15.10.18

जानिए Me Too Movement के बारे में सबकुछ, कैसे एक 13 साल की बच्ची ने 2006 में दिया me too नाम

MeToo Movement.

सोशल मीडिया ने अबतक समाज मे  बहुत से अच्छे काम किये है जिनमें से एक है #MeToo Movement आइये जानते है इसके बारे में।

भारत मे तनुश्री दत्ता व नानापटेकर विवाद के बाद चर्चा में आया ये सोसल मीडिया मोमेंट 2006 से चल रहा है जब *तराना बरके (Tarana Burke)* नाम की न्यूयॉर्क की क्रिश्चियन सोसल एक्टिविस्ट ने महिलाओं के खिलाफ हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में अमेरिका में एक व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का प्रयास किया

तराना बरके ने अलबामा में एक 13 साल की लड़की Heaven जो कि अपनी माँ के प्रेमी द्वारा किये गए sexual Abuse से पीड़ित थी से इस बारे में बात करने का प्रयास किया पर वो इस बारे में कुछ भी खुलकर बोलने से बच रही थी बातचीत के दौरान उसने कहा *MeToo A victim of the same* और उसके बाद *My Space* पर सबसे पहले Me Too शब्द का इस्तेमाल किया गया था 

*Alyssa Milano*
Metoo आंदोलन धीरे धीरे खत्म हो चुका था पर हॉलीवुड अभिनेत्री आल्यासा मिलानो ने 2017 में इसको पुनर्जीवित किया व  Facebook और Twitter पर महिलाओं को इस हैशटैग के साथ अपनी बात सोशल मीडिया में रखने के लिए प्रेरित किया व खुद प्रोड्यूसर डायरेक्टर हार्वे विंस्टन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए, 

अलिसा मिलानो के ट्वीट के बाद 2 दिन में 10 लाख ट्वीट्स Metoo से संबंधित पोस्ट हुए थे,  इससे प्रेरित होकर अक्टूबर 2017 में अमेरिकी फ़िल्म प्रोड्यूसर Harvey Weinstein के खिलाफ 15 महिलाओं ने Metoo मोमेंट के तहत सोशल मीडिया में रेप व छेड़छाड़ के मामलों का खुलासा किया, 

Harvey Weinstein sexual abuse allegations -
विंस्टन ने पहले तो इन मामलों को हल्के में लेकर झूठा बताया पर जब 80 महिलाओं ने ऐसे आरोप लगाए तो वो बचाव में उतरे पर कुछ दिनों बाद विंस्टन कंपनी व Academy of Motion Pictures and Arts से निकाल दिए गए,
विंस्टन के खिलाफ 6 महिलाओं ने क्रिमिनल आरोप लगाए जिनपर न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस व लंदन में मुकदमा किया गया व 25 जून 2018 को विंस्टन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और अब वो जमानत पर है विंस्टन मामले में METOO पर 2017 में सबसे पहला आर्टिकल लिखने वाले New York Times and NewYorker को 2018 का पुलित्ज़र पुरुष्कार दिया गया है।

भारत मे अबतक कई नेताओं फिल्मी कलाकारों वह पब्लिक फिगर के ऊपर मी टू मोमेंट के तहत बड़ी बड़ी बातें सामने आ रही हैं इन मामलों के सच्चाई की जांच के बगैर कुछ भी कह पाना असंभव है कई मामलों में यह सच होते हैं कई मामलों में Metoo मूमेंट का उपयोग प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है फिर भी एलिसा मिलानो या तराना बुर्के द्वारा प्रारंभ किया गया ये मोमेंट बड़े काम का है जिसने कई भेड़ियों को बेनकाब किया है

विदेशों में एमिली जॉय व हन्नाह पाश नामक महिलाओं ने चर्च जैसे पवित्र स्थान पर महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन दुराचार पर Me Too के द्वारा लोगो का ध्यान आकर्षित किया है जिसमे कई पादरी जेल गए है,  

भारत मे भी बढ़ना चाहिए Me Too-
भारत मे जहां पुलिस शिकायत आसान नही व  मंदिरों व मस्जिदों में भी ऐसी घटनाएं होती है , महिलाओं को चाहिए कि Me Too का इस्तेमाल ऐसे मजहबी भेड़ियों को सामने लाएं औपचारिक शिकायत से सोशल मीडिया में ऐसी शिकायत करने ज्यादा आसन है क्योंकि बड़े लोगो के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज नही करती है जबकि Social Media ये प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है।

TheLogicalNews
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