27.12.18

LogicalNews द्वारा कराए गए साल 2018 के Top 10 जिलाधिकारियों के सर्वे के नतीजे घोषित

लख़नऊ

Logical News द्वारा किये जा रहे साल 2018 के UP के Top 10 जिलाधिकारियों के सर्वे में 5 दिनों तक हमे कुल 92268 वोट हमें प्राप्त हुए है जो कि विभिन्न जिलों व विभिन्न जिलाधिकारियों के समर्थकों द्वारा हमारे पर भेजे गए।

Method of Survey-
सर्वे के लिए logical news ने कोई भी options जनता को नही दिए थे, लोग अपनी इच्छा से जिसको चाहे वोट कर सकते थे हमारे Whatsapp व FB , Twitter पेज पर direct message के रूप में भेजे गए वोटों को सम्मिलित करते हुए हमने सभी वोट को सम्मिलित कर हम अंतिम नतीजे पर पहुचे है।
विभिन्न अधिकारियों को मिले वोट व उनके बारे में लोगों द्वारा व्यक्त किये गए विचार निम्न है, हमारा प्रयास है कि जिलाधिकारी भारत की व्यवस्था में एक अति महत्वपूर्ण स्थान है, DM लोगो के साथ सीधे जुड़ता है व उनके दुःख सुख में शामिल होता है ऐसे में सरकार व तंत्र को भी के जानकारी होनी चाहिए कि किस अधिकारी को लोग कितना सम्मान दे रहे है व जिलाधिकारियों में भी इस सर्वे से अधिक जनता से जुड़ाव का उत्साह पैदा होगा।- 

1. श्री महेन्द्र बहादुर सिंह जी (DM रामपुर);-10927;-
रामपुर के जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर के लिए जिले के अध्यापकों, प्रधानों, क्षात्रों, महिलाओं व पुरुषों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, 27 DEC को रामपुर के लोगो ने इतनी वोटिंग की की हमरा सर्वर जाम हो गया था, साथ ही लोगो ने उनके द्वारा शिक्षा व जनसंवाद में किये गए कामों की तारीफ भी खुलकर की है, साथ ही बाँदा, फतेहपुर व हरदोई के लोगो ने भी वोटिंग की व कई तरह के कमेंट भी भेजे, वोटिंग बंद हो जाने के बाद बहुत से लोग मायूस नजर आए, FB ट्विटर व व्हाट्सएप सभी प्लेटफॉर्म पर DM रामपुर के लिए भारी मात्रा में वोटिंग की गई, LogicalNews की ओर से सभी वोटर्स को बहुत बहूत बधाई।

2. श्रीअखिलेश तिवारी जी (पूर्व DM बाराबंकी)- 9864;-

2018 के पूर्वाध में बाराबंकी के जिलाधिकारी रहे श्री अखिलेश तिवारी जी हमारे सर्वे में सबसे आगे थे परन्तु आखिर दिनों में कुछ वोटों से No1 से पीछे आ गए, जिलाधिकारी के पद पर न रहते हुए भी करीब 10000 वोट्स पाना उनकी लोकप्रियता को सिद्ध करता है, जिन नेताओ ने बाराबंकी में उनके कार्यकाल पर आरोप लगाए थे उनकी बातों को जनता ने नही माना, अखिलेश जी के लिए बाराबंकी, लखनऊ, गोरखपुर, बस्ती देवरिया से वोटिंग हुई, महिलाओं व क्षात्रों ने दिए वोट्स, साथ ही उनके सरल स्वभाव व जनता की समस्याओं को सुलझाने की प्रवृत्ति की तारीफ की, ऐसे लोकप्रिय अधिकारी को जनता के बीच रखना चाहिए सरकार को, logical न्यूज़3 की ओर से बहुत बधाई


3. श्री अटल कुमार राय जी (DM बिजनौर);-8675;-
साल 2016 की तरह ही इसबार भी बिजनौर जिले के लोगों ने Logicalnews के बेस्ट DM सर्वे में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया सेटल कुमार राय के विषय में लोगों ने उनकी तारीफों में सभी तरह के कमेंट भेजे हैं हमारे व्हाट्सएप टि्वटर फेसबुक सभी स्थानों पर अटल कुमार राय को विजेता बनाने के लिए वोटिंग की गई , डीएम बिजनौर संभवत इस सर्वे के पुनः विजेता होते लेकिन क्योंकि बिजनौर के लोगों ने थोड़ी देर में वोटिंग शुरू की इसलिए ऐसा नहीं हो सका, श्री अटल कुमार राय विषय में लोगों ने लिखा कि वो जनता की समस्याओं को सुलझाने में माहिर है, लिखा है कि अगर किसी मामले में न्याय चाइये तो DM साहब ही आखिरी रास्ता है।

4. श्री मन्नान अख्तर जी (DM जालौन);- 8210;-
जालौन logicalnews के बहुत कम पाठक थे फिर भी ये सर्वे की जानकारी होते ही लोग अपने जिले के नए व ऊर्जावान जिलाधिकारी मन्नान अख्तर जी को वोट देने में लग गए हम औकात मन्नान अख्तर इस सर्वे में नंबर एक पर हो सकते थे परंतु लेट शुरू करने के कारण ऐसा नहीं हो सका, बुंदेलखंड के जिलों में जहां पर जिला अधिकारी एवं अन्य सरकारी अधिकारियों के द्वारा जनता के हित में कोई भी योजनाएं शुरू ना किए जाने के मामले बार-बार आते हैं ऐसे में मन्नान अख़्तरर जी के बारे में लोगों ने बहुत अच्छे कमेंट किये है, पेयजल,  स्वच्छता व आवारा पशुओं के रखरखाव के विषय में मन्नान अख्तर जी के द्वारा किए गए कामों की चतुर्दिक तारीफ हुई, सभी धर्म व वर्ग के लोगो द्बार किये गए वोट, जालौन, बाँदा, लख़नऊ, प्रयागराज से वोटिंग।

5. श्री शिव सहाय अवस्थी (DM झांसी);- 7734; 

झांसी जिले में लॉजिकल न्यूज़ के पहले से ही अधिक मात्रा में पाठक है, जिन्होंने इस सर्वे में बढ चढ़ कर हिस्सा लिया है, शिव सहाय अवस्थी जी के लिए तीसरे दिन से वोट्स मिलने शुरू हुए है ऐसे में उनका पांचवें नंबर पर पहुंचना वह लगभग 8000 वोट प्राप्त करना भी कमाल है यह उनकी जिले में लोकप्रियता को दिखाता है शिव सहाय अवस्थी जी के लिए झांसी सीतापुर व हरदोई से वोटिंग।

6. श्री कौशल राज शर्मा जी (DM लख़नऊ);- 7612;- 
DM लख़नऊ कौशल राज शर्मा जी 2016 के हमारे सर पर में भी टॉप टेन में रहे थे, चौथे वह पांचवें दिन में लखनऊ जिलाधिकारी के लिए सर्वाधिक मात्रा में वोटिंग हुई श्री कौशल जी के विषय में लोगों की राय एक परिपक्व अधिकारी की है, उनके लिए लखनऊ कानपुर इलाहाबाद वाराणसी से अच्छी मात्रा में वोटिंग आखिरी 2 दिनों में हुई, लख़नऊ में जनप्रिय है DM कौशल राज, सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों व स्टूडेंट्स ने किए वोट।
7. श्री सुहास LY(DM प्रयागराज);- 4186;- जज्बे का दूसरा नाम है सुहास इक पैर  खराब होकर भी दुनिया की सभी कठिनाइयों को जितने वाले सुहास की प्रशसनिक क्षमता का लोहा मानता है LogicalNews, लोगो का कहना है की DM साहब के संज्ञान में आए मामले का निराकरण होगा जरूर, आगामी कुम्भ के आयोजन हेतु सरकार की पसंद तभी है सुहास जी, 

8. योगेश्वर राम मिश्रा जी (पूर्व DM वाराणसी) - 4082;-
 सर्वसुलभ व जनप्रिय अधिकारी श्री योगेश्वर राम जी निःसंदेह उत्तर प्रदेश के सबसे लोकप्रिय DM हैं, बाराबंकी वाराणसी फैजाबाद जैसे उत्तर प्रदेश की कई जिलों में DM रहे है, आज तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले अधिकारी हैं जो अभी तक लोगो के दिलो पर राज कर रहे है, उनकी क्रियाप्रणाली की तारीफ उन सभी जिलों के लोग दिल खोलकर करते हैं जहां वह अब तक काम कर चुके हैं उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के सबसे लोकप्रिय अधिकारी है योगेश्वर जी। 

9. अमृत त्रिपाठी जी (DM शाहजहांपुर);-2518;-
 अमृत त्रिपाठी जी की प्रशासनिक क्षमता का कोई सानी नहीं है, हमारे सर्वे में  प्रतापगढ़ सीतापुर से शाहजहांपुर के लोगों ने उनकी प्रशासनिक क्षमता को बार-बार तारीफ की शाहजहांपुर के सरकारी कर्मचारियों छात्रों व व्यापारियों द्वारा श्री त्रिपाठी जी के बारे में वोटिंग की गई एवं उनके द्वारा मामलों में त्वरित कार्यवाही की तारीफ की गई, 2016 से इस साल उनको मिले वोटों की संख्या कम हो गई है।

10. श्रीमती रितू माहेश्वरी जी (DM गाजियाबाद);-1802;-
 ऐसा माना जाता है कि गाजियाबाद नोएडा जैसी बड़े जिलों की जनता सामान्य रूप से अपने जिलाधिकारियों से ना तो परिचित होती है और ना ही उनके साथ इंटरेक्शन करने में कोई चाहत रखती है, पर इसमें को तोड़ने में कामयाब रही है तुम्हें सॉरी जी गाजियाबाद नोएडा दिल्ली सहित कई जिलों के लोगों ने उनके पक्ष में वोट किया है सबसे ज्यादा वोटिंग गाजियाबाद से हुई जो इसमें तक को तोड़ता है कि बड़े जिलों के बड़े नगरों के लोग DM के बारे में जानकारी नहीं रखते, गाजियाबाद के विकास के लिए रितु माहेश्वरी जी के द्वारा किये गए प्रयास काबिले तारीफ़ है।

Logicalnews की ओर से सभी Top10 जिलाधिकारियों को बहुत बहुत बधाई व 2019 की शुभकामनाएं


LogicalNews.in

21.12.18

जनता को लूट रही है सरकारी व प्राइवेट बैंकें ,3.5 साल में मिनिमम बैलेंस के नाम पर सरकारी बैंकों ने उड़ाए 10000 करोड़ रुपए।


सरकारी बैंकों ने केवल पिछले साढ़े 3 साल में 10 हजार करोड़ रुपये की रकम जनता से बटोर ली है। यह रकम सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस न रखने और एटीएम विद्ड्रॉल पर लगने वाले चार्ज के जरिए एकत्रित की गई है। सरकार ने यह सूचना संसद में दिए गए डेटा में बताई है।

संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया है कि साल 2012 तक मंथली एवरेज बैलेंस पर एसबीआई चार्ज वसूल कर रहा था, लेकिन 31 मार्च 2016 से यह बंद कर दिया गया। हालांकि प्राइवेट बैंकों सहित अन्य बैंक अपने बोर्ड के नियमों के अनुसार यह चार्ज वसूल कर रहे हैं। एसबीआई ने 1 अप्रैल 2017 से यह अतिरिक्त चार्ज वसूल करना शुरू कर दिया। हालांकि 1 अक्टूबर 2017 से मिनिमम बैलेंस में रखी जाने वाली रकम को कम कर दिया गया। 

वित्त मंत्रालय ने बताया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को उनके बोर्ड के मुताबिक विभिन्न सेवाओं पर चार्ज करने की अनुमति प्रदान कर रखी है। हालांकि बैंको को निर्देश दिए गए हैं कि उनके चार्ज उचित होने चाहिए। रिजर्व बैंक ने यह भी निर्देश दिए हैं 6 मेट्रो शहरों मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक महीने में अन्य बैंकों के एटीम से 3 ट्रांजैक्शन और बैंक के एटीएम से कम से कम 5 ट्रांजैक्शन फ्री रखे जाएं। 

मंत्रालय ने बताया है कि फ्री ट्रांजैक्शन के बाद बैंक अपने बोर्ड से अप्रूव किए गए नियमों के मुताबिक प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 20 रुपये की रकम वसूल कर सकते हैं। जवाब में यह भी बताया गया है कि सरकारी बैंकों का अपने एटीएम बंद करने का कोई प्लान नहीं है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ऐसी चर्चाओं ने जोर पकड़ा था कि मार्च 2019 तक सरकारी बैंकों के 50 प्रतिशत एटीएम बंद कर दिए जाएंगे।

15.12.18

राफेल डीलः केंद्र सरकार ने कैग रिपोर्ट और पीएसी के रेफरेंस वाले पैरा में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी

दिल्ली

सरकार ने राफेल पर फैसले में टाइपिंग की त्रुटियों को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। फैसले में राफेल डील पर सीएजी रिपोर्ट तैयार होने और उसे संसद की लोकलेखा समिति (पीएसी) के समक्ष रखे जाने का जिक्र है। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलतबयानी का आरोप लगाते हुए फैसले पर सवाल उठाया है। वैसे यह भी तय है कि सीएजी और पीएसी का जिक्र हटा भी दें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई असर नहींपपड़ने वाला।

सरकार ने हलफनामे में बताया है कि राफेल की कीमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दी गई सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट की लाइनों को समझने में गड़बड़ी के कारण सीएजी और पीएसी का विवाद खड़ा हुआ। सरकार के अनुसार सीलबंद लिफाफे में अदालत को बताया गया था कि राफेल की कीमत की पूरी जानकारी सीएजी को दे दी गई है और सामान्य प्रक्रिया के तहत सीएजी अपनी रिपोर्ट पीएसी को सौंपेगा, जहां उसकी पड़ताल की जाएगी।

बाद में पीएसी की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाएगा, जिसमें कीमत से संबंधित कुछ बातें सार्वजनिक भी होंगी। लेकिन फैसले को पढ़ने से यह लगता है कि सीएजी की रिपोर्ट पीएसी को सौंपी जा चुकी है और पीएसी ने उसे संसद के पटल पर रख भी दिया है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभी तक सीएजी ने अपनी रिपोर्ट ही तैयार नहीं की।

सरकार ने अदालत से कहा है कि अपने फैसले के पैरा 25 की दो पंक्तियों के लिखने में हुई त्रुटियों को दूर करे। ताकि राफेल पर किसी तरह की विवाद की गुंजाइश नहीं रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में टाइपिंग की गलतियों और किसी अन्य तरह की त्रुटि को दूर करने का कानूनी प्रावधान है। यदि अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया जाए, तो वह फैसले में संशोधन कर सकती है। सरकार ने इसी प्रावधान के तहत सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है।
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वहीं उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि फैसले से पैरा 25 को हटा दिया जाए यानी सीएजी और पीएसी का जिक्र नहीं भी किया जाए, तो मूल फैसले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फैसला राफेल डील से सभी आयामों का विस्तार से विश्लेषण के आधार पर दिया गया है।