19.7.16

सावन में इन उपायों से करे भगवान शिव को प्रसन्न, कुछ सरल प्रयोग


भगवान् शिव को 5 का अंक और पांचवा महीना प्रिय है जिसे सावन कहते है, साथ ही शिव जल का भी स्वरुप हैं और सावन का महीना पथ्वी पर जीव व वनस्पति के उत्तपत्ति का भी कारण है जोकि प्रकति रूप पृथ्वी व जल रूप ईश्वर (पुरूष) के मिलन का भी प्रतीक है,
इसीलिए मान्यता है की इस महीने में प्रकृति और ईश्वर प्रसन्न होकर साधको को मनचाहा वर प्रदान करते है,

जानिए भगवान शिव जो की अवढर दानी और भोले है को किन तरीकों से प्रसन्न कर आप पा सकते है अपना मनचाहा वरदान-

मनोकामना सिद्दी-
सावन में रूद्र अष्टाध्यायी जिसे नमक चमक भी कहते है का पाठ और साथ में गाय के दूध से रुद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती है, ऐसा करके  करोडो लोगो ने आज तक भगवान शिव से अपना अभीष्ट प्राप्त किया है , आप भी करिये ।

शिव कृपा-
सावन में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से 'ऊं नम: शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं. इस एक उपाय से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी.

ऊपरी प्रभाव घर में होतो-
अगर घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सावन में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करने के साथ ही गुग्गुल धूप जलाएं.

शीघ्र विवाह हेतु- 
विवाह में आ रही अड़चन दूर करने के लिए सावन में रोज शिवलिंग पर केसर मिला दूध चढ़ाएं. इससे विवाह के योग जल्दी बनते हैं. 

नंन्दी पूजन व गौसेवा-
सावन में रोज नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा.

अन्न धन भरपूर रहे-
सावन में गरीबों को भोजन कराने से आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और साथ ही पितरों को भी शांति मिलती है.

मानसिक शांति व आनंद प्राप्ति-
सावन में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निपट कर मंदिर जाएं और भगवान शिवका सामान्य जल या गंगा जल से अभिषेक करने के साथ ही काले तिल अर्पण करें. इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में 'ऊं नम: शिवाय' मंत्र का जाप करें. इससे मन को शांति मिलेगी.

धन वृद्धि व उन्नति--
केतु ग्रह उन्नति का कारक गृह होता है जोकि प्रभु शिव का सेवक है शिव जी की सेवा से केतु प्रसन्न होकर उन्नति देता है, करिये ये प्रयोग-
"सावन में किसी नदी या तालाब जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं और साथ ही साथ मन में भगवान शिव का ध्यान करते रहें." यह धन प्राप्ति का सबसे आसान उपाय है.

 लक्ष्मी प्रति हेतु अनुभूत प्रयोग- 
सावन के महीने में किसी भी दिन घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करें और उसकी यथा विधि पूजन करें. इस दौरान इस मंत्र का 108 बार जाप करें -
"ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं"
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं. बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें. अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें और इसे घर के पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन पूजा करें. 

संतान प्राप्ति-
सावन में किसी भी दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव का पूजन करें. इसके पश्चात गेहूं के आटे से 11 शिवलिंग बनाएं और प्रत्येक शिवलिंग का शिव महिम्न स्त्रोत से 11 बार जलाभिषेक करें.
इस जल का कुछ भाग प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें. गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें. इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें. 

रोग नाश -
सावन में किसी सोमवार को पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करने से बीमारियां दूर होती हैं. अभिषेक के लिए तांबे के बर्तन को छोड़कर किसी भी धातु का उपयोग किया जा सकता है.

Issued exclusively for TheLogicalNews by 
Institute of tantrik research and healing, Varanasi.

- TheLogicalNews
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