3.6.16

मथुरा हिंसा मामले में LogicalNews की रिपोर्ट



मथुरा
कल हुई हिंसा जिसमे 22 लोगो के मौत हुई है जिसमें 2 पुलिस अधिकारी सामिल है SO संतोष यादव और SP CITY मुकुल द्विवेदी के विषय में हमारी टीम जब मथुरा पहुची तो कुछ चौकाने वाले तथ्य सामने आए ।
रामबृक्ष यादव जो कभी बाबा जयगुरुदेव का खास होता था इस मामले का मास्टरमाइंड था,

बाबा की मौत के बाद उनके शिष्य पंकज यादव बने महंत और रामबृक्ष हुआ बाहर , रामबृक्ष को शांत रखने के लिए जवाहर बाग की 247 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा करने की योजना बनाई गई,

DM और SSP मथुरा भी आपस में इस मामले में अलग राय रखते थे हाईकोर्ट के 2 बार आदेश देने के बाद भी DM का मन नहीं था की जबरदस्ती जमीन खाली कराई जय पर SSP को हीरो बनना था और उन्होंने इस काम के लिए  पुलिस टीम तैयार कर के चढाई कर दी,

नंबर बढ़ने के जल्दी में SSP ने पूरी तैयारी तक नहीं की और ना की LIU टीम ने कोई काम सही से किया DGP का खुद का बयान रहा है की-178 जिंदा कारतूस, 6 रायफल, 45 तमंचे मिले है आखिर इतनी मात्रा में युध्द छेड़ने भर की तैयारी कोई इक रात में नहीं कर सकता, क्या LIU और इंटेलिजेंस विभाग सिर्फ सफ़ेद हाथी है या DM और SSP ने इनकी बात को सुना ही नहीं,

रामबृक्ष के बारे में मिल रही सुचना के अनुसार कल हुई फायरिंग में उसकी मौत हो गई है,DGP साहब वह पहुचे और जमीम खाली करा ली गई है और अबतक 124 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है कहकर चले आए,

अस्पताल में लगभग 30 लोग घायल है जिसमे सिपाही या पुलिसकर्मी भी गंभीर है जिनकी जीवन की डोर कभी भी टूट सकती है सियासत जोरों पर है अखिलेश ने दोनोँ शहीदों को 20-20 लाख की सहायता की घोषणा की है और जाँच की बात की है ,

जाँच की बात है तो जाने की पहले जाँच Commissioner आगरा को दी गई जोकि बहुत तेज तर्रार अफसर है पर तुरंत ही जाँच बदल कर Commissioner अलीगढ़ को दे दी गई, साथ ही अब लख़नऊ में सियासत का असली खेल शुरू होगा, BJP कांग्रेस और BSP सभी अपने मंच पर दिख रहे है,

BJP अध्यक्ष केशव मौर्या का बयान आया है की मथुरा में पुलिसकर्मी को मारने वालो को शिवपाल का समर्थन हासिल है अन्यथा कई बार रिपोर्ट आने पर भी क्यों पहले नहीं हुई कारवाही, क्षेत्रीय सांसद हेमामालिनी शूटिंग कर रही है, मायावती इस्तीफा माँग रही है और अखिलेश जाँच करवा रहे है, पर मथुरा की आम जनता डरी है,

आगे क्या होता है येतो देखने का विषय है पर सरकारों को ये सोचना पड़ेगा की UP की पुलिस खुद ही बेचारी क्यों हो गई है और इन आयोग अधिकारियो को जिलो में क्यों भेजा जाता है जो स्तिति को समझ नहीं पाते और ऐसी घटनाएं हो पाती है।

-TheLogicalNews
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