*LogicalNews Learning Series In Association With The Economist*
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*China Plus One: कैसे दुनिया अपनी फैक्ट्री का नक्शा बदल रही है*
दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक समय ऐसा था जब manufacturing का मतलब लगभग एक ही देश से था—China। पिछले दो दशकों में वैश्विक विनिर्माण का लगभग 28–30% हिस्सा चीन के पास रहा, और इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल व मशीनरी जैसी कई सप्लाई चेन पूरी तरह उसी पर निर्भर हो गईं। लेकिन कोविड-19 महामारी, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और सप्लाई चेन के बार-बार टूटने ने कंपनियों को यह सोचने पर मजबूर किया कि इतनी अधिक निर्भरता एक बड़ा जोखिम है।
इसी संदर्भ में “China Plus One” रणनीति सामने आई, जिसमें कंपनियां चीन को छोड़ नहीं रहीं, बल्कि उसके साथ एक या अधिक वैकल्पिक देशों में उत्पादन फैला रही हैं।
अब यह बदलाव सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर दिखाई देने लगा है। 2020 के बाद से बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने Vietnam, Mexico और India जैसे देशों में निवेश तेज किया है। उदाहरण के तौर पर, Vietnam का global exports में हिस्सा 2015 के लगभग 1.5% से बढ़कर 2023 में 3% के आसपास पहुंच गया, जबकि Mexico अमेरिका के लिए सबसे बड़ा trading partner बन गया है।
कंपनियां अब “Just in Time” मॉडल से हटकर “Just in Case” मॉडल अपना रही हैं, जहां efficiency से ज्यादा resilience पर जोर है। इसका मतलब है कि production कई देशों में फैलेगा, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर पूरी supply chain प्रभावित न हो।
*China + One से भारत को क्या फायदा हो सकता है*
भारत इस बदलाव के केंद्र में खड़ा है। यहां की युवा workforce, बड़ा घरेलू बाजार और सरकार की Production Linked Incentive (PLI) जैसी नीतियां इसे एक मजबूत विकल्प बनाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में mobile manufacturing में तेज वृद्धि हुई है और electronics exports भी लगातार बढ़े हैं। फिर भी चुनौतियां स्पष्ट हैं—logistics लागत अभी भी GDP का लगभग 13–14% है, जो विकसित देशों की तुलना में अधिक है, और policy execution में consistency की जरूरत है। अगर भारत इन बाधाओं को कम कर पाता है, तो वह सिर्फ एक वैकल्पिक केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख स्तंभ बन सकता है।
*Logicalnews Insights*
दुनिया की यह नई दिशा यह संकेत देती है कि globalisation खत्म नहीं हो रहा, बल्कि उसका स्वरूप बदल रहा है। अब ताकत उस देश के पास होगी जो केवल सस्ता उत्पादन नहीं, बल्कि भरोसेमंद और स्थिर सप्लाई भी दे सके। “China Plus One” दरअसल एक आर्थिक रणनीति से अधिक, एक नए वैश्विक संतुलन की शुरुआत है—जहां efficiency के साथ-साथ सुरक्षा और विविधता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी है।
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