पर पेशवाई सेना ने हमला किया जिंसमे अधिकतर सैनिक महार थे व इस युध्द में 275 ब्रिटिश सैनिक मरे व लगभग 600 मराठा सैनिक मारे गए, और मराठा सेना वापस लौट गई, बाद में मराठों ने पुणे पर कब्जा किया।

ब्रिटिश सेना की जीत का जश्न आज शायद ही आजाद भारत के किसी भी कोने में मनाया जाता हो पर ये काम अब होने लगा है और इसकी  जड़ है भीड़तंत्र में समाज को किसी भी तरह ऐसे हिस्सों में बांटने का प्रयास जिससे कि शाशन आसानी से किया जा सके क्योंकि लोग इतने बुद्धिमान नही होते और भावनाओं में बहकर निर्णय लेते है इसलिए ये प्रयास सफल हो रहे है,

गुजरात मे जातिवाद का जिन्न बाहर आया पर हार के बाद कुंठाग्रस्त हो चुका है जिसके कारण जिग्नेश मेवानी को आगे करके दलितों को हिंदू समाज से अलग दिखाने का प्रयास किया जा रहा है जिसके साथ भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह के नारे लगाने वाला उमर खालिद भी शामिल है, जातिवादी नेताओ के अनुसार देश मे दलित +अल्पसंख्यक VS सवर्ण + OBC की राजनीति होनी चाहिए उंसके लिए ये सबसे अच्छा मुद्दा बनाया जा सकता है। नए नए नेता बनने चले प्रकाश अम्बेडकर शायद ये भूल गए है कि उनके दादा जी रोड जाम करके दलितों का भला नही किये बल्कि कुछ सार्थक पहले किये, जिस छुआछूत को लेकर ये हल्ला मचा है वो कबकी खत्म हो चुकी है।

समाज को अब जातिवाद के सहारे अपनी राजनीतिक रोटी सेकने वाले नेताओं की सच्चाई जानने की जरूरत है 1 जनवरी के बाद में इस हिंसा के भड़कने के पीछे कुछ 20% वोट रखने वाली राजनीतिक पार्टियों के अलावा सभी पश्चिमी मीडिया ग्रुप लगे है और सफल हो रहे है, HUFF POST, Economist और  BBC India जो कि ब्रिटेन की Spy Agency के रूप में भारत मे काम करती है ने प्रमुखता से इस बात को विश्व मे पहुँचाया की दलितों पर भारत मे अत्याचार हो रहे है और ईसाई धर्म उनका हितैषी है।

ऐसे मामलों को समझ कर आधुनिक शिक्षित समाज को प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

LogicalNews.in