24.7.18

भर्ष्टाचार निरोधक कानून संसद में पास, घूस लेना व देना दोनों अपराध

नई दिल्ली:

 भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन पर आज संसद ने मुहर लगा दी. पिछले हफ़्ते राज्य सभा से पारित होने के बाद आज इसे लोकसभा ने भी पारित कर दिया. अब राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद जल्द ही नया कानून अमल में आ जाएगा. लंबे समय से अटके इस बिल में घूस लेने के साथ साथ घूस देने को भी अपराध बनाया गया है.

क्या है प्रमुख बिंदु
रिश्वत को लेकर नए कानून में कई प्रावधान किए गए हैं. मसलन केवल रिश्वत लेना ही अपराध नहीं बनाया गया है बल्कि रिश्वत लेने की अपेक्षा रखना या आग्रह करना भी अपराध की श्रेणी में ही रखा गया है. रिश्वत लेने के अपराध में सज़ा का प्रावधान कम से कम 6 महीने कैद से बढ़ाकर 3 साल कैद और अधिकतम 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कैद कर दिया गया है.

जल्द होगा निपटारा
इसी तरह पहली बार रिश्वत देने या उसकी पेशकश करने को भी अपराध बना दिया गया है. इसके लिए भी न्यूनतम सज़ा 3 साल की कैद और अधिकतम सज़ा 5 साल तक कि क़ैद निर्धारित की गई है. नए कानून की एक अहम बात ये है कि इसमें पहली बार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को निपटाने की समय सीमा निर्धारित की गई है. अप्रत्याशित मामलों को छोड़कर 2 साल के भीतर ऐसे मामलों का निपटारा करना अनिवार्य होगा. इसी तरह सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ जांच की अनुमति भी 3 महीने के भीतर देना अनिवार्य बनाया गया है.

सरकारी अधिकारियों को मिली काम करने की छूट
हालांकि नए कानून में सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए बड़ी राहत दी गई है. अब ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी जांच के पहले जांच एजेंसियों को सरकार से इजाज़त लेनी होगी. कई सालों से इस बात की मांग हो रही थी कि किसी अधिकारी द्वारा लिया गया फ़ैसला ग़लत तो साबित होता है लेकिन उसकी नियत ख़राब नहीं है तो उसे परेशान नहीं किया जाए. इसी के मद्देनजर नए कानून में इस बात का प्रावधान किया गया है.

Mob Lynching ( भीड़ द्वारा पिटाई) पर हंगामा खूब पर खुद में सुधार कोई नहीं

Article By - Naseema Khan 
(Special correspondence LogicalNews Mumbai)
मॉब लॉन्चिंग पर हंगामा क्यों, खुद में सुधार क्यों नही

आजकल मीडिया ,संसद व सेकुलर नेताओ में मॉब लॉन्चिंग या भीड़ द्वारा पिटाई के मामले बहुत छाए हुए है, दादरी कांड हो या बंगलोर या अलवर सभी मे मुस्लिम युवकों को भीड़ ने पीटकर मार डाला था इन सभी मामलों को लेकर संसद में काफी हंगामा हुआ व मोदी सरकार को ग्रह सचिव की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनानी पड़ी,

इन सभी मामलों में कुछ बातें साफ है कि लोगो मे गुस्सा है और गुस्सा एक वर्ग के खिलाफ ही है, ऐसा क्यों है व समाज मे ऐसा क्या हुआ जिसके कारण कोई कह रहा कि गाय को जीने का अधिकार है मुसलमान को नही तो कोई भारत को हिन्दू पाकिस्तान व हिन्दू तालिबान तक कहने से नही चूक रहा।

LogicalNews ने इस विषय मे पड़ताल की तो कुछ बड़े तथ्य सामने आए जिनसे इस स्थिति को समझ सकते है व आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है, आखिर भारत का बहुसंख्यक जनमानस अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो से इतना नफरत में क्यों है मील तथ्यों के अनुसार इसकी जड़ पुरानी सरकारों की नीतियां है।

क्यों बढ़ी आपसी नफरत-
समाज में लोगों को ऐसा लगता है कि अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों ने बहुसंख्यकों की हितों व साधनों पर कब्जा किया है व उनको डराने का प्रयास किया है सोशल मीडिया व मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद चलाए जाने व लड़कियों/महिलाओं का धर्मपरिवर्तन कर शादी करने की बातें घर घर पहुँची जिनसे आम हिन्दू-जैन-बौद्ध- सिक्ख समाज मुसलमानों के प्रति आंदोलित हुआ जिसका नतीजा सामने है इस स्थिति के लिए किसी पार्टी को जिम्मेदार ठहराना उचित नही।

पुरानी सरकारों की योजनाएं व उनका स्वरूप भी वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार है
पिछली सरकारों ने जातिवाद व धर्मवाद में समाज को वोट के लिए तोड़ा व चाहे वह फ़िल्म हो या कला या राजनीति बहुसंख्यकों को ऐसा अहसाह होने लगा कि हम दोयम दर्जे के नागरिक है हर नेता अपने साथ मुस्लिम दाढ़ी वालो को रखता था पर कोई भी तिलक लगवाने वाले या पगड़ी वाले को साथ रखने को तैयार नही था जिसके फलस्वरूप हिंदु-सिक्ख-जैन-बौद्ध संगठित होने शुरू हुए व राजनीति जाती से उठकर मुस्लिम VS गैर मुस्लिम हो गई, झूठा सेकुलरिज्म अब लोग बर्दाश्त नहीं करना चाहते।

कमजोर न्याय व्यवस्था
देश की न्याय, क़ानून व पुलिस व्यवस्था इतनी लचर है कि लोगों को ये भरोसा जरूर है कि अगर तुरंत निर्णय नहीं लिया तो अपराधी बच जाएंगे भर्ष्टाचार इस सोच को और पक्का कर रहा है इन स्थितियों के लिए कल की मोदी सरकार नही बल्कि भारत की पुरानी राजनीतिक जड़े जिम्मेदार है, 

चाहे गोहत्या हो या लव जिहाद के मामले रहे हो या बड़े माफियाओं के मामले रहे हो पैसा देकर India में सबकुछ खरीदा जा सकता है इस सोच ने देश मे फैसला तुरत लेने की आदत डाल दी है जो मॉब लॉन्चिंग के लिए जिम्मेदार है ऐसा 
करोडों बार हुआ है कि लोगों ने गोहत्यारों को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया पर वो थाने से छूट गए या कोर्ट से छूट गएजनता को छूने वाले इमोशनल मामलो में सख्त कानून होने चाहिए, भारत मे 3 विवाह के कानून है हिन्दू मैरिज एक्ट1955, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 व मुस्लिम पर्सनल लॉ( शरीयत ) 1935 इसी का सहारा लेकर लव जिहाद का धंधा चलता है 

ऐसे में आखिर क्यों मुसलमान धार्मिक गुरु सामने आकर नही कहते की गौहत्या व लव जिहाद बंद करो क्यों नही कहते कि हम समान नागरिक संघीता चाहते है जब आप ने अपने को खुद ही बहुसंख्यक समाज से अलग कर रखा है तो राजनेता संसद में बोलकर वोट तो ले सकते है पर आपसी भाईचारा नही पैदा कर सकते, बढ़े संचार माध्यमों ने इन चीजों को और भयावह बना दिया है।

LogicalNews

21.7.18

28वी GST काउंसिल की बैठक में कई वस्तुओं से हटाया गया GST सस्ती होंगी ये चीजें

दिल्ली
मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की बैठक के बाद कई वस्तुओ पर GST की दर शून्य की गई  इन चीजों के दाम काफी कम हों जाएंगे

*GST के दायरे से बाहर होने वाली चीजें*

-सैनिटरी पैड्स

-राखियां (बहुमूल्यों रत्नों से न बनी हो)

-संगमरमर से बनी मूर्तियां

-झाड़ू बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल

-साल के पत्ते

नीचे दी गई  वस्तुओं के GST दर घटाई गई है इनके दाम में भी कमी आएगी -

*GST 12% से घटाकर 5%*-

-हैंडलूम दरी

-फास्फोरिक एसिड युक्त उर्वरक

-बुनी हुई टोपियां (1000 रुपये से कम कीमत की)


*GST 28% से घटाकर 18%*

-लिथियम आयन बैटरी

-वैक्यूम क्लीनर

-फूड ग्राइंडर, मिक्सर

-शेवर्स, हेयर क्लिपर्स

-हैंड ड्रायर्स

-वाटर कूलर्स

-आइसक्रीम फ्रीज़र

-रेफ्रिज़रेटर

-कॉस्मेटिक्स

-परफ्यूम और सेंट

-पेंट और वार्निश

इसके अलावा तेल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीज़ल में मिलाने के लिए दिया जाने वाले इथेनॉल (Ethenol) पर GST की दर 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है.


LogicalNews