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उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के लिए ये है भाजपा की रणनीति



अब तक दिख रही सधी चालों और योजनाओं से BJP की रणनीति साफ मालूम चल रही है की 2017 चुनाव् जीतने की भाजपा की क्या योजना है,BJP की UP रणनीति पर इक Analysis Report.

असम की जीत से अति उत्साहित BJP ने यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ये बात अच्छे से जानते हैं कि 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव फाइनल से पहले नॉक आउट क्वार्टर फाइनल मैच है. इसमें हारने के बाद भी बीजेपी 2019 का फाइनल मैच जरूर खेलेगी बस जीतने की गारंटी 40 फीसदी रह जाएगी. इसलिए अमित शाह सहित पूरी BJP ने अपना पूरा फोकस यूपी पर केंद्रित कर दिया है.

जातीय समीकरण का परिणाम - केशव मौर्या
यूपी में चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने इस बार शोशल इंजिनीरिंग को ध्यान में रखकर ही पिछड़ी जाति के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए केशव प्रसाद मौर्य को यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया और चुनाव की बिसात बिछानी शुरू कर दी. यूपी में बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को अंजाम देने का काम खुद अमित शाह और यूपी के प्रभारी और पीएम नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र ओम प्रकाश माथुर कर रहे हैं.

नकवी को नहीं मिला राज्यसभा का टिकट-
जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ही मुख्तार अब्बास नकवी को झारखंड से राज्यसभा भेजा जा रहा है. उनकी जगह शिव प्रताप शुक्ला को लाया गया जो यूपी बीजेपी में एक पुराने ब्राह्मण चेहरे हैं. क्योंकि बीजेपी के सोशल इंजीनियर्स ये अच्छे से जानते हैं कि चुनावों में BJP को मुस्लिम वोट न के बराबर मिलेगा. नकवी को यूपी से राज्यसभा भेजने से बीजेपी के कोर वोट बैंक में ठीक संदेश नहीं जाता. इसका असर यूपी चुनाव के नतीजों में दिखाई देता.

जिला अध्यक्ष में भी पिछड़ी जातियो को तरजीह-
इसलिए इस बार जिला अध्यक्ष बनाते हुए पार्टी ने जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखा. पिछले 20 सालों में यूपी 80 प्रतिशत से 90 प्रतिशत जिला अध्यक्ष ब्राह्मण और ठाकुर ही बनाए जाते थे. इस बार 94 जिला अध्यक्षों और नगर अध्यक्षों में से 44 पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति से, 29 ब्राह्मण, 10 ठाकुर, 9 वैश्य और 4 दलित समाज से हैं. बीजेपी ने जिस तरह से 2010 में नीतीश कुमार के साथ मिलकर बिहार में महादलित राजनीति के आधार पर जिस तरह से लालू यादव की RJD और रामविलास पासवान की लोकजन शक्ति पार्टी के गठबंधन का बिहार से पूरा सूपड़ा साफ कर दिया था, और इन नेताओ में भी आपसी रंजिश पैदा हुई थी, कुछ इसी तरीके से जातिगत समीकरणों का गुणा-भाग के जरिए बीजेपी यूपी में जीत का परचम लहरना चाहती है.

प्रदेश में यादव, जाटव (चमार)और मुस्लिम मिलाकर 35 प्रतिशत हैं. वहीं बीजेपी की नजर बाकी 65 प्रतिशत पर है. बीजेपी के सोशल इंजीनियर्स को लगता हैं पिछड़ी और अगड़ी जातियों के समन्वय के आधार पर BJP का कमल खिल सकता है.

निषाद और दलित जातियों पर डाले जा रहे हैं डोरे
बीजेपी ने इस बार मायावती (बसपा) के वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी अभी से शुरू कर दी हैं. कानपुर से लेकर वाराणसी तक ज्यादातर विधानसभाओं में लगभग 10 हजार से 15 हजार तक निषाद जाति का वोट है. इसलिए बीजेपी निषाद जाति के नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है. इसकी शुरुआत बीजेपी ने बीएसपी से सीट ना मिलने से नाराज राम भुआल निषाद को पार्टी में लाने के लिए उनसे बातचीत शुरू भी कर दी है. बीजेपी ने यूपी के निषाद और दलित जातियो में पैठ रखने वाले नेताओं पर डोरे डालने भी शुरू कर दिए हैं.

छोटी जातियों का बड़ा नेटवर्क-
बीजेपी ने छोटी-छोटी अति पिछड़ी जातियों को अपनी तरफ खींचना भी शुरू कर दिया है. जैसे कि राजभर जाति का देवरिया, बलिया, आजमगढ़, सलेमपुर और गाजीपुर समेत कई अन्य जिलों की विधानसभा सीट में प्रभाव है. इन विधानसभाओं में राजभर समाज के 30 हजार से 40 हजार तक वोट हैं. राजभर समाज की यूपी चुनाव में अहमियत को समझते हुईं अमित शाह ने पिछले साल वाराणसी में राजभर समाज की रैली को संबोधित किया था. बीजेपी चुनाव से पहले अशोक राजभर की पार्टी भारतीय समाज पार्टी का विलय बीजेपी में करना चाहती है या फिर 10 सीटें देकर उनके साथ गठबंधन करने की फिराक में है.

बसपा के बौद्ध समुदाय में सेंधमारी-
बीएसपी के कोर वोट बैंक में सेंध मारने के लिए बौद्ध भिक्षुक की ब्रहम् चेतना यात्रा की शुरुआत गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने वाराणसी से 24 अप्रैल को हरी झंडी दिखाकर की थी. ये ब्रह्म चेतना यात्रा अक्टूबर तक पूरे यूपी में 130 विधानसभाओं में जाएगी. हर विधानसभा में यात्रा का स्वागत बीजेपी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता करेंगे.

गठबंधन की बदौलत पूर्वांचल पर कब्जे की तैयारी
इन सबके दूसरी तरफ यूपी की एक और पिछड़ी जाति की पार्टी अपना दल के साथ बीजेपी का पहले से ही गठबंधन हैं. प्रतापगढ़, जौनपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और मिर्जापुर में आने वाली लगभग 30 विधानसभा सीटों में अपना दल का अच्छा खासा प्रभाव है. बीजेपी को लगता है कि इन छोटी-छोटी पार्टियों के साथ आने से पूर्वांचल और वाराणसी से सटे जिलों की 110 से 120 सीटों पर बीजेपी इतनी मजबूत हो जाएगी कि उसे हरा पाना हर किसी के लिए दूर की कौड़ी होगा.

शाह और राजनाथ करेंगे रैलियां
केंद्र सरकार के दो साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहारनपुर में रैली कर चुनाव का बिगुल बजा दिया है. अमित शाह ने इलाहाबाद में दलित परिवार में भोजन करने के बाद कुर्मी समाज की रैली को संबोधित किया अगले एक महीने में अमित शाह को 6 कार्यकर्त्ता समेलन करने हैं. 4 जून को कानपुर में बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन और इसके बाद लखनऊ में भी इस तरह का समेलन करेंगे. गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी पूरे यूपी में 6 पब्लिक मीटिंग करेंगे. राजनाथ सिंह 5 जून को अमरोहा में और 9 जून को मऊ में रैली को संबोधित करने वाले हैं.

उज्ज्वला स्कीम की योजना का मिलेगा सीधा फायदा
इस चुनाव में बीजेपी की कोशिश रहेगी कि उज्ज्वला स्कीम के तहत हर विधानसभा में 7 हजार से 8 हजार तक गैस कनेक्शन दिसंबर के अंत तक गरीब परिवारों को दे दिए जाएं. सांसदों और बीजेपी विधायकों की सिफारिशी चिट्ठी पर इसे देने से सीधा संपर्क बनाने की योजना है. बीजेपी का मानना है कि विधानसभा चुनाव में उन्हें इसका फायदा मिलेगा.

CM उम्मीदवार पर तस्वीर साफ नहीं-
BJP ने यूपी विधानसभा जीतने के लिए तैयारी तो शुरू कर दी है पर अभी तक मुख्यमंत्री कौन होगा ये तय नहीं किया है. 
मुख्यमंत्री पद के लिए स्मृति ईरानी और महेश शर्मा सबसे अधिक लालायित है लेकिन BJP का युवा तबका और संत समुदाय गोरखपुर के योगी आदित्यनाथ को चाहता है अगर भाजपा UP जीतती है तो राम मंदिर निर्माण कराना भी CM की जिम्मेदारी होगी ऐसे में संत समुदाय योगी को ही पसंद कर रहा है, पूर्व CM राजनाथ सिंह के मन में भी CM बनने के लड्डू फुट रहे है तभी ने सहारनपुर की रैली में राजनाथ ने कहा था कि 14 साल बाद यूपी में बीजेपी का वनवास खत्म होगा,
अब अंतिम फैसला मोदी -अमित शाह और RSS के उच्च पदाधिकारियों को करना है।

लगेगी असम की टीम और मिडिया प्रबंधन-
इस चुनाव को अपनी असली शक्ति परीक्षा मान रही BJP मीडिया के हर तबके चाहे वह प्रिंट हो या ऑनलाइन या सोशल मिडिया का भी पूरा सहयोग लेगी, वॉर रूम में हर मीडिया ग्रुप का पूरा ब्यौरा रखा जा रहा है ताकि कोई लगत प्रचार न होने पाए साथ ही असम चुनाव में प्रमुख भूमिका निभाने वाले रणनीतिकार भी उत्तर प्रदेश पहुचने वाले है।

TheLogicalNews
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