3.1.18

भीमा कोरेगांव मामले में LogicalNews को रिपोर्ट, नेताओं की सियासत से समाज का बटवारा

Mumbai

महाराष्ट्र में दलितों और मराठा समुदाय के बीच कई जगह हिंसक झड़पें होने की ख़बरें हैं. इन झड़पों की शुरुआत कोरेगांव भीमा, पाबल और शिकरापुर से हुई, जहां बवाल में कथित रूप से एक व्यक्ति की मौत हो गई, इस मामले को कुछ असफल नेताओ ने हवा दी और जातीय भेदभाव की आग पूरे महाराष्ट्र में फैल गई,
पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं सालगिराह के दौरान हुई हिंसा के आरोप गुजरात के विधायाक  जिग्नेश मेवानी और JNU के छात्र उमर खालिद पर लगे हैं. 

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक मंगलवार देर शाम अक्षय बिक्कड और आनंद डॉन्ड नाम के दो युवकों ने पुणे के डेक्कन पुलिस स्टेशन में जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद के खिलाफ लिखित में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद ने कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद यह हिंसा फैली है. 

मामले को बढ़ता देख BR अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर भे नेता बनने निकल पड़े है और आज महाराष्ट्र बंद का आवाहन किया है, मुंबई का Eastern Express Highway ब्लाक है ठाणे , पुणे में जनजीवन अस्तव्यस्त हो चुका है, मुंबई में रोड़ों की ब्लाक होने से बचाने  के लिए धारा 144 लगाई गई है, संसद में हंगामा हुआ अव प्रधानमंत्री से सफाई देने की मांग विपक्षी दल कर रहे है।

गौरतलब है कि 200 साल पहले  1 जनवरी 1818 को स्वराज्य की मांग कर रहे मराठा सेनाओ से ब्रिटिश सेनाओ का युध्द हुआ था जिंसमे मराठा सेनाओ का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय व बॉम्बे इन्फेंट्री की ब्रिटिश सेना का नेतृत्व जरनल जोसफ स्मिथ के हाथ मे था, पुणे पर अंग्रेजों के कब्जे से बचाने के लिए रास्ते मे ब्रिटिश सेना की टुकड़ी पर पेशवाई सेना ने हमला किया जिंसमे अधिकतर सैनिक महार थे व इस युध्द में 275 ब्रिटिश सैनिक मरे व लगभग 600 मराठा सैनिक मारे गए, और मराठा सेना वापस लौट गई, बाद में मराठों ने पुणे पर कब्जा किया।

ब्रिटिश सेना की जीत का जश्न आज शायद ही आजाद भारत के किसी भी कोने में मनाया जाता हो पर ये काम अब होने लगा है और इसकी  जड़ है भीड़तंत्र में समाज को किसी भी तरह ऐसे हिस्सों में बांटने का प्रयास जिससे कि शाशन आसानी से किया जा सके क्योंकि लोग इतने बुद्धिमान नही होते और भावनाओं में बहकर निर्णय लेते है इसलिए ये प्रयास सफल हो रहे है,

गुजरात मे जातिवाद का जिन्न बाहर आया पर हार के बाद कुंठाग्रस्त हो चुका है जिसके कारण जिग्नेश मेवानी को आगे करके दलितों को हिंदू समाज से अलग दिखाने का प्रयास किया जा रहा है जिसके साथ भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह के नारे लगाने वाला उमर खालिद भी शामिल है, जातिवादी नेताओ के अनुसार देश मे दलित +अल्पसंख्यक VS सवर्ण + OBC की राजनीति होनी चाहिए उंसके लिए ये सबसे अच्छा मुद्दा बनाया जा सकता है। नए नए नेता बनने चले प्रकाश अम्बेडकर शायद ये भूल गए है कि उनके दादा जी रोड जाम करके दलितों का भला नही किये बल्कि कुछ सार्थक पहले किये, जिस छुआछूत को लेकर ये हल्ला मचा है वो कबकी खत्म हो चुकी है।

समाज को अब जातिवाद के सहारे अपनी राजनीतिक रोटी सेकने वाले नेताओं की सच्चाई जानने की जरूरत है 1 जनवरी के बाद में इस हिंसा के भड़कने के पीछे कुछ 20% वोट रखने वाली राजनीतिक पार्टियों के अलावा सभी पश्चिमी मीडिया ग्रुप लगे है और सफल हो रहे है, HUFF POST, Economist और  BBC India जो कि ब्रिटेन की Spy Agency के रूप में भारत मे काम करती है ने प्रमुखता से इस बात को विश्व मे पहुँचाया की दलितों पर भारत मे अत्याचार हो रहे है और ईसाई धर्म उनका हितैषी है।

ऐसे मामलों को समझ कर आधुनिक शिक्षित समाज को प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

LogicalNews.in

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