स्वाती सिंह
स्वगोषित देवी मायावती को जमीन दिखा दी इक साधारण स्त्री SwatiSingh ने
पूर्व BJP नेता दयसंकर सिंह द्वारा दिए गए बयांन से सियासी भूकंप तो आया पर इस मामले में राजनैतिक फायदा लेने का मायावती का मंसूबा कामयाब न हो सका,
मायावती ने दयाशंकर के ऊपर SC-ST एक्ट में मुकदमा दायर करवाया,खुद को दलितों की देवी कहा, उनके कार्यकर्ताओ ने प्रदर्शन कर दयाशंकर के परिवार को गाली दी, मायावती जी का ये प्रयास यूपी में राजनीति और मीडिया से अलग-थलग पड़ी बसपा को मुख्य धारा में लाने का था पर इक माँ और घर चलाने वाली गृहणी इस स्वघोषित देवी के सामने डट कर खड़ी हो गई और वो थी दया शंकर की पत्नी और इक बेटी को माँ स्वाती सिंह
स्वाती को सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया का खुल कर समर्थन मिल रहा है और इसने बसपा की स्वघोषित देवी मायावती का राजनैतिक सपना ध्वस्त कर दिया, मायावती की सोशल इंजीनियरिंग धरी रह गई, मायावती और नसीमुद्दीन पर मुकदमा हुआ,
पहली बार कार्यकर्ता के लिए सामने आई BJP-
स्वाति सिंह द्वारा मायावती से मोर्चा लेने पर बीजेपी भी खुलकर उनके साथ आई और 23 जुलाई को *बेटी के सम्मान में बीजेपी मैदान में* नारे के साथ धरना प्रदर्शन किया, अबतक परेशानी में फसे कार्यकर्ताओ को छोड़कर आगे बढ़ने की रणनीति रही है बीजेपी की
मायावती बैकफुट पर
खुद को दलितों की देवी कहने वाली बहन कुमारी मायावती को अब OBC- सवर्ण वोट हाथ से जाता दिख रहा है ऐसे में अपने नेताओ को मायावती ने डांट पिलाई और सरे प्रदर्शन रद्द कर दिए , सफाई भी देनी पड़ी ।
मायावती द्वारा SC-ST एक्ट के दुरूपयोग का भी उठ रहा मुद्दा-
मायवती ने अपने को अपशब्द कहने वाले दयाशंकर के ऊपर SC ST एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत करवाया था जबकि वाही अपशब्द स्वाती की बेटी के लिए प्रयोग करने वाले नसीमुद्दीन और मायावती के लिए IPC में मुकदमा हुआ है, लोगो का कहना है की या तो SC ST एक्ट हटाया जाए या मायावती और नसीमुद्दीन के ऊपर POSCO एक्ट के तहत कारवाही हो क्योंकि स्वाती को बेटी 12 साल से कम उम्र को है ।
इक परिचय-
देवरिया के इक सामान्य क्षत्रिय परिवार की बेटी स्वाती लख़नऊ विश्विद्यालय की क्षात्रा रही, स्वाती सिंह ने दयाशंकर से विश्वविद्यालय के दौरान ही विवाह किया था और राजनीति में लगे रहने के कारण स्वाती की दयसंकर से कम पटती थी और अपनी बेटी, सास व परिवार के साथ आशियान लख़नऊ में रहती है स्वाती।
कैसे स्वाती सिंह प्रकरण ने बदली यूपी की राजनीती-
मायावती को रैदास( जाटव, अथवा चमार) जाती का वोट बैंक है जो की अन्य दलित जातियो से खुद की खास और बसपा का कैडर समझता है ये यूपी में 5% के आसपास है पर ब्राम्हण , मुस्लिम व् अन्य दलितों के साथ आने पर मायावती 2007 में चुनाव जीती थी,
इस प्रकरण में स्वाती भले की ब्राम्हण ना हों पर सामाजिक स्तर पर ब्राह्यण व क्षत्रिय आपस में वैसे ही है जैसे मोती और धागा, सोशल मीडिया में ये जंग रैदास Vs सवर्णो और OBC की बन गई है जोकि बसपा की सोशल इन्जीनीरिंग को परवान नहीं चढ़ने देगे और परिणाम होगा बसपा का 1990 के दशक में लौटना जब वो हर सीट पर वोट पाती थी पर जीतना कम ही होता था ।
-TheLogicalNews
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