लखनऊ
आज है विश्व गौरैय्या दिवस
आज आपको याद दिला दें अपने बचपन की जब आप सुबह जागते और इक छोटी सी चिड़िया चींची कर आप के आसपास दाना चुगती नजर आती थी,
ये गौरैया छोटे बच्चे हो या बड़े सभी के जीवन में आनंद के रूप में थी पर अब गौरैया खतरे में है इसका कारण है की हमने अपने लिए बड़े बड़े कंक्रीट के घर और शहर बना लिए पर उस छोटी सी जान के घर हमने खत्म कर दिए,
गांव और कच्चे घरोँ में छप्पर या घास के झुरमुट में अपना नन्हा घोसला बना कर रहने वाली गौरिया को अब रहने को जगह नहीं है और वो ख़त्म हो रही है।
इनको बचाने को आपको कोई बड़ी मेहनत नहीं करनी है, बस इक कागज का डब्बा या छोटी डलिया अपने घर के बरामदे में या बाहर टांग दें , आप देखेंगे की कुछ दिन में गौरैया इसमें अपना घर बना लेगी
वो नन्ही सी आपकी दोस्त जिसने कई बार चींची करके आपको रोते से हंसाने का उपहार दिया है की आज सक्षम होने पर आप इतनी मदद अवश्य करे।
पूर्वज कहते थे की जिस घर में गौरैया अपना घोसला बनाती है उसमे सुख और शांति रहती है और रोग नहीं रहते , पर आजके बड़े बड़े शहरों के ऊँचे मकानों में गौरैया नहीं बल्कि रोग, दुःख और अशांति रहती है।
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TheLogicalNews
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