30.12.16

LogicalNews Best Officers of The Year 2016

लख़नऊ
इक प्रचलित कहावत के अनुसार कर्मचारी को चाहिये की अपने अधिकारी से दूर रहे और प्रयास करे की उसके आगे न पड़ना पड़े, पर सरकार या संगठन अपना सभी काम अधिकारीयों के द्वारा ही करते है
अगर सरकार या संस्था इक कृतिम इंसान है तो अधिकारी इसके आँख कान और मस्तिष्क हैं,कर्मचारियों को नेतृत्व देना उनके प्रयासों को दिशा देना, गलत होने पर दण्डित करना और पारस्परिक समन्वय बनाए रहकर वांछित लक्ष्य प्राप्त करना अधिकारियों का गुण है ।

क्यों है इस सर्वे की जरूरत
पिछले 5 सालों में सपा सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया और कई क्षेत्रों में वंचित प्रदर्शन दिखाई भी पड़ा , सपा सरकार में सत्ता के अति विकेंद्रीकृत रहने के कारण बड़े अधिकारियो को बहुत दबाव में काम करना पड़ता है,
ऐसे में यूनियन ,सरकार और राजनीतिक कई क्षेत्रों से दबाव में रहकर भी जिन अधिकारियों ने काम करके दिखाया और अपने कर्मचारियों व आमजन में लोकप्रिय हुए उनका सम्मान होना चाहिए, सामान्य रूप से अधिकारियों द्वारा किये गए सभी कामों का सारा श्रेय सरकार लेती है पर कुछ श्रेय तो काम करने वाले का भी बनता है, यही सोच कर हमने जनता से अधिकारियों के बारे में जानना चाहा ।

Pattern Of survey.
LogicalNews द्वारा सबसे अच्छे प्रदेश स्तरीय अधिकारी के जनमत संग्रह में हमने 23 से 30 दिसंबर के बीच मांगे अपने पाठकों से विभिन्न विभागों में उच्च पद पर काम कर रहे जिम्मेदार अधिकारियों के बारे में उनके विचार,
हमने पोल Survey  के लिए अपनाया Popular vote Pattern जिसमे लोग खुद देते है वोट बिना किसी विकल्प के ,अर्थात हमने जनता पर नहीं थोपे अपने विचार, जिसको जितने अधिक वोट मिले उसको मिली ऊँची Rankig

कितने मिले Votes-

हमको कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मिले कुल 27286 वोट  जिनका विवरण निम्न-
1. Whatsapp- 25345
2. Twitter-1489
3. Facebook- 452

Top 10 अधिकारी
हमारे पाठकों द्वारा जिन अधिकारियों को सबसे ज्यादा पसंद किया गया उनकी रैंकिंग और मिले वोटों साथ में अधिकारियों के वारे में लोगो के विचार भी जानिए-

1. श्री AP मिश्रा जी MD UPPCL (9188 Votes)
हमारे सर्वे में यूपी में सवसे लोकप्रिय अधिकारी के रूप में स्थापित हुए है उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक इंजीनियर अयोध्या प्रसाद मिश्रा जी ये दिखाता है की आपका है सबसे बड़ा Fan Base .
गोंडा के निवासी और शिक्षा से इलेक्ट्रिक इंजीनियर श्री मिश्रा जी ने विद्युत यूपी के विद्युत विभाग में लंबे समय से सेवाएं दीं पर मुख्यमंत्री के द्वारा कई दिग्गजों को दरकिनार कर UPPCL के MD पद पर मिश्रा जी को शुशोभित करना यूपी के विकास की दिशा में इक बड़ी घटना रही, पद पर रहते हुए बिजली विभाग के पुनर्निर्माण और विकास में आमूलचूल परिवर्तन के वाहक बने, विद्युत उत्पादन, वितरण हो या 2012 के महा कुम्भ का सफल आयोजन प्रदेश सहित विश्वस्तरीय संस्थाओं ने श्री मिश्र का लोहा माना,साथ ही 2 पुस्तकों के लेखक होना बहुमुखी प्रतिभा का धनी होना प्रमाणित करता है।

विशेष- लोगों के विचार-
श्री मिश्र जी के बारे में लोगों ने अपने वोट के साथ इनको मिलनसार, संघर्षशील , काम पर फोकस रहने वाला और लापरवाही न सहने वाला भी कहा, लोगों ने कहा की मिश्र जी का सभी के दुःख सुख में खड़े रहना और काम को अच्छे से समझना उनकी सफलता का राज है ।
मिश्रा जी के लिए UPPCL के कर्मचारियों ने ही नहीं बल्की B TECH के Students और कई IT कंपनियों के कर्मचारियों ने भी दिए वोट साथ में USA, कनाडा, सिंगापुर, दुबई में स्थित NRIs ने भी दिए खूब वोट, श्री मिश्रा जी प्रदेश के लिए इक सम्पति की तरह है।

2.श्री देबाशीष पांडा जी IAS (4632 Votes)
प्रदेश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी होकर भी पांडा जी की सरलता के कायल है लोग, पुलिस जैसे महकमे में सभी पदों के बीच सामंजस्य बनाना और निर्विवाद रूप से कार्य निष्पादन पांडा जी की खूबी है, पुलिस के सिपाही से लेकिन IPS तक में लोकप्रिय,पूरे प्रदेश से मिले वोट ।
लोगो ने पांडा जी के काम के साथ उनकी संगीत प्रियता की भी तारीफ की ।

3.श्री संजय अग्रवाल IAS (2893 वोट्स)
विद्युत के क्षेत्र में किये गए कामों का श्रेय प्रमुख सचिव उर्जा को भी जाता है, अग्रवाल जी और AP मिश्रा जी के बीच का सामंजस्य गजब का है,
सपा सरकार को बिपक्ष अन्य किसी भी मुद्दे पर घेरेगा लेकिन बिजली के मुद्दे पर नहीं इसका कारण इन दोनों अधिकारियों का आपसी सामंजस्य ही था ।

4. श्री नवनीत सहगल IAS (2705 votes)
पर्यटन की असीम संभावनाओं से भरा है उत्तर प्रदेश पर पर्यटन से प्रदेश को होने वाली आय नगण्य है नवनीत जी ने पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय कार्य करवाए , लख़नऊ - आगरा एक्सप्रेस वे का समय पर निर्माण इक बड़ा मील का पत्थर है ,साथ ही अपने सरलता और विचारों को कार्यरूप देने के गुण के किये भी तारीफ के पात्र है ।

5. श्री दीपक सिंघल IAS. (1878votes)
प्रदेश के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रहे दीपक सिंघल जी के विषय में पाठकों का कहना था की हाथ में लिए काम के प्रति जितनी तेजी और जिम्मेदारी सिंघल जी के पास है कम लोगो के पास होगी, कार्यकाल में बुंदेलखंड में तालाब खुदवाने और गृह विभाग का लोगों ने किया उल्लेख, पूरे प्रदेश से आए वोट्स।

6. श्री अलोक रंजन (1642 Votes) पूर्व मुख्य सचिव यूपी
पिछले 5 सालों में सपा सरकार ने जितने काम कराए चाहे वो मेट्रो रही हो या इंफ्रास्ट्रक्चर या अन्य कल्याणकारी योजनाऍ सब में CM अखिलेश के प्रतिनिधि के रूप में साथ नजर आए अलोक रंजन जी, हर विषय में जरुरी जानकारी और सामंजस की लोगो ने की तारीफ।

7. श्रीमती अनीता सिंह IAS (1180 वोट)
प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री UP
मुख्यमंत्री कार्यालय पंचम तल अथवा लोकभवन पर स्थिति सबसे शक्तिशाली अधिकारी के रूप में स्थापित होकर भी श्रीमती अनीता सिंह जी के फैंस इनको जनभावनाओं के अनुरूप काम करने वाला ही मानते है कई लोगो ने अनिता सिंह जी के DM के रूप में कार्यकालों का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने लोगो की मदद में दिन रात काम किया, विवादों के निपटारे में एक्सपर्ट मानी जाती है अनीता जी, हमारी ओर से बधाई।

8. श्री नृपेंद्र मिश्र ( 969 वोट्स)
प्रमुख सचिव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
71 साल की उम्र में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे करिश्माई व्यक्तित्व की अपेक्षाओं पर खरे उतरना और केंद्र सरकार की चल रही हजारो योजनाओं की प्रगति पर नजर रखना आसान काम नहीं पर इनमे माहिर है नृपेंद्र मिश्र जी,
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री ग्रेजुएट और हॉवर्ड से PG श्री नृपेंद्र जी की प्रतिभा के कायल है PM तभी उनकी नियुक्त के लिए किया गया TRAI act में संशोधन, PM सहित उत्तर प्रदेश की जनता भी नृपेंद्र जी की प्रसंसक है, हमें PMO के सचिव को इक भी वोट मिलने की सम्भावना नहीं थी फिर भी इलाहाबाद, लख़नऊ और कानपुर से भारी मात्रा में मिले वोट्स, सच में देश के अच्छे अधिकारियों में से इक।

9. श्री चंचल तिवारी IAS (877Votes) प्रमुख सचिव पंचायती राज
पंचायती राज विभाग की योजनाओं को लागू करवाने में चंचल तिवारी जी की तत्परता और तेजी के लोग कायल है, विभाग के कर्मचारियों के अतिरिक्त राज्य के बहुत से DDC, BDC और प्रधानों ने भी दिए चंचल जी को वोट

10. श्री राहुल भटनागर(784 वोट)
मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश
दीपक सिंघल जी के राजनितिक विवाद में फसने के बाद उत्तर प्रदेश की Top Job पर आए राहुल जी ने अपने सरल और समन्वय युक्त व्यक्तिव से लोगो को बनाया अपना फैन, लख़नऊ से अधिकतर वोट्स।

LogicalNews ने जिस Best Officer Of The Year को ढूंढने के लिए ये सर्वे कराया उन श्री AP मिश्रा जी को इस Social Media Network की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं, जल्द ही स्म्रति चिन्ह देकर आप को सम्मानित करेगा TheLogicalNews,
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26.12.16

LogicalNews प्रदेश के Top 10 जिलाधिकारियों की सूची घोषित, पढ़िए कौन बना Best DM of the Year 2016.


लख़नऊ
भारतीय प्रसाशनिक व्यवस्था में जिलाधिकारी इक महत्वपूर्ण पद और जिम्मेदारी है, जिले का प्रसाशनिक  प्रमुख होने के साथ जनता की समस्याओं के निराकरण का स्थान भी है,
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहा 25 करोड़ की आबादी और 75 जिले है , हर जिले में औसतन 15 लाख से 75 लाख तक की आबादी है में  जिलाधिकारी की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है,
जिले में चल रहे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बीच समन्वय रखते हुए और उनको सरकार की प्राथमिकता के अनुसार कार्यो में लगाना तथा विवादों के समाधान का काम भी जिलाधिकारी का ही है।
जिला के अंदर की कानून व्यवस्था से लेकर शिक्षा, विकास , राजस्व को चलाना साथ ही राजनीतिक गतिविधियों और सामाजिक कार्यक्रमों का समन्वय भी जिलाधिकारी का काम है।

 क्यों थी जरूरत

ब्रिटिश शाशन के समय गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस ने सिविल सेवा की स्थापना की, जिलाधिकारी पद का सृजन इसी समय हुआ जिसका उद्देश्य जिले का सर्वशक्तिमान शाशक बनाना था,
आज के परिप्रेक्ष्य में तब से बहुत खुछ बदल चूका है न ब्रिटिश शाशन है और नाही जिलाधिकारी सर्वशक्तिमान है पर आज भी ये पद प्रशाशन की कुंजी है ,जिलाधिकारी पद को मिली शक्तिया और जिम्मेदारी भारतीय प्रशानिक सेवा IAS के सेवा काल में मिलने वाले सबसे अच्छे पद के रूप में माना जाता है,

इक अच्छा इंसान हर काम को बेहतरीन तरीके से करता है पर जब अच्छे व्यक्ति को पद मिल जाता है तब  जनता और समाज के लिए विकास और सुसाशन का मौका होता है आशा है की यह सूचि बड़े अधिकारियों और सरकार को अच्छे  जिलाधिकारियो का परिचय देगी ताकि सरकार इनकी क्षमताओं का भरपूर उपयोग कर सके,  इसी आधार पर यूपी की जनता से हमने जानना चाहा उनके पसंदीदा 10 जिलाधिकारियों के बारे में ।

 Pattern Of Survey

LogicalNews द्वारा सबसे अच्छे जिलाधिकारी के जनमत संग्रह में हमने 20 दिसंबर से 26 के बीच मांगे अपने पाठकों से  उनके जिलों में तैनात या पूर्व में तैनात रहे जिलाधिकारी के बारे में उनके समर्थकों के वोट ।हमने पोल Survey  के लिए अपनाया Popular vote Pattern जिसमे लोग खुद देते है वोट बिना किसी विकल्प के ,अर्थात हमने जनता पर नहीं थोपे अपने विचार जिसको जितने अधिक वोट मिले उसको ऊँची Rankig,

Votes Collection

अपने पसंदीदा जिलाधिकारी को चुनने के लिए हमारे पाठकों ने तय समय में किये 72000 वोट्स,
वोट्स लेने के लिए हमने सभी Social Media प्लेटफार्म का सहारा लिया, हमने Twitter  और Facebook पर Direct Message के द्वारा या हमारे सर्वर के  व्हाट्सएप्प no +918565866799 पर अपने नाम और शहर के साथ लोगों को अपने पसंदीदा जिलाधिकारी का नाम लिख कर भेजने को कहा ।
लोगों में नेताओ से ज्यादा उत्साह अपने जिलाधिकारी के प्रति दिखा इस तरीके से हमने पाए 72000 वोट्स जिसमे से वोटों का वितरण निम्न रहा-
Whatsapp पर - 68000 वोट्स
ट्विटर पर- 3000 votes और
Facebook पर 1000 वोट आए।


Final Results -( Ranking के साथ किसको कितने मिले Votes)


1. DM बिजनौर श्री जगत राज त्रिपाठी IAS (15854 Votes)

जनमत संग्रह में सबसे ज्यादा 15854 वोट मिले DM बिजनौर श्री जगत राज त्रिपाठी जी को इनको सबसे अधिक 8546 वोट बिजनौर से मिले इसके अतिरिक्त अमेठी, इलाहाबाद, फैज़ाबाद रायबरेली, लख़नऊ कानपुर से बड़ी मात्रा में लोगो ने इनके लिए वोट किये,
अमेठी जिले को बनाने और  बसाने वाले श्री जगत राज जी अभी तक यहाँ के लोगो के मन में है उनकी ईमानदारी, अपनापन और काम के प्रति समर्पण की तारीफ हर वोटर ने की ।

2. DM मेरठ श्रीमती B. चन्द्रकला IAS ( 14677Votes)

मेरठ की DM श्रीमती B चन्द्रकला भी अपने समर्थकों में बहुत लोकप्रिय है अच्छे निर्णय और सभी वर्गों में मजबूत पकड़ के साथ कुशल प्रसाशक व अच्छी Motivation Skills भी रखती है श्रीमती B चन्द्रकला ।
सोशल मीडिया में इनके समर्थको ने देर से इंट्री की 23 DEC को शुरू हुई वोटिंग में सबसे ज्यादा 8678 वोट्स मेरठ से मिले इसके अतिरिक्त शाहजहाँपुर, मथुरा, नॉएडा, बरेली, कानपुर, लख़नऊ और दिल्ली NCR से भी DM साहिबा के समर्थकों ने डाले वोट्स


*नोट*  श्रीमती B चन्द्रकला के वोटों में अन्य से रहा अंतर , मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों या प्रबुद्ध वर्ग के अतिरिक्त स्टूडेंट्स और युवाओ ने दिए वोट खासकर महिलाओ और स्कूल की लड़कियों ने 23 दिसंबर को क्रैश कर दिया था हमारा सर्वर ।

3. DM वाराणसी श्री योगेश्वर राम मिश्रा IAS (12546 votes)

बाराबंकी और फैज़ाबाद के जनप्रिय जिलाधिकारी रहे और वर्तमान में PM मोदी के संसदीय क्षेत्र के DM श्री योगेश्वर राम मिश्र जी को लोग सर्व सुलभ और सरल सबकी मदद करने वाला मानते है, लोग मिश्रा जी को One  Man Army भी लिखा जो सभी को समझने में समर्थ है ।
श्री मिश्र जी को मिले सर्वाधिक 5432 वोटों की संख्या बाराबंकी से  रही , इसके अतिरिक्त वाराणसी , इलाहाबाद, लख़नऊ और फैज़ाबाद से भी समर्थन में वोटिंग, सुरुवात में सबसे आगे रहे थे पोल में ।

4. DM सीतापुर श्री अमृत त्रिपाठी IAS (8278 Votes)


उत्तर प्रदेश सरकार की मासिक जन समस्याओं के समाधान और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित रैंकिंग (ICDS)  में सीतापुर जिले को 7 महीने में No-1 स्थान पर पहुँचाने वाले श्री अमृत त्रिपाठी जी को सीतापुर, लख़नऊ, प्रतापगढ़ , हरदोई और बाराबंकी से मिले वोट्स,
सीतापुर जैसे बड़े जिले को विकास योजनाओं में टॉप पर पहुँचाने के वाले DM के लिए सोशल मीडिया द्वारा चौथा स्थान मिलना अनपेक्षित था पर Statistical Calculations में यही जनता का निर्णय है ।

5. DM जौनपुर भानु चंद्र गोस्वामी IAS ( 5728 Votes)

प्रदेश में जौनपुर ऐसा जिला है जहाँ के सबसे अधिक IAS-IPS पूरे देश में है, ऐसे जिले का प्रशासन चलाने वाले IAS के समर्थक भी अच्छे मात्रा में है, 2009 बैच के अधिकारी श्री गोस्वामी के विषय में लोगो का कहना है की जब कही काम न हो तो DM से जरूर मिलेगी मदद, वाराणसी, सुल्तानपुर इलाहाबाद और सिद्धार्थनगर से अच्छी मात्रा में वोट मिले साथ ही सभी राजनीतिक समाजिक वर्गों का समर्थन मिलता दिखा ।

6. पूर्व DM लख़नऊ श्री राजशेखर* ( 5213 वोट्स)

लख़नऊ और इलाहाबाद के पूर्व DM और वर्तमान में मंडी परिषद् के निदेशक राजशेखर जी अपने अच्छे प्रसासन और सख्त फैसलों के लिए जाने जाते है,
CM अखिलेश के करीबी अधिकारियो में से इक रहे राजशेखर जी के तबादले के बाद लोग सड़क पर उतर आए थे,
बिना किसी दबाव व् पक्षपात के काम को सुलझाने वाले अधिकारी की छवि, लख़नऊ, इलाहाबाद ,इटावा और झाँसी से  समर्थन में हुई वोटिंग ।

7. श्री विजय किरण आनंद IAS* ( 3289 Votes)

उत्तर प्रदेश के निवासी न होकर भी इस प्रदेश को बहुत अच्छे से समझने वाले अधिकारियो में से इक है विजय किरण आनंद, जिलाधिकारी के रूप में कई जिलो में तैनात रहे श्री आनंद के विषय में लोगो ने जिलाधिकारी द्वारा सीधे मदद पहुचाने के बहुत प्रकरण हमको भेजे, उन्नाव,मथुरा शाहजहाँपुर , बरेली, पीलीभीत से VK आनंद के समर्थन में हुई वोटिंग, वाराणसी से मिले बहुत कम वोट्स ।

8. DM आजमगढ़ श्री सुहास LY, IAS* ( 2915 Votes)

जज्बे का दूसरा नाम है सुहास इक पैर  खराब होकर भी दुनिया की सभी कठिनाइयों को जितने वाले सुहास की प्रशसनिक क्षमता का लोहा मानता है LogicalNews, लोगो का कहना है की DM साहब के संज्ञान में आए मामले का निराकरण होगा जरूर,
बीजिंग में 22 से 27 नवम्बर के बीच आयोजित एशियन पैरा बैडमिंटन टूर्नामेंट का गोल्ड मेडल जीतने वाले सुहास उत्तर प्रदेश के लिए इक संपत्ति है, लख़नऊ, गोरखपुर, आजमगढ़ , वाराणसी से वोटिंग।

9. श्रीमती किंजल सिंह IAS* ( 2185 Votes)

यूपी की तेज तर्रार महिला IAS अधिकारियों में शुमार किंजल सिंह के समर्थन में भी भारी उत्साह और वोटिंग , किंजल सिंह के लिए फैज़ाबाद मथुरा और लख़नऊ से वोटिंग ।

10. DM कानपुर कौशल राज शर्मा IAS* (1141 Votes)

कानपुर नगर के जिलाधिकारी श्री कौशल राज जी के समय में लोगो के लिए सरकारी कार्यालयों में कामकाज करवाना आसान हुआ है समर्थन कानपूर नगर और देहात के साथ इलाहाबाद से भी वोटिंग ।


सभी TOP 10 जिलाधिकारियों को इस छोटे Social Media नेटवर्क LogicalNews की ओर से बहुत बहुत बधाई, साथ ही हम अगले वर्ष 2017 में और नए अधिकारियों को इस लिस्ट में शामिल करना चाहेंगे, साथ ही Best DM of the Year रहे जगत राज त्रिपाठी जी का ह्रदय से आभार ।

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5.12.16

भारत की राजनीति का चमकता सितारा रही जयललिता का जीवन सिफर से शिखर तक


लख़नऊ

2016 में छठी बार तमिलनाडु में सत्ता की कमान संभालने वाली तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता 5 दिसंबर 2016 को अपने जीवन मृत्यु की लड़ाई हार बैठीं.
जयरामन जयललिता ने उतार-चढ़ाव से भरे अपने करियर में कई लड़ाइयां लड़ी और जीतीं. हर बार वापस उठ खड़े होने और अपने निजी एवं राजनीतिक दुष्प्रचारकों से लड़ने के दृढ़ निश्चय के लिए पहचानी जाने वाली जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को कर्नाटक के मैसूर में इक धार्मिक ब्राम्हण परिवार में हुआ था.

सीवी श्रीधर के निर्देशन में साल 1956 में बनी फिल्म वेननीरा अदाई से सिनेमा जगत में पदार्पण करने वाली जयललिता ने एक किशोर अभिनेत्री से एक लोकप्रिय और चर्चित अभिनेत्री बनने तक का सफर तय किया

 
अपनी मां के जरिए फिल्मों में प्रवेश के बाद उस जमाने के लोकप्रिय अभिनेता एम जी रामचंद्रन के साथ उनकी जोड़ी मशहूर हुई. 1965 से 1972 तक उन्होंने अधिकांशतः फिल्में एमजीआर के साथ कीं. लेकिन इसके बाद एमजीआर से अगले 10 सालों तक उनका फिल्मी नाता नहीं रहा क्योंकि वो राजनीति में चले गए और 1977 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने.

1980 में तमिलनाडु में चार महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगा और फिर चुनाव हुए. एमजीआर एक बार फिर मुख्यमंत्री बने और मुख्यमंत्रित्व काल के इसी दूसरे दौर में एमजीआर जयललिता को राजनीति में लेकर आए, हालांकि जयललिता ने हमेशा इससे इंकार किया. यहां यह बताना जरूरी है कि जयललिता के राजनीतिक करियर की शुरुआत डीएमके पार्टी से हुई जिसे आज जयललिता ने तमिलनाडु में हाशिए पर ला खड़ा किया है.


तमिल तेलुगू, कन्नड़ और एक हिंदी फिल्म सहित उन्होंने 300 से अधिक फिल्में करने के बाद जयललिता को एमजीआर ने राज्यसभा पहुंचाया. एमजीआर जयललिता की इंग्लिश के भी बेहद कायल थे और राज्यसभा में उन्हें भेजने के पीछे भी यही कारण था.

राज्यसभा में जया 1984-89 तक रहीं. इस दौरान उन्हें पार्टी का प्रचार सचिव भी नियुक्त किया गया. 1987 में जब एमजीआर के निधन के बाद उनकी पार्टी दो धड़े में बंट गई. जयललिता एमजीआर के धड़े की लीडर बनीं और उन्होंने खुद के एमजीआर के विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. इसके बाद उनका राजनीतिक करियर जो शुरू हुआ वो अब 29 सालों बाद उनके निधन के साथ खत्म हुआ. इस दौरान वो छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं.

साल 1991 में उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और राजीव गांधी की हत्या से पैदा हुई सहानुभूति की लहर ने उनकी पार्टी को भारी जीत दिलाने में मदद की. इसके साथ ही जयललिता ने पहली बार 1991 में मुख्यमंत्री का पद संभाला. जयललिता के नाम न केवल तमिलनाडु की पहली महिला मुख्यमंत्री होने का रिकॉर्ड है बल्कि वो इस राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री भी बनीं.
इसी दौर में उनकी अपनी निकट मित्र शशिकला के परिवार के साथ टकराव शुरू हो गया. वह परिवार कथित तौर पर सरकार के हर मोर्चे पर दखलअंदाजी कर रहा था. जयललिता के दत्तक पुत्र वी. एन. सुधाकरण की शादी में सार्वजनिक तौर पर जिस शान-ओ-शौकत का प्रदर्शन किया गया, उसकी भी भारी आलोचना हुई.

साल 1996 में भ्रष्टाचार के आरोपों की पृष्ठभूमि में जयललिता के नेतृत्व वाली पार्टी द्रमुक-टीएमसी के गठबंधन के हाथों हार गई थी. इस गठबंधन को तमिल सुपरस्टार रजनीकांत का समर्थन प्राप्त था. इसके बाद जयललिता को गिरफ्तार कर लिया गया था और उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले समेत कई मामले दर्ज कर लिए गए थे.

चुनावी नुकसान से विचलित हुए बिना, जयललिता ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ गठबंधन कर लिया लेकिन बाद में उन्होंने अपने राजनैतिक कद को राष्ट्रीय फलक तक ले जाते हुए वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को साल 1999 में गिरा दिया.

साल 1991...96, 2001...2006 और मई 2011 से सितंबर 2014 तक मुख्यमंत्री रह चुकीं जयललिता इस दौरान अपने कठोर फैसलों के लिए भी चर्चा में रहीं.
साल 2001 में जयललिता एक बार फिर अपनी पार्टी को सत्ता में लेकर आईं और इस दौरान जब सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल की तो जयललिता ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग दो लाख कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया. इससे पूरा तमिलनाडु हिल उठा. इसी साल TANSI भूमि मामले में दोषी साबित होने के कारण कुछ समय के लिए उन्हें मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा लेकिन इसका असर उन्होंने पार्टी के भाग्य पर नहीं पड़ने दिया.

इस परिस्थिति से निपटने के लिए तब उन्होंने ओ. पनीरसेल्वम को अपने स्थान पर तैनात कर दिया था. मामले में निर्दोष साबित होने के बाद ही उन्होंने पनीरसेल्वम से शासन की कमान वापस ली.
आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें पहले दोषी और फिर बरी किया गया. आय से अधिक संपत्ति के मामले के चलते उनके राजनीतिक करियर के बिखर जाने का खतरा पैदा हो गया था लेकिन कमबैक क्वीन ने एक ऐसे समय पर अपनी वापसी की जब उनकी पार्टी 2016 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही थी.

जयललिता की वापसी ने विपक्षियों की रणनीति में एक नया ही पेंच ला दिया. 2014 सितंबर में अन्नाद्रमुक प्रमुख को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी ठहराया गया तो वह एक केंद्रीय कानून के कारण स्वत: ही अयोग्य हो गईं. जयललिता ने इसका सामना कानूनी तौर पर करने का संकल्प जताया था. मामले में बरी होने के 15 दिन के भीतर उन्होंने पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
पुरात्ची थलाइवी (क्रांतिकारी नेता) कहलाने वाली जयललिता ने द्रमुक की उन सभी गणनाओं को गलत साबित कर दिया था, जिनके अनुसार, द्रमुक को साल 2011 में सत्ता हासिल होने वाली थी. उस साल जयललिता ने डीएमडीके और वाम दलों के साथ गठबंधन करते हुए अपनी पार्टी को शानदार जीत दिलाई.

एम करुणानिधि के नेतृत्व वाली डीएमके को महज 23 विधायक ही मिल पाए थे. उसके बाद से जयललिता के कद को तमिलनाडु में कोई चुनौती नहीं दे सका क्योंकि अन्नाद्रमुक ने न सिर्फ सभी उपचुनाव और स्थानीय निकायों के चुनाव जीते, बल्कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भी अपनी उत्कृष्टता साबित की. जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक ने राज्य में 39 लोकसभा सीटों में से 37 सीटों पर जीत का परचम लहराकर तमिलनाडु में नरेंद्र मोदी के लहर के खिलाफ जयललिता की लोकप्रियता के पर्याप्त संकेत दे दिए.

अम्मा का कद किस कदर ऊंचा हुआ कि द्रमुक प्रमुख करुणानिधि के संकेत के बावजूद कि उनकी पार्टी गठबंधन करके ही 2016 विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक को चुनौती दे सकती है, विपक्ष 2016 के विधानसभा चुनावों तक वापस खड़ा नहीं हो पाया.


-TheLogicalNews
(Stay Updated)