30.7.19

उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रमुख सचिव गृह सहित 26 IAS अधिकारियों के तबादले किए

लख़नऊ

प्रदेश सरकार ने मंगलवार देर रात 26 आईएएस व एक पीसीएस अधिकारी का तबादला कर दिया। पिछले तीन महीने से रिक्त कृषि उत्पादन आयुक्त के पद पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार तिवारी की तैनाती की गई है। अपर मुख्य सचिव नियोजन दीपक त्रिवेदी को राजस्व परिषद का नया चेयरमैन बनाया गया है। वह बुधवार को रिटायर हो रहे प्रवीर कुमार का स्थान लेंगे। 

चिकित्सा व स्वास्थ्य के नए प्रमुख सचिव दीपक कुमार
शासन ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटकर लंबे समय से तैनाती की प्रतीक्षा कर रहे दीपक कुमार को प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य बनाया है। मौजूदा प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने अपने स्वास्थ्य के मद्देनजर सरकार से अपेक्षाकृत कम व्यस्तता वाले विभाग में तैनाती का आग्रह किया था। सरकार ने त्रिवेदी को आयुष विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया है।

सरकार केपास फीडबैक था कि श्रमायुक्त अनिल कुमार कानपुर नियमित रुकने की जगह लखनऊ से अधिक आ जा रहे हैं। सरकार ने उन्हें श्रमायुक्त जैसे अहम पद से मुक्त कर होमगार्ड विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया है। प्रमुख सचिव पशुधन सुधीर एम. बोबडे को श्रमायुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। प्रमुख सचिव पशुधन सहित बोबड़े द्वारा देखी जा रही सभी जिम्मेदारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे बाबूलाल मीना को सौंप दी गई है।

सरकार ने आराधना शुक्ला से परिवहन विभाग की जिम्मेदारी ले ली है। वह सपा शासनकाल से ही परिवहन विभाग में तैनात थीं। मुख्य सचिव की प्रमुख स्टाफ ऑफिसर कामिनी चौहान रतन को सचिव ग्राम्य विकास की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अब उन्हें मुख्य सचिव के प्रमुख स्टाफ ऑफिसर के पद पर नियमित तैनाती दे दी गई है। 

उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक योग्य अधिकारियों में से एक नवनीत सहगल जी की वापसी
योगी सरकार आने के बाद से ही कम महत्व वाले विभागों में कार्यरत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल को दी गई नई जिम्मेदारी मुख्य धारा की ओर वापसी का संकेत माना जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में निवेश परियोजनाओं का शिलान्यास करते हुए एक जिला-एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) को प्रदेश का सबसे अधिक महत्व वाला काम बताया था साथ ही सहगल जी की तारीफ भी की थी, सरकार ने इस कार्यक्रम के बाद पहले तबादले में ही सहगल को वर्तमान पद के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग का भी प्रमुख सचिव बना दिया।

इसके अलावा पर्यटन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता से जुड़े विभागों में शामिल है। तमाम हल्के विभागों की जिम्मेदारी देख रहे जितेंद्र कुमार को पर्यटन विभाग के  प्रमुख सचिव के साथ महानिदेशक की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

सचिव मुख्यमंत्री पद पर किसी की नियुक्ति नही।
समाज कल्याण आयुक्त का पद पिछले एक महीने से खाली है। इसके अलावा सचिव मुख्यमंत्री के दो पद हैं। एक सचिव मनीष चौहान को गन्ना आयुक्त के पद पर कई दिन पहले स्थानांतरित किया जा चुका है। इसके अलावा सचिव मृत्युंजय कुमार नारायण की केंद्र में तैनाती हो चुकी है। इसी सप्ताह उनका यहां से कार्यमुक्त होना तय माना जा रहा है। इसके अलावा डीजी प्रशिक्षण व डीजी उपाम के पद बुधवार को रिक्त हो रहे हैं। इन पदों पर किसी की तैनाती नहीं की जा सकी है। कई अन्य पद अभी रिक्त चल रहे हैं।

कानून व्यवस्था पर घिरती सरकार ने डैमेज कंट्रोल में हटाया ग्रह सचिव,
प्रदेश सरकार ने उन्नाव रेप पीड़िता के साथ सड़क दुर्घटना से जुड़ी घटना से हो रहे सियासी नुकसान के डैमेज कंट्रोल की कवायद के बीच प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को हटा दिया है। अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी को गृह, गोपन, बीजा पासपोर्ट, कारागार प्रशासन एवं सुधार तथा सतर्कता विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अवस्थी केपास सूचना विभाग व यूपीडा का प्रभार अतिरिक्त रूप से रहेगा। अरविंद कुमार को प्रमुख सचिव परिवहन बनाया गया है।

लंबे अर्से से प्रमुख सचिव अरविंद व डीजीपी ओपी सिंह के बीच ठीक से समन्वय न होने की बात सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बनी हुई थी। कहा जा रहा था कि सरकार पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह को अधिक तवज्जो दे रही है। शासन स्तर की उच्चस्तरीय बैठकों तक में प्रमुख सचिव की जगह डीजीपी को महत्व दिया जा रहा है। पुलिस महकमे में काफी दिनों से यह दावे किए जा रहे थे कि शासन स्तर पर गृह विभाग में कभी भी बदलाव हो सकता है।
मंगलवार को सरकार ने इन अटकलों को मूर्तरूप दे दिया। अवनीश अवस्थी मुख्यमंत्री के पसंद वाले अफसरों में शामिल हैं। योगी सरकार में शुरू से ही उनके पास सूचना जैसा अहम विभाग और एक्सप्रेस-वे जैसे कार्य से जुड़ी संस्था यूपीडा की जिम्मेदारी बनी हुई है। गृह विभाग की जिम्मेदारी दिए जाने के बावजूद पर्यटन छोड़ उनकेपास पूर्व की सभी जिम्मेदारियां बनाए रखी गई हैं, आशा है कि DGP के साथ अब ग्रह विभाग का समन्वय रह सकेगा।

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14.7.19

चंद्रयान-2 का आज होगा प्रक्षेपण, जानिये भारत के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट के बारे में जिसकी तैयारी हो रही 2008 से

 मुंबई
आज रात रवाना होगा भारत का महत्वाकांक्षी चंद्रयान 2 मिशन, ISRO पूरी तरह भारतीय तकनीक से चंद्र सतह पर सॉफ्ट लैडिंग करवाने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) का चंद्रयान-2 मिशन 15 जुलाई को तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से लॉन्च होगा। इसके 6 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने का अनुमान है। 

ISRO ने इस बारे में LOGICAL NEWS को जो जानकारी दी है आइए उसका विश्लेषण करते है - इससे पहले भी इसरो ने चंद्रयान 1 में चंद्रमा पर मून इंपैक्ट प्रोब (MIP) उतारा था, लेकिन इसे उतारने के लिए नियंत्रित ढंग से चंद्रमा पर क्रैश करवाया गया था। इस बार हम विक्रम (लैंडर) और उसमें मौजूद प्रज्ञान (छह पहिये का रोवर) चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाएंगे।

चंद्रयान 2 की खास बातें-
    चंद्रयान-1 का वजन 1380 किलो था, चंद्रयान-2 का वजन 3877 किलोग्राम रहेगा
    चंद्रयान-2 के 4 हिस्से, पहला- जीएसएलवी मार्क-3, भारत का बाहुबली रॉकेट कहा जाता है, पृथ्वी की कक्षा तक जाएगा
    दूसरा- ऑर्बिटर, जो चंद्रमा की कक्षा में सालभर चक्कर लगाएगा
    तीसरा- लैंडर विक्त्रस्म, जो ऑर्बिटर से अलग होकर चांद की सतह पर उतरेगा
    चौथा- रोवर प्रज्ञान, 6 पहियों वाला यह रोबोट लैंडर से बाहर निकलेगा और 14 दिन चांद की सतह पर चलेगा

कैसे काम करेगा चंद्रयान-2
जियोसिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल मार्क 3 भारत में अब तक बना सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यही चंद्रयान 2 को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाएगा। इसे बाहुबली नाम दिया गया है क्योंकि इसमें चार हजार किलो वजनी उपग्रह व उपकरणों को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता है। इससे दोगुना वजन यह पृथ्वी की निचली कक्षा में 600 किमी ऊंचाई पर ले जा सकता है। 43.43 मीटर ऊंचा यह लॉन्चर चंद्रयान को तीन चरण में अपने क्रायोजेनिक इंजन और दो बूस्टरों की मदद से चंद्रमा तक ले जाएगा।

ऑर्बिटर : एक वर्ष की परिक्रमा
चंद्रमा की कक्षा में ऑर्बिटर एक वर्ष परिक्रमा करेगा। यह 2,379 किलो वजनी है और सूर्य की किरणों से हजार वॉट बिजली पैदा कर सकता है। चंद्रमा पर अपने अध्ययन और विभिन्न उपकरणों द्वारा भेजी गई सूचनाओं को ऑर्बिटर बंगलूरु में मौजूद इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) में भेजेगा।

लैंडर विक्रम :  जिसका एक दिन का काम हमारे 14 के बराबर
लैंडर विक्रम को यह नाम भारतीय खगोल कार्यक्रम के पितामह कहे जाने वाले डॉ. विक्त्रस्म साराभाई पर मिला है। यह पूरे एक चंद्र दिवस काम करेगा, जो हमारे 14 दिन के बराबर हैं। इसमें भी आईडीएसएन से सीधे संपर्क करने की क्षमता है। और ऑर्बिटर और रोवर दोनों को भी सीधे सूचनाएं भेजेगा।

रोवर - प्रज्ञान करेगा चंद्रमा पर 500 मीटर सैर
प्रज्ञान यानी बुद्धिमत्ता, चंद्रयान का चंद्रमा पर उतरने जा रहा यह 27 किलो का रोवर मौके पर ही प्रयोग करेगा। इसमें 500 मीटर तक चलने की क्षमता है। इसके लिए यह सौर ऊर्जा का उपयोग करेगा। 27 किलो का यह रोवर 50 वॉट बिजली पैदा करेगा, जिसका उपयोग चंद्रमा पर मिले तत्वों का एक्सरे और लेजर से विश्लेषण करेगा।
लैंडर चंद्रमा पर भूकंप की जांच करेगा- लैंडर जहां उतरेगा उसी जगह पर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते है या नहीं। वहां तापमान और चंद्रमा का घनत्व कितना है। रोवर चांद के सतह की रासायनिक जांच करेगा।

15 मिनट है सबसे महत्वपूर्ण- इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा है चंद्रमा की सतह पर सफल और सुरक्षित लैंडिंग कराना। चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह से 30 किमी की ऊंचाई से नीचे आएगा। उसे चंद्रमा की सतह पर आने में करीब 15 मिनट लगेंगे।
यह 15 मिनट इसरो के लिए जीवन-मरण का प्रश्न होगा, क्योंकि मिशन की कामयाबी इसी 15 मिनट पर टिकी होगी। लॉन्च के बाद अगले 16 दिनों में चंद्रयान-2 पृथ्वी के चारों तरफ 5 बार कक्षा बदलेगा। इसके बाद 6 सितंबर को चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्र्रुव के पास लैंडिंग होगी।
इसके बाद रोवर को लैंडर से बाहर निकलने 4 घंटे लगेंगे। इसके बाद, रोवर 1 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से करीब 15 से 20 दिनों तक चांद की सतह से डाटा जमा करके लैंडर के जरिए ऑर्बिटर तक पहुंचाता रहेगा। ऑर्बिटर फिर उस डाटा को इसरो को भेजेगा। 

चंद्रयान- 2 मिशन टाइम लाइन,
    18 सितंबर 2008 :  तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चंद्रयान 2 मिशन को सहमति दी, योजना शुरू हुई
    9 जुलाई से 16 जुलाई 2019 के बीच मिशन को लॉन्च करने का निर्णय हुआ
    15 जुलाई सुबह 2.51 बजे की तारीख तय हुई, इसे श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा
    6 सितंबर 2019 : लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतरेंगे
    रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर चलेगा और परीक्षण करेगा
    एक चंद्र दिवस यानी 14 दिन तक यहां वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे
    एक वर्ष तक चंद्रयान 2 चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोग करेगा और डाटा जुटाता रहेगा

क्या हैं राह में मुश्किलें
चंद्रमा की सतह पर उतरना किसी विमान के उतरने जैसा कतई नहीं है। श्रीहरिकोटा से 15 जुलाई को जीएसएलवी-एमके 3 रॉकेट से प्रक्षेपित होने के बाद यान का एक हिस्सा लैंडर विक्रम 6 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। मगर इस दौरान कई तरह की चुनौतियां आएंगी।....

सटीक रास्ते पर ले जाना
लॉन्च के समय धरती से चांद की दूरी करीब 3. 844 लाख किमी होगी। इतने लंबे सफर के लिए सबसे जरूरी सही मार्ग (ट्रैजेक्टरी) का चुनाव करना, क्योंकि सही ट्रैजेक्टरी से चंद्रयान-2 को धरती, चांद और रास्ते में आने वाली अन्य वस्तुओं की ग्रैविटी, सौर विकिरण और चांद के घूमने की गति का कम असर पड़ेगा।

गहरे अंतरिक्ष में संचार
धरती से ज्यादा दूरी होने की वजह से रेडियो सिग्नल देरी से पहुंचेंगे। देरी से जवाब मिलेगा। साथ ही अंतरिक्ष में होने वाली आवाज भी संचार में बाधा पहुचांएंगे।

चांद की कक्षा में पहुंचना
चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में पहुंचाना आसान नहीं होगा। लगातार बदलती कक्षीय गतिविधियों की वजह से चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में पहुंचाने के लिए ज्यादा सटीकता की जरूरत होगी। इसमें काफी ईंधन खर्च होगा। सही कक्षा में पहुंचने पर ही तय जगह पर लैंडिंग हो पाएगी।

चांद की कक्षा में घूमना
चंद्रयान-2 के लिए चांद के चारों तरफ चक्कर लगाना भी आसान नहीं होगा। इसका बड़ा कारण है चांद के चारों तरफ ग्रैविटी एकजैसी नहीं है। इससे चंद्रयान-2 के इलेक्ट्रॉनिक्स पर असर पड़ता है, इसलिए, चांद की ग्रैविटी और वातावरण की भी बारीकी से गणना करनी होगी।

चंद्रमा पर सहज लैंडिंग
चंद्रमा पर चंद्रयान-2 को रोवर और लैंडर की सहज लैंडिंग सबसे बड़ी चुनौती है। चांद की कक्षा से दक्षिणी ध्रुव पर रोवर और लैंडर को आराम से उतारने के लिए प्रोपल्शन सिस्टम और ऑनबोर्ड कंप्यूटर का काम मुख्य होगा। ये सभी काम खुद-ब-खुद होंगे।

चंद्रमा की धूल और बवंडर
चांद की सतह पर ढेरों गड्ढे, पत्थर और धूल है। जैसे ही लैंडर चांद की सतह पर अपना प्रोपल्शन सिस्टम ऑन करेगा, वहां तेजी से धूल उड़ेगी। धूल उड़कर लैंडर के सोलर पैनल पर जमा हो सकती है, इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है। ऑनबोर्ड कंप्यूटर के सेंसरों पर भी असर पड़ सकता है।

बदलता तापमान चांद का एक दिन या रात धरती के 14 दिन के बराबर होती है। इसकी वजह से चांद की सतह पर तापमान तेजी से बदलता है। इससे लैंडर और रोवर के काम में बाधा आएगी।
इसरो चेयरमैन के सिवन ने बताया कि चंद्रयान 2 के बाद भारत 2021 के गगनयान प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह मानव मिशन होगा। इसकी तैयारी के तहत दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में मानवरहित मिशन अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। इसके बाद दिसंबर 2021 में मानव अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। इन अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की प्रक्रिया जारी है।
एक हजार करोड़ का मिशन, बारिश में भी प्रक्षेपण

भगवान वेंकटेश की पूजा में तिरुमाला पहुंचे सिवन ने बताया कि चंद्रयान 2 प्रक्षेपण के लिए तैयार है। इस पर करीब एक हजार करोड़ की लागत आई है। बारिश से मिशन की रवानगी को खतरा नहीं है क्योंकि जीएसएलवी मार्क3 पर बारिश में भी सुरक्षित रहेगा।

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12.7.19

उत्तर प्रदेश में 26 IAS अधिकारियों के तबादले, 9 जिलों के DM बदले


लखनऊ.

UP सरकार ने 12 जुलाई की देर शाम बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया, यूपी के 26 IAS अफसरों के तबादले किए गए हैं, जिसमें अमेठी , महोबा, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर समेत 9 जिलों के जिलाधिकारी भी बदले गए हैं। अमेठी की नए डीेएम अब प्रशांत शर्मा होंगे। डीएम गाजियाबाद ऋतु महेश्वरी को नोएडा की CEO बनाया गया।

पूरी सूची देखे

रितु माहश्वरी - CEO, नोएडा अथॉरिटी
माला श्रीवास्तव- जिलाधिकारी, बस्ती
इंद्र विक्रम सिंह- जिलाधिकारी, शाहजहांपुर
शकुंतला गौतम- जिलाधिकारी, बागपत
अवधेश कुमार तिवारी- जिलाधिकारी, महोबा
प्रशांत शर्मा- जिलाधिकारी, अमेठी
अजय शंकर पाण्डेय- जिलाधिकारी, गाजियाबाद
सेल्वा कुमार जे- जिलाधिकारी, मुजफ्फरनगर
सुखलाल भारती- जिलाधिकारी, एटा
रमाकां पाण्डेय- जिलाधिकारी, बिजनौर
अमृत त्रिपाठी- विशेष सचिव, वित्त विभाग, यूपी शासन
ईश्वरी प्रसाद पाण्डेय - विशेष सचिव, आबकारी विभाग, यूपी शासन
राम मनोहर मिश्र- विशेष सचिव, ग्राम्य विकास विभाग, यूपी शासन
सहदेव- विशेष सचिव, कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा, यूपी शासन
पवन कुमार- विशेष सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, यूपी शासन
सुजीत कुमार - मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपी ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, लखनऊ
जितेंद्र प्रताप सिंह- निदेशक, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, लखनऊ
राज शेखर- प्रबंध निदेशक, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम, लखनऊ
धीरज साहू- एमडी रोडवेज का काम हटा
रमेश कुमार- सचिव, उच्च शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, यूपी शासन
आभा गुप्ता- विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, यूपी शासन
शेषनाथ- प्रबंध निदेशक, यूपी एग्रो, लखनऊ
चन्द्र भूषण- विशोष सचिव, लोक निर्माण विभाग, यूपी शासन
कुणाल सिलकू- मिशन निदेशक, कौशल विकास, मिशन एवं निदेशक, प्रशिक्षण एवं सेवायोजन, यूपी
संतोष कुमार राय - वेटिंग में डाला गया है
आलोक टंडन से नोेएडा सीईओ का काम हटा

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11.7.19

देवशयनी एकादशी आज, भगवान विष्णु जाएंगे योगनिद्रा में शुरू होगा चातुर्मास जाने महत्व

लख़नऊ

देवशयनी एकादशी 12 जुलाई को है,12 जुलाई को एकादशी शुरू होने के बाद आगले 4 महीनों तक किसी तरह के मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे. दिवयशयनी एकादशी के दिन से ही चतुर्मास शुरू हो जाएगा. हिन्दू धर्म के अनुसार इन चार महीनों के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं. 

वैष्णों साधकों में देव शयनी एकादशी का बहुत महत्व है, आपको बता दें कि ब्रह्माण्ड के पालन पोषण का काम करने वाले भगवान श्री हरि विष्णु के सो जाने के बाद इन 4 महीनों में पालन की जिम्मेदारी भी भगवान शिव के पास ही रहती है देवशयनी एकादशी  को अन्य नाम पद्मनाभ एकादशी, आषाढ़ शुक्ल एकादशी और प्रबोधनी एकादशी से भी जाना जाता है

इन चार महीनों में किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों जैसे शादी, मुंडन, जनेऊ, तिलक आदि कार्यों पर रोक लग जाती है. इन चार महीनों में अगर व्यक्ति भगवान की पूजा-पाठ, कथा, साधना करता है तो उसे अलग ही सकारात्मक ऊर्जा का आभास होता है, इस दौरान दोनों शुभ ग्रह शुक्र व बृहस्पति भी प्रमुदित अवस्था में नही रहते है।

हिन्दू ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार इन चार महीनों (इस बार 12 जुलाई से 8 नवंबर तक) में भगवान क्षीर सागर में शेष-शय्या पर शयन करते हैं. भगवान विष्णु इस दौरान योग निद्रा में रहते हैं, जिस वजह से किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों को नहीं किया जाता है. घर में शादी, उपनयन संस्कार,गृह प्रवेश, कर्ण भेदन, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. मांगलिक कार्य नहीं करने का एक कारण और भी है कि इन चार महीनों में गुरु और शुक्र तारा भी अस्त रहता है, जिससे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. देवशयनी एकादशी के बाद 8 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी और 8 नवंबर से फिर से लोग मांगलिक कार्यों को करना शुरू कर सकेंगे.

हालांकि देवशयनी एकादशी शुरू होने से पहले यानी कि 11 जुलाई तक मांगलिक कार्य करने के लिए चार मुहूर्त हैं. घर में शादी के लिए 8, 10 और 11 जुलाई का मुहूर्त शुभ है. लेकिन चार महीने बाद यानी कि 8 नवंबर को देवउठानी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे. इनमें से 19, 20, 21, 22, 23, और 30 नवंबर का मुहूर्त विवाह के लिए शुभ बताया गया है. वहीं दिसंबर महीने में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त 11 दिसंबर है.

क्या है देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है. एकादशी पर विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए.देवशयनी एकादशी से भगवान चार माह के लिए विश्राम करते हैं. इस दौरान चार माह तक मांगलिक और वैवाहिक कार्यक्रमों पर रोक लग जाती है. हालांकि लोग मांगलिक कार्यों की तैयारी और खरीदारी इन दिनों में कर सकते हैं. स्कंद पुराण के एक अध्याय के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को साल भर के सभी एकादशियों का महत्व बताया है.

सूर्यवंशी राजा मान्धाता के राज्य में 3 वर्ष तक वर्षा न होने पर उन्होंने ऋषि अंगिरा के आज्ञानुसार अपने मंत्रियों सहित देवशयनी एकादशी का व्रत किया था जिसके फलस्वरूप उनके राज्य में वर्षा हुई व आकाल समाप्त हुआ था इस एकादशी का महत्त्व पुराणों में विदित है।

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