भोपाल
मध्य प्रदेश के मन्दसौर जिले में 6 जून को आंदोलनरत किसानों पर पुलिस की गोली से 5 किसानों की मौत हो गई इसके बाद मुख्यरूप से माल्वा इलाके के 9 जिलों मंदसौर, नीमच, खरगौन, देवास, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, और बडवानी में प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह में आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव किया. गुरुवार को लगातार तीसरे दिन वहां हिंसा का दौर जारी है, भाजपा पिछले 13 साल से मध्यप्रदेश में शाशन में है और जल्द चुनाव आने को है ऐजे में इस घटना के बाद जनमानस का बीजेपी से मोहभंग हो रहा है हमने इसकी जांच की।
विपक्ष ने पकड़ा मुद्दा-
6 जून को घटना के बाद तुरंत ही कांग्रेस के नेताओं ने मौके पर पहुँच कर मोर्चा संभाला साथ ही सोशल मीडिया में भी शिवराज के खिलाफ गुस्सा दिखने लगा, Twitter पर ट्रेंड करने लगा #शिवराज_का_शवराज , ज्योतिरादित्य सिंधिया ने CM को इन हत्याओं का दोषी ठहराया साथ ही कि किसान संगठन सरकार के विरोध में आ गए, आज राहुल गांधी भी मन्दसौर और नीमच पहुच रहे है
आंदोलनके कारण
किसान आंदोलन के बाद उग्र मालवा क्षेत्र के यूं उबलने की पीछे की वजह यह है कि इस क्षेत्र की इंदौर मंडी राज्य के बड़े बाजार में शुमार होती है और यहां के किसान ज्यादा संगठित हैं यह RSS का किसान संघ के साथ कई अन्य किसान यूनियन है जो किसानों के लिए संघर्ष करते है,
किसान कई साल से बढ़ते कर्ज और घटती फसल की कीमत से परेशान है, इलाके में मुख्य फसल प्याज है इस साल प्याज की फसल 1.5 रु/ किलो में बिक रही है जबकि 4 से 5 रु/किलो की लागत वाली प्याज की MSP शिवराज सरकार ने 6 रु/KG रखी इसी का विरोध हो रहा था।
शिवराज की अंध RSS भक्ति-
पिछले महीने नर्मदा यात्रा के दौरान शिवराज सरकार पूरे शबाब से दिखावे पर थी और प्याज की MSP बढ़ाने की मांग कर रहे किसानों की सुनने का उनके पास समय नही था, इंदौर में आंदोलनकारियों से मिलने को शिवराज आए पर सिर्फ RSS के संगठन किसान संघ के अपने चेलों से मिले और 8रु/KG की MSP की घोषणा करके चले गए, इसके अलावा अन्य संगठनों से बात करना मुनासिब नही समझा,
क्या चल रहा MP के लोगों में
लोगों में इस मामले को लेकर भारी रोष है,6 जून के दिन अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन करने वाले किसानों को असामाजिक तत्व बता कर DM ने गोली चलाने के आदेश दिए 5 लोगो की जान गई, विश्वस्त सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार RSS के किसान संघ के लोगों ने ही किसानों पर गोली चलवाने के लिए प्रशासन को उकसाया और सारा प्रकरण बड़े नेताओ की जानकारी में था,
विफल होता प्रशासन-
इस घटना के बाद MP का प्रशासन और सरकार कंफ्यूज है, पहले ग्रह मंत्री ने कहा पुलिस की गोली से मौत नही हुई फिर IG का बयान आया कि पुलिस की गोली से किसान मरे बदनामी होते देख शिवराज सिंह ने 1-1 करोड़ के मुआवजे की घोषणा कर दी पर लोगों के दिल मे लगी चोट भरी नही और अगले दिन DM और SHO की पिटाई हुई, फिर DM और SP का ट्रांसफर किया गया। अब शिवराज सरकार बैकफुट पर है और विपक्ष आक्रामक,
कांग्रेस नेता राहुल की गिरफ्तारी और जिस अंदाज में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बाते लोगों को भा रही है ये शिवराज सिंह के लिए अच्छा संकेत नहीं है, भारत का इतिहास साक्षी है कि किसानों की अनदेखी करने वाला देश पर राज्य नही कर पाया ये सच है कि शिवराज सिंह ने अपने शासन में किसानों की आय बढ़ाने के बहुत सार्थक प्रयास किये है और MP ने हर क्षेत्र में प्रगति की है पर कुछ गलत निर्णय भारी पड़ रहे हैं ,
इस समय भारतीय किसान यूनियन के नेता शिव प्रकाश शर्मा ने जिस तरह से सभी किसानों को एकजुट कर लिया ह ये दिखाता है कि हिल चुका है किला और इसको अगर बचाना है तो ठोस उपाय करने होंगे जो सभी को स्वीकार हो सिर्फ RSS या उसके संगठनों को नही, साथ ही अन्य प्रदेशों के लिए भी साफ संदेश है
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