28.2.20

जुममेे की नांमाज के बाद शान्त रहा उत्तर प्रदेश, बिजनौर व् बुलन्द्षहर में घरों की छत पर मिले पत्थर

मेरठ

दिल्ली में  चल रहे साम्प्रदायिक तनाव व दंगो के बीच राजधानी से सटे  जिलों में फोर्स काफी मुस्तैद थी आज। यूपी में बीते दिसंबर में हुई हिंसा के बाद छाई शांति पर एक बार फिर खतरे का बादल मंडरा रहा था। प्रदेश में माहौल खराब होने की आशंका के बीच पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया था। मेरठ, बागपत, शामली, बिजनौर, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर के साथ सहारनपुर की जामा मस्जिद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी। मुजफ्फरनगर में एसपी सिटी विनीत भटनागर के नेतृत्व में जमा मस्जिद के आसपास भारी पुलिस बल था। बागपत की की कैराना कोतवाली में डीएम और एसपी ने पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

घरों की छतों पर मिले पत्थर पुलिस ने उतरवाए
बिजनौर तथा बुलंदशहर में जुमे की नमाज से ठीक पहले पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। ऊपरकोट मोहल्ले में ड्रोन की मदद से तीन मकानों की छत पर पत्थर देखे गए। उसी समय आईजी ज्योति नारायण ने सीओ सिटी को आदेश दिया कि इन घरों की छतों से पत्थरों को उतरवाया जाए। बिजनौर में चहशीरी इलाके के कई घरों की छतों पर पत्थरों से भरे बोरो के मिलने से स्थानीय पुलिस के होश उड़ गये हैं। इस बात की खबर मिलते ही पुलिस ने पूरे इलाक़े में तलाशी अभियान तेज कर दिया। ड्रोन से निगरानी के आधार पर ऐसे तमाम घरों पर कार्रवाई शुरू हुई जहां पत्थरों से भरे बोरे रखे हुए थे। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उन पत्थरों को हटवाया


 कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मेरठ मंडल में जुमे की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई। किसी भी जिले से कोइ बवाल की खबर नहीं है। एसएसपी और डीएम सड़कों पर उतरकर अपने क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही सभी जिलों में भारी पुलिस बल व पीएसी के जवानों को उतारा गया है। ड्रोन से भी नजर रखी गई। मेरठ में जुमे की नमाज पर कड़ी सुरक्षा एसएसपी अजय साहनी और डीएम अनिल धींगरा दोनों अफसर संयुक्त रूप से फोर्स के साथ जिले का भ्रमण कर रहे थे

अधिकारियों को मिली अलग अलग जिम्मेदारी
लखनऊ में DGP हितेश चंद्र अवस्थी ने ADG, IG, व DIG स्तर केे अधिकारियों को अलग अलग जिला में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उनके निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारी उन जिलों में कैंप कर रहे हैं। एडीजी अविनाश चंद्र ने अलीगढ़, एडीजी प्रशांत कुमार ने मेरठ, आइजी प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने गाजियाबाद, आइजी रमित शर्मा ने संभल, आइजी ज्योति नारायण ने बुलंदशहर व हापुड़ तथा आइजी लक्ष्मी सिंह को ने मुजफ्फरनगर और डीआइजी जे.रविंद्र गौड ने बिजनौर की मॉनीटरिंग तथा कड़े सुरक्षा प्रबंध को सुनिश्चित किया

उत्तर प्रदेश पुलिस 22 जिलों में अतिरिक्त खुफिया मॉनिटरिंग कर रही है व सोशल मीडिया सेल के जरिए नजर रखी जा रही है


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9.2.20

SC-ST Act पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अब शिकायत पर होगी गिरफ्तारी

दिल्ली



SC-ST एक्ट पर 2018 में हुए कानून संसोधन पर डाली गई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया व संसोधन को मान्यता प्रदान की, इस आधार पर अब शिकायत दर्ज होते ही होगी गिरफ्तारी।

पिछले साल मार्च महीने में कोर्ट ने एससी-एसटी कानून के दुरुपयोग के मद्देनजर इसमें मिलने वाली शिकायतों को लेकर स्वत: एफआईआर और गिरफ्तारी के प्रावधान पर रोक लगा दी थी। इसके बाद संसद में अदालत के आदेश को पलटने के लिए कानून में संशोधन किया गया था। संशोधित कानून की वैधता को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी।

वहीं दूसरी ओर, उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है तथा पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मूल अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा, ”इस न्यायालय द्वारा निर्धारित कानून के मद्देनजर इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य सरकारें आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसा कोई मूल अधिकार नहीं है जिसके तहत कोई व्यक्ति पदोन्नति में आरक्षण का दावा करे।”

पीठ ने अपने फैसले में कहा, ”न्यायालय राज्य सरकार को आरक्षण उपलब्ध कराने का निर्देश देने के लिए कोई परमादेश नहीं जारी कर सकता है।” उत्तराखंड सरकार के पांच सितम्बर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उपलब्ध कराये बगैर सार्वजनिक सेवाओं में सभी पदों को भरे जाने का फैसला लिया गया था। सरकार के फैसले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसने इसे खारिज कर दिया था।

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