Article By - Naseema Khan
(Special correspondence LogicalNews Mumbai)
मॉब लॉन्चिंग पर हंगामा क्यों, खुद में सुधार क्यों नही
आजकल मीडिया ,संसद व सेकुलर नेताओ में मॉब लॉन्चिंग या भीड़ द्वारा पिटाई के मामले बहुत छाए हुए है, दादरी कांड हो या बंगलोर या अलवर सभी मे मुस्लिम युवकों को भीड़ ने पीटकर मार डाला था इन सभी मामलों को लेकर संसद में काफी हंगामा हुआ व मोदी सरकार को ग्रह सचिव की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनानी पड़ी,
इन सभी मामलों में कुछ बातें साफ है कि लोगो मे गुस्सा है और गुस्सा एक वर्ग के खिलाफ ही है, ऐसा क्यों है व समाज मे ऐसा क्या हुआ जिसके कारण कोई कह रहा कि गाय को जीने का अधिकार है मुसलमान को नही तो कोई भारत को हिन्दू पाकिस्तान व हिन्दू तालिबान तक कहने से नही चूक रहा।
LogicalNews ने इस विषय मे पड़ताल की तो कुछ बड़े तथ्य सामने आए जिनसे इस स्थिति को समझ सकते है व आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है, आखिर भारत का बहुसंख्यक जनमानस अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो से इतना नफरत में क्यों है मील तथ्यों के अनुसार इसकी जड़ पुरानी सरकारों की नीतियां है।
क्यों बढ़ी आपसी नफरत-
समाज में लोगों को ऐसा लगता है कि अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों ने बहुसंख्यकों की हितों व साधनों पर कब्जा किया है व उनको डराने का प्रयास किया है सोशल मीडिया व मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद चलाए जाने व लड़कियों/महिलाओं का धर्मपरिवर्तन कर शादी करने की बातें घर घर पहुँची जिनसे आम हिन्दू-जैन-बौद्ध- सिक्ख समाज मुसलमानों के प्रति आंदोलित हुआ जिसका नतीजा सामने है इस स्थिति के लिए किसी पार्टी को जिम्मेदार ठहराना उचित नही।
समाज में लोगों को ऐसा लगता है कि अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों ने बहुसंख्यकों की हितों व साधनों पर कब्जा किया है व उनको डराने का प्रयास किया है सोशल मीडिया व मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद मुसलमानों द्वारा हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद चलाए जाने व लड़कियों/महिलाओं का धर्मपरिवर्तन कर शादी करने की बातें घर घर पहुँची जिनसे आम हिन्दू-जैन-बौद्ध- सिक्ख समाज मुसलमानों के प्रति आंदोलित हुआ जिसका नतीजा सामने है इस स्थिति के लिए किसी पार्टी को जिम्मेदार ठहराना उचित नही।
पुरानी सरकारों की योजनाएं व उनका स्वरूप भी वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार है
पिछली सरकारों ने जातिवाद व धर्मवाद में समाज को वोट के लिए तोड़ा व चाहे वह फ़िल्म हो या कला या राजनीति बहुसंख्यकों को ऐसा अहसाह होने लगा कि हम दोयम दर्जे के नागरिक है हर नेता अपने साथ मुस्लिम दाढ़ी वालो को रखता था पर कोई भी तिलक लगवाने वाले या पगड़ी वाले को साथ रखने को तैयार नही था जिसके फलस्वरूप हिंदु-सिक्ख-जैन-बौद्ध संगठित होने शुरू हुए व राजनीति जाती से उठकर मुस्लिम VS गैर मुस्लिम हो गई, झूठा सेकुलरिज्म अब लोग बर्दाश्त नहीं करना चाहते।
पिछली सरकारों ने जातिवाद व धर्मवाद में समाज को वोट के लिए तोड़ा व चाहे वह फ़िल्म हो या कला या राजनीति बहुसंख्यकों को ऐसा अहसाह होने लगा कि हम दोयम दर्जे के नागरिक है हर नेता अपने साथ मुस्लिम दाढ़ी वालो को रखता था पर कोई भी तिलक लगवाने वाले या पगड़ी वाले को साथ रखने को तैयार नही था जिसके फलस्वरूप हिंदु-सिक्ख-जैन-बौद्ध संगठित होने शुरू हुए व राजनीति जाती से उठकर मुस्लिम VS गैर मुस्लिम हो गई, झूठा सेकुलरिज्म अब लोग बर्दाश्त नहीं करना चाहते।
कमजोर न्याय व्यवस्था
देश की न्याय, क़ानून व पुलिस व्यवस्था इतनी लचर है कि लोगों को ये भरोसा जरूर है कि अगर तुरंत निर्णय नहीं लिया तो अपराधी बच जाएंगे भर्ष्टाचार इस सोच को और पक्का कर रहा है इन स्थितियों के लिए कल की मोदी सरकार नही बल्कि भारत की पुरानी राजनीतिक जड़े जिम्मेदार है,
चाहे गोहत्या हो या लव जिहाद के मामले रहे हो या बड़े माफियाओं के मामले रहे हो पैसा देकर India में सबकुछ खरीदा जा सकता है इस सोच ने देश मे फैसला तुरत लेने की आदत डाल दी है जो मॉब लॉन्चिंग के लिए जिम्मेदार है ऐसा
करोडों बार हुआ है कि लोगों ने गोहत्यारों को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया पर वो थाने से छूट गए या कोर्ट से छूट गएजनता को छूने वाले इमोशनल मामलो में सख्त कानून होने चाहिए, भारत मे 3 विवाह के कानून है हिन्दू मैरिज एक्ट1955, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 व मुस्लिम पर्सनल लॉ( शरीयत ) 1935 इसी का सहारा लेकर लव जिहाद का धंधा चलता है
ऐसे में आखिर क्यों मुसलमान धार्मिक गुरु सामने आकर नही कहते की गौहत्या व लव जिहाद बंद करो क्यों नही कहते कि हम समान नागरिक संघीता चाहते है जब आप ने अपने को खुद ही बहुसंख्यक समाज से अलग कर रखा है तो राजनेता संसद में बोलकर वोट तो ले सकते है पर आपसी भाईचारा नही पैदा कर सकते, बढ़े संचार माध्यमों ने इन चीजों को और भयावह बना दिया है।
LogicalNews

काफी हद तक सही विश्लेषण।
ReplyDelete