1.6.17

UP में बिगड़ती कानून व्यवस्था और दंगे एक संयोग या CM योगी के खिलाफ बड़ी साजिश ।

लख़नऊ

19 मार्च को योगी आदित्यनाथ के CM पद की शपथ लेने के बाद से  प्रदेश में कई जगह धार्मिक व ठाकुर- दलित संघर्ष , बढ़ते रेप, छेड़छाड़ की खबरें आती  रही है, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, रामपुर संभल सहित पश्चिम के जिलो में बार बार ऐसी खबर आती रही है जिनमे सबसे उल्लेखनीय सहारनपुर अलीगढ़ और सम्भल है जहाँ छोटी छोटी बातों पर पैदा हुआ संघर्ष विकट रूप धारण कर गया और पत्थरबाजी, आगजनी और पुलिस पर फायरिंग हुई कई जाने गई

इन सभी मामलों में ध्यान देने वाली बात ये है कि इनका केंद्र जातीय और धार्मिक रूप से संवेदनशील रहा पश्चिमी यूपी है जोकि चुनावी और भूराजनैतिक रूप से बहुत प्रभावशाली है कहते है कि पश्चिम यूपी से चली हवा ही पूरे प्रदेश में बहती है जहाँ पर ऐसी घटनाएं होना सबकुछ ठीक होने की सूचना  नही देती, साथ ही ये सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या ये सब संयोग है या कोई सुनियोजित साजिश, देखें इसके पहलू पर-

BJP के विरोधी दलों की स्थिति- 

वर्तमान में यूपी की आम जनता में BJP के विरोधी दलों बसपा सपा कांग्रेस की कोई खास पकड़ और सम्मान नही ही अतिशय जातिवाद या अल्पसंख्यकवाद के कारण तीनो ही बदनाम है, जाटव( चमार) बसपा यादव सपा और कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी बन कर रह गई हैं, जो कुल वोटर्स का 32% है, जोकि पूरा इन दलों के साथ नही है, 

विश्वसनीयता खोना ही शायद वो कारण था कि UP की जनता के सर आंखों पर रहे विपक्षी दल विधानसभा में  78 सीट पर आ गया है।इसका अर्थ है कि विपक्षी दल सदन या सड़क पर फिलहाल योगी सरकार का विरोध करने की स्थिति में नही है।


कानून व्यवस्था की खराबी का बढ़ता ग्राफ

गौरतलब है की 2017 के चुनाव में BJP ने खराब कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को चुनाव के केंद्र बिन्दु में रखा था, चाहे गायत्री प्रजापति हो या बुलंदशहर कांड सबमे भाजपा और मीडिया ने सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया था और जनता ने महसूस भी किया कि कानून व्यवस्था खराब है अमूमन तो FIR दर्ज ही नही होती है और अगर दर्ज हुई तो कोई कार्यवाही नही होती थी, जिसके फलस्वरूप सपा- बसपा की बुरी हार हुई, दोनी ही पार्टिया अपना वजूद बचने को साथ आ चुकी है,
जबसे BJP की सरकार आई है सभी तरह के अपराध भी एकदम से बढ़े है चाहे जेवर कांड हो या सहारनपुर, या संभल या अलीगढ़ या या रामपुर कांड सबमे सरकार की भद्द पिटी, महिलाओं के प्रति भी अपराधों में बाढ़ आ गई है लोग अब भाजपा के शाशन पर सवाल उठाने लगे है ।

क्यों बढ़ते जा रहे अपराध-

1. पुलिस रिपोर्टिंग - जबसे योगी आदित्यनाथ ने CM पद संभाल है उनके सख्त निर्देश है कि थाने में आए हुए व्यक्ति की शिकायत अवश्य सुनी जाय और FIR दर्ज हो इसका असर ये हुआ कि पीड़ित पक्ष अब थाने जाने की हिम्मत कर रहा है और उसकी शिकायत दर्ज भी की जा रही है, चाहे मुकदमा झूठा ही क्यों न हो पर दर्ज तो होगा है जब NCRB की आप लिस्ट देखेने तो यही लगेगा कि अपराध बहुत बढ़ने लगा पर उसकी सच्चाई तो बाद में सामने आती है, मुख्यमंत्री योगी का ये प्रयास कुछ दिन भले ही बदनामी दे पर आगे इसके अच्छे परिणाम जनता के हित में आएंगे।

2. हो सकती है राजनीतिक साजिश भी - 

आपको याद होगा जब मायावती की सरकार आई थी 2003 में तब UP में अचानक मुँहनोचवा, मुडकटवा और ऐसे ही कई चमत्कारी तत्व उपस्थित हो गए थे जिनसे जनता और शाशन हिल गया असंतोष इतना बढ़ा की हाहाकार मचा और बसपा सरकार गिरी, कुछ ऐसी ही तैयारी शायद इस बार भी रही होगी पर पूरी तरह कामयाब नहीं हो पा रही, CM योगी ने भी कई बार कहा है कि कुछ विरोधी दलों के कार्यकर्ता केसरिया गमछा डाल कर अपराध कर रहे हैं ताकि योगी और BJP बदनाम हो खासकर योगी का संगठन हिन्दू युवा वाहिनी बदनाम हो और जनता में मुख्यमंत्री योगी की छवि खराब हो, क्योंकि योगी ठाकुर है इसलिए ठाकुरों से हुए संघर्ष भी बड़ा राजनीतिक रूप रख लेते है।


आज के परिपेक्ष्य में जब सोशल मीडिया इतना तेज है और जनता स्वयं जागरूक है तब ये अपराधी तत्व कितना सफल हो पाएंगे हमारी टीम के रिसर्च में एक बात सामने आई है कि अपराधी योगी सरकार में कुण्ठा ग्रस्त हो चुका है और इसलिए भी हो सकता की अपराध बढ़ रहे हो पर इसमे कही से सरकार या पुलिस की ढिलाई नही दिखाई पड़ी, इसे में इन परिस्थितियों को मुख्यमंत्री और UP पुलिस कैसे निपटेगी इसपर LogicalNews की नज़र रहेगी।


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