19.3.16

One more bail in sedation case demands strict laws in this respect


 JNU के कम्युनिस्ट क्षात्र नेता कन्हैया कुमार और भारत के टुकड़े करने की कसम खाने वाले उमर खालिद और इक के बाद अब DU के पूर्व प्रोफेसर SRS गिलानी को दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को ज़मानत दे दीहै PTI ने खबर दी ।

गिलानी पर आरोप है कि उन्होंने संसद पर हमले के दोषी अफज़ल गुरु की बरसी पर दिल्ली के प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम आयोजित किया था, कार्यक्रम में कथित तौर पर अफ़ज़ल गुरु के समर्थन में और भारत विरोधी नारे लगाए गए थे.

दिल्ली पुलिस ने ये कहते हुए गिलानी का ज़मानत का विरोध किया कि प्रेस क्लब में कार्यक्रम 'भारत की आत्मा पर हमला' था और ये 'अदालत की अवमानना' है. अदालत ने गिलानी का पासपोर्ट जप्त कर 50000 रुपये का निजी मुचलका जमा करने और इक जमानतदार उपलब्ध करवाने का भी आदेश दिया।

वहीं गिलानी के वकील सतीश टमटा ने दावा किया कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है कि गिलानी ने भारत विरोधी नारे लगाए या अन्य लोगों से ऐसा करने को कहा, गिलानी का दावा हैकि ये कश्मीर पर चर्चा के लिए बुलाई गई बुद्धिजीवियों की एक बैठक थी.

कन्हैया कुमार और इन सभी  के आसानी से रिहा होने की घटनाएं और ऐसे नारे लगाने वालों की भारत की मीडिया और नेताओं द्वारा मिल रही तवज्जो भविष्य में युवाओं को इसी और प्रेरित करेगी , देश के बुद्दिजीवियों और नेताओ- मीडिया को देशद्रोही सोच रखने वालों से दूरी रखनी चाहिए ।

भारत में देशद्रोह के संबंध में कोई खास कानून नहीं है जिसके कारण लोग ऐसा करने से डरे, ऐसे में सरकार को सीघ्र ही कोई शख्त कानून लाना चाहिए ।
 -TheLogicalNews
(stay updated)

 

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