अमर शहीद भगत सिंह
अमर शहीद भगत सिंह की बेगुनाही शाबित करने के लिए 85 साल बाद लाहौर की हाई कोर्ट ने फिर से सुनवाई शुरू की ।
लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इज़हरुल हसन ने जस्टिस खालिद मो. खान की अध्यक्षता में 3 जजों की बड़ी बेंच पर सुनवाई शुरू की है, भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के वकील इम्तियाज़ राशिद कुरैशी ने नवम्बर 2014 में हाई कोर्ट में पेटेटशन फ़ाइल कर इस मामले के पुनरावलोकन का आग्रह किया था,
भगत सिंह के ऊपर तत्कालीन SSP और जलियांवाला बाग के गुनहगार सांडर्स की हत्या का आरोप ब्रिटेन की सरकार ने लगाया था, और दर्ज की गई FIR में 3 अज्ञात लोगोँ का जिक्र किया गया था और भगत सिंह के 450 गवाहों और वकीलों की दलील को सुने बिना उनको फाँसी की सजा देकर अन्याय किया था
स्मरणीय है की इसी अदालत ने 23 मार्च 1931 को इक पुलिस अधिकारी की हत्या के जुर्म में भगत सिंह और उनके 2 साथियो को मौत की सजा दी थी, इसलिए यही अदालत भगत सिंह की बेगुनाही भी सिद्ध करेगी, इससे पहले 2011 में भी इक छोटी बेंच ने इस विषय में सुनवाई की थी पर फैसला देने में असमर्थता जाहिर करते हुए इस मामले कक बड़ी बेंच को रेफर कर दिया था।
इस केस के फिर से खुलने से और अदालती बेगुनाही साबित होगी साथ ही ब्रिटेन और उनकी न्याय व्यवस्था के मुह पर इक तमाचा होगा,भगत सिंह और उनके क्रन्तिकारी जीवन के बारे में जानने को पढ़ेhttps://en.m.wikipedia.org/wiki/Bhagat_Singh
अमर शहीद भगत सिंह की बेगुनाही शाबित करने के लिए 85 साल बाद लाहौर की हाई कोर्ट ने फिर से सुनवाई शुरू की ।
लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इज़हरुल हसन ने जस्टिस खालिद मो. खान की अध्यक्षता में 3 जजों की बड़ी बेंच पर सुनवाई शुरू की है, भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के वकील इम्तियाज़ राशिद कुरैशी ने नवम्बर 2014 में हाई कोर्ट में पेटेटशन फ़ाइल कर इस मामले के पुनरावलोकन का आग्रह किया था,
भगत सिंह के ऊपर तत्कालीन SSP और जलियांवाला बाग के गुनहगार सांडर्स की हत्या का आरोप ब्रिटेन की सरकार ने लगाया था, और दर्ज की गई FIR में 3 अज्ञात लोगोँ का जिक्र किया गया था और भगत सिंह के 450 गवाहों और वकीलों की दलील को सुने बिना उनको फाँसी की सजा देकर अन्याय किया था
स्मरणीय है की इसी अदालत ने 23 मार्च 1931 को इक पुलिस अधिकारी की हत्या के जुर्म में भगत सिंह और उनके 2 साथियो को मौत की सजा दी थी, इसलिए यही अदालत भगत सिंह की बेगुनाही भी सिद्ध करेगी, इससे पहले 2011 में भी इक छोटी बेंच ने इस विषय में सुनवाई की थी पर फैसला देने में असमर्थता जाहिर करते हुए इस मामले कक बड़ी बेंच को रेफर कर दिया था।
इस केस के फिर से खुलने से और अदालती बेगुनाही साबित होगी साथ ही ब्रिटेन और उनकी न्याय व्यवस्था के मुह पर इक तमाचा होगा,भगत सिंह और उनके क्रन्तिकारी जीवन के बारे में जानने को पढ़ेhttps://en.m.wikipedia.org/wiki/Bhagat_Singh

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