22.12.17

सलमान खान ने किया दलितों का अपमान , वाल्मीकि समाज ने FIR दर्ज करने की मांग

जयपुर/ दिल्ली/आगरा

*सलमान खान ने किया दलितों का अपमान, वाल्मीकि समाज ने FIR दर्ज करने की मांग की*

फ़िल्म स्टार सलमान खान ने टाइगर जिंदा है के प्रमोशन के।दौरान सलमान खान ने दलितों को जातिसूचक शब्दो का प्रयोग कर अपमानित किया है, वाल्मीकि एक्शन कमेटी ने दक्षिण दिल्ली में सलमान व शिल्पा शेट्टी पर FIR की मांग की

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आज प्रोड्यूस होने के बाद जयपुर के राजमंदिर थियेटर में सलमान खान मुर्दाबाद के नारे लगा कर दलितों ने किया प्रदर्शन कहा फ़िल्म का प्रदर्शन किया जाय बंद,


गौरतलब हैं की सलमान ने *नट- भंगी* जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अपने फ़िल्म के दौरान दलितों पर जातिसूचक टिप्पणी कीथी, शिल्पा शेट्टी ने भी DANCE INDIA के दौरान जातिसूचक शब्द का किया प्रयोग दोनों पर SC-ST के तहत दर्ज हो सकता है मुकदमा।



मजे की बात रही कि हर मीडिया चैनल ने दबा रखी है ये खबर, सोशल मीडिया में वाइरल हुआ सलमान का नट- भंगी चमार कहने वाला वीडियो, मामला बढ़ने पर बुरे फस सकते है सलमान खान।


*LogicalNews*

13.12.17

नई वैज्ञानिक रिसर्च में हुआ सिद्ध- रामसेतु मानव निर्मित है और 7000 वर्ष पुराना है


लख़नऊ

अमेरिका में साइंस चैनल के पर एक शो ने एक बार फिर से पौराणिक ग्रंथ में जिस रामायण में जिस रामसेतु का जिक्र है उसे चर्चा के केन्द्र में लाकर रख दिया। इसमें यह दावा किया गया है कि यह ढांचा वास्तव में  मानव निर्मित है ना कि प्राकृतिक। चैनल की तरफ से जारी किए गए प्रोमो में यह बताया गया है कि दुनिया जिसे एडम्स ब्रिज के नाम से जानती है वह मानव निर्मित है।
देखिये वीडियो-

“हिन्दू के पौराणिक ग्रंथों में जिस पुल का जिक्र है और जो भारत-श्रीलंका को जोड़ता है क्या वह सच है? भू-वैज्ञानिकों का विश्लेषण तो कुछ ऐसा ही बताता है।” एनसिएंट लैंड ब्रिज नाम के एक प्रोमो में ऐसा दावा किया गया है। ये डॉक्यूमेंट्री आज शाम साढ़े सात बजे डिस्कवरी कम्युनिशेन के साइंस चैनल पर अमेरिका में दिखाया जाएगा।

इसमें अमेरिकन भू-वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत में रामेश्वरम के नजदीक पामबन द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक लंबी बनी पत्थरों की यह श्रृंखला मानव निर्मित है। इस प्रोमो को करीब ग्यारह लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं जिसे साइंस चैनल ने करीब 17 घंटे पर अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। भू-वैज्ञानिक एरिन अर्गेईलियान ने इसका विश्लेषण करते हुए कहा है कि तस्वीर में दिख रहा पत्थर ‘सैंडबार’(बालू) पर है जो आसपास से पानी के साथ बहकर आया है। जबकि, डॉक्टर एलन लेस्टर का ऐसा मानना है कि यहां पर सैंड पहले से मौजूद था जबकि उसके ऊपर पत्थर बाद में लाकर रखा गया है।

भारत के दक्षिण-पूर्वी तट के किनारे तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर से बनी एक श्रृंखला आज भी एक रहस्य बना हुआ है। हिन्दू पौराणिक कथाओं में इसे रामसेतु पुल बताया गया है। साइंस चैनल ने व्हाट ‘ऑन अर्थ एनसिएंट लैंड एंड ब्रिज’ नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है। जिसमें भू-वैज्ञानिकों की तरफ से यह विश्लेषण इस ढांचे के बारे में किया गया है।

आइये बताते है इस पुल को लेकर अमेरिकी भू-वैज्ञानिकों ने क्या निष्कर्ष निकाला है और उनका क्या दावा है-

1-    भू-वैज्ञानिकों ने नासा की तरफ से ली गई तस्वीर को प्राकृतिक बताया है।

2-    वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण में यह पाया कि 30 मील लंबी यह श्रृंखला चेन मानव निर्मित है।

3-    अपने विश्लेषण में भू-वैज्ञानिकों को यह पता चला कि जिस सैंड पर यह पत्थर रखा हुआ है ये कहीं दूर जगह से यहां पर लाया गया है।

4-    उनके मुताबिक, यहां पर लाया गए पत्थर करीब 7 हजार साल पुराना है।

5-    जबकि, जिस सैंड के ऊपर यह पत्थर रखा गया है वह मजह सिर्फ चार हजार साल पुराना है।

6-    हालांकि, कुछ जानकार इसे पांच हजार साल पुराना मानते हैं जिस दौरान रामायण में इसे बनाने की बातें कही गई है।

जाहिर है, वैज्ञानिकों के विश्लेषण के बाद पत्थर के बारे में रहस्य और गहरा गया है कि आखिर ये पत्थर यहां पर कैसे पहुंचा और कौन लेकर आया है।

रामसेतु पुल के बारे में क्या है मान्यताएं

दरअसल, वाल्मीकि रामायण में यह कहा या है कि जब राम ने सीता को लंका के राजा रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए लंका द्वीप पर चढ़ाई की, तो उस वक्त उन्होंने सभी देवताओं का आह्वान किया और युद्ध में विजय के लिए आशीर्वाद मांगा था। इनमें समुद्र के देवता वरुण भी थे। वरुण से उन्होंने समुद्र पार जाने के लिए रास्ता मांगा था। जब वरुण ने उनकी प्रार्थना नहीं सुनी तो उन्होंने समुद्र को सुखाने के लिए धनुष उठाया।

डरे हुए समुद्र ने क्षमायाचना करते हुए उन्हें बताया कि श्रीराम की सेना में मौजूद नल-नील नाम के वानर जिस पत्थर पर उनका नाम लिखकर समुद्र में डाल देंगे, वह तैर जाएगा और इस तरह श्री राम की सेना समुद्र पर पुल बनाकर उसे पार कर सकेगी। यही हुआ भी। इसके बाद राम की सेना ने लंका के रास्ते में पुल बनाया और लंका पर हमला कर विजय हासिल की।

इस दावे के बाद बड़ी बहस शुरू हो गई है कि पुराणों में वर्णित तथ्यों को पश्चिमी जगत ने जिस प्रकार myth या कल्पना कह कर जिस तरह खारिज किया है वो पूरी तरह गलत है ।

LogicalNews

8.12.17

स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए कानून का मसौदा तैयार

लख़नऊ

स्कूलों की मनमानी होगी ख़त्म, फीस के नाम पर नहीं होगी लूट

यूपी वित्त पोषित स्वतंत्र (शुल्क का विनिमय) विधेयक 2017 का प्रस्तावित मसौदा तैयार हुआ है. इस मसौदे पर अभी 22 दिसंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं. 

अगले शैक्षिक सत्र से इसे लागू किया जाएगा. मंडलायुक्त को अध्यक्षता में एक कमेटी शुल्क के विवादों की सुनवाई करेगी. उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इसकी जानकारी दी. भविष्य में स्कूल से जुड़े मामलों के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. ये प्रस्ताव सभी बोर्ड के स्कूलों के लिए हैं.       
  
जानिए कुछ खास बातें-


हर साल में एडमिशन फीस नहीं ली जायेगी:

इसमें कहा गया है कि एडमिशन कक्षा 5 तक एक ही होगा । कक्षा 6 से 8वीं तक एक ही होगा.9 और 10वीं तक एक ही होगा.

जबर्दस्ती की फीस होगी खत्म-

आवागमन में बिना सुविधा लिए फीस नही देना होगा.जितने भी ऐच्छिक शुल्क है , वह बिना सुविधा लिए नही देना होगा. डेवलोपमेन्ट काम के लिए जो फीस ली जायेगी उससे उनका काम भी दिखाना होगा । स्कूल में जो दुकान ,या व्यापारिक गतिविधि ट्रस्ट के नाम् पर चलते थे, उसकी आय को विद्यालय की आय में ही शामिल होगी और उसी हिसाब से छात्रों की फीस कम करनी होगी.                  
                    
विद्यालय के खर्चों का देना होगा हिसाब-

टीचर के भत्ते में वृद्धि कर सकते है लेकि बीच सत्र में फीस नही बढ़ा सकते.स्कूल को अपने आय व्यय , शुल्क, आदि अपने आने वाले सत्र के लिए 31 से पहले ही हर साल वेबसाइट पर अपलोड करना होगा.
डेवलपमेन्ट का फंड सिर्फ विद्यालय की पूरी आय की 15 प्रतिशत ही हो सकती है.फीस , सालाना की अनिवार्यता नहीं होगी, चाहे मासिक , तिमाही या छमाही या सालाना, स्वच्छिक होगा.

फीस बढ़ाने की सूचना देनी होगी वेबसाइट पर-

किसी भी शुल्क वृध्दि या आय व्यय, का व्योरा शैक्षिक सत्र के 60 दिन पहले वेबसाइट में देना होगा.मंडलीय आयुक्त को अधिकार होगा जो किसी तरह के सत्र के दौरान किसी तरह के परिवाद को सुनेंगे.एक समिति बनाना होगा और आयुक्त समेत समिति निर्णय लेगी, और जरूरत पड़ने पर जुरमाना लगा सकेगी.20 हज़ार से ज्यादा शुल्क लेने वाले स्कूल इस प्रस्तावित कानून के दायरे में आएंगे.

लुटेरे स्कूलों पर स्कूलों पर लगेगा भारी जुर्माना:

जो स्कूल उल्लंघन करेंगे उन पर 1 लाख का जुर्माना पहली शिकायत पर होगा.दूसरी शिकायत साबित होने पर 5 लाख का जुर्माना देना होगा.एडमिशन फीस बार बार नही ले सकते स्कूल.पांचवीं तक, फिर क्लास 6 में एडमिशन फीस ले सकते हैं और फिर क्लास 9 में एडमिशन फीस ले सकते हैं.

फीस सालाना लेना अनिवार्यता नही होगी.स्कूलों में व्यावसायिक एक्टिविटी से आय को स्कूल के आय में जोड़ा जाएगा और फिर बच्चों की फीस तय होगी.

LogicalNews
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