10.6.18

अपने क्षेत्र में एक्सपर्ट्स को मोदी सरकार का बुलावा,लेटरल एंट्री का आदेश जारी, बिना UPSC के बनेगे IAS

दिल्ली

*IAS अधिकारियों की गिरफ्त से सरकार को बाहर करने की दिशा में मोदी सरकार का बड़ा प्रयास, लेटरल एंट्री शुरू करने का आदेश जारी, बिना UPSC के बनेंगे अधिकारी*
बहुप्रतीक्षित लैटरल एंट्री की औपचारिक अधिसूचना सरकार की ओर से जारी कर दी गई है। आज इन पदों पर नियुक्ति के लिए DoPT के लिए विस्तार से गाइडलाइंस के साथ अधिसूचना जारी की गई। सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी।

*10 मंत्रालयों में बनेंगे विशेष लेटरल एंट्री IAS*
10 मंत्रालयों में होगी विशेषज्ञ की नियुक्ति जोकि UPSC से नही बल्कि किसी भी PSU, प्राइवेट कंपनियों,बैंक्स में 15 साल का अनुभव रखते हो।

*नियुक्ति प्रक्रिया*
इन अधिकारियों को UPSC नही बल्कि इंटरव्यू होगा सेलेक्शन और कैबिनेट सेक्रटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमिटी इनका इंटरव्यू लेगी। योग्यता के अनुसार सामान्य ग्रेजुएट और किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव रखने वाले भी इन पदों के लिए आवेदन दे सकते हैं। आवेदन में योग्यता इस तरह तय की गई है कि उस हिसाब से कहीं भी 15 साल का अनुभव रखने वालों के सरकार के टॉप ब्यूरोक्रेसी में डायरेक्ट एंट्री का रास्ता खुल गया है। आवेदन देने की अंतिम तारीख 30 जुलाई है। 

इन मंत्रालयों में होगी 'विशेषज्ञ' की नियुक्ति-
शुरुआती पहल के अनुसार अभी सरकार 10 मंत्रालयों में एक्सपर्ट जॉइंट सेक्रटरी को नियुक्त करेगी। ये 10 मंत्रालय और विभाग हैं- फाइनैंस सर्विस, इकनॉमिक अफेयर्स, ऐग्रिकल्चर, रोड ट्रांसपोर्ट, शिपिंग, पर्यावरण, रिन्यूअबल एनर्जी, सिविल एविएशन और कॉमर्स। इन मंत्रालयों और विभागों में नियुक्ति कर विशेषज्ञता के हिसाब से ही पोस्टिंग होगी। 

बहुत दिनों से लटका था मामला, आज हुआ आदेश जारी-
ब्यूरोक्रेसी में  लैटरल ऐंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में ही आया था, जब प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट आई थी। लेकिन तब इसे सिरे से खारिज कर दिया गया। फिर 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। लेकिन पहली गंभीर पहल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हुई। पीएम मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमिटी बनाई, जिसने अपनी रिपोर्ट में इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। 

सूत्रों के अनुसार ब्यूरोक्रेसी के अंदर इस प्रस्ताव पर विरोध और सहयोग आशंका दोनों रही थी, जिस कारण इसे लागू करने में इतनी देरी हुई। अंतत: पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद मूल प्रस्ताव में आंशिक बदलाव कर इसे लागू कर दिया गया। हालांकि पहले प्रस्ताव के अनुसार सेक्रटरी स्तर के पद पर भी लैटरल ऐंट्री की अनुशंसा की गई थी लेकिन सीनियर ब्यूरोक्रेसी के विरोध के कारण अभी जॉइंट सेक्रटरी के पद पर ही इसकी पहल की गई है। सरकार का मानना है कि लैटरल एंट्री IAS अधिकारियों की कमी को पूरा करने का भी प्रभावी जरिया बनेगा साथ ही सरकार में उच्च पदों पर कुंजी रूपी IAS की जगह विषय व काम के जानकार पहुँच सकेंगे।

LogicalNews
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3 comments:

  1. अधिकतम आयु सीमा क्या है?

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  2. बहुत अच्छी पहल है । इस सरकार में तो ईमानदारी से अच्छे लोग लग जायेंगे। लेकिन कांग्रेस के आने के बाद बहुत गडबड की आशंका है । अतः आगे का प्रबंध भी सोचकर UPSC जैसा योग्य लोगों का संवैधानिक बोर्ड बना देना चाहिये ।

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  3. Mahendra Bahadur Sir is the best DM.

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