लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा के 3 सीटोँ हेतु 12 फरवरी को हुए उपचुनाव के आज आये परिणामों ने सपा के नेताओं की नींद उड़ा दी है,
ये तीनों बीकापुर, देवबंद और मुज़फ्फरनगर सीटेँ सपा के ही विधायकों की मृत्यु से खाली हुई थी पर देवबंद और मुज़फ्फरनगर मे से सपा को हार का मुह देखना पड़ा, सिर्फ बीकापुर सीट 6 हजार के अंतर से मुश्किल से जीत पाई सपा।
मुज़फ्फरनगर में BJP और सबसे आश्चर्यजनक देवबंद में कांग्रेस ने बाजी मार ली,
गाजियाबाद में मेयर पद पर भी BJP भारी अंतर से जीती
गाजियाबाद में मेयर पद पर भी BJP भारी अंतर से जीती
इन उपचुनाओं के मायने बड़े है क्योंकि 10 महीने बाद ही इस प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले है जोकि BJP-SP और BSP तीनों का भविष्य तय करेंगे, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने नए बजट में हर वर्ग को खुश करने का प्रयास किया है,
देवबंद से सपा की हार के कई मायने है, ये देश भर के सुन्नी मुस्लिम का गढ़ है,साथ ही वहावी मत का प्रमुख केंद्र है यहाँ काँग्रेस का जीतना साफ़ सन्देश दे रहा की मुसलमान सपा से नाराज है और वो किसी अन्य विकल्प की तलाश में है पर उसका विकल्प बसपा,कांग्रेस या MIM में से कौन बनेगा ये देखना होगा।
पार्टी पर अधिक यादव तुस्टिकरण का भी आरोप लगता रहा है जिसकी वजह से मुस्लिम परम्परागत वोटर सरकार से नाराज है, कई नेताओँ का कहना है की हर जिले में यादव ही सारे प्रभावशाली पदों पर हैं मुस्लिम वोट दे कर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
पार्टी के नेताओ मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर कई बार सपा प्रमुख मुलायम सिंह भी सवाल उठा चुके है और BJP भी योगी आदित्यनाथ जैसे पूर्वांचल के दमदार नेता को आगे करके चुनाव लड़ने का मन बना रही है ऐसे में पार्टी से टूटते मुस्लिम और विरोध में एकजुट होते हिन्दू सपा की 2017 की राह कठिन कर सकते है।
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