हैदराबाद विश्वविद्यालय आज कल भारत की राजनीति का केंद्र बना है और उसकी वजह है इक दलित PH.D छात्र रोहिथ वेमुला की आत्महत्या जिसमे इक तरफ केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के नेता बंडारू दत्तात्रेय और VC का इस्तीफा माँगा जा रहा है तो दूसरी तरफ ओवैसी और AIMIM को इसका दोषी ठहराया जा रहा है इसकी सच्चाई जानने को हमने हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों से बात की जानिए क्या निकल के आया -
रोहित वेमुला पर हैदराबाद से हमारी रिपोर्ट-
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला ने रविवार रात फांसी लगाकर ख़ुदक़ुशी कर ली... जिस पर सेक्युलर बुद्धिजीवी , वामपंथी, राहुल गांधी, केजरीवाल सहित कई राजनितिक दलों ने विरोध किया है।
रोहित वेमुला सहित युनिवर्सिटी के 5 विद्यार्थीओं को होस्टल से निलंबित किया गया था, जिसकी संस्तुति बंगारू दत्तात्रेय जो केंद्रीय मंत्री और स्वयं दलित है ने VC से की थी आखिर क्यों-
उन 5 दलित विद्यार्थीओं ने आतंकी याकूब मेमन को फांसी ना देने के लिए कैंपस के अंदर आंदोलन किया था, अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) ने बडे बडे पोस्टर पर लिखा था ,
"घर घर से तयार होंगे और याकूब मेमन."
इस समय हैदरबाद विश्वविद्यालय वो जगह है जहाँ वामपंथी और मुस्लिम नेताओ खासकर ओवैसी का बहुत प्रभाव है इन लोगों ने दलित छात्रों को अपनी राजनितिक रोटी सेकने का एक माध्यम बना रखा हैं
रोहित वेमुला हैदराबाद युनिवर्सिटी में गौमांस भोज आयोजन करने में सबसे आगे था जबकि गौमांस भोज का कार्यक्रम ओवैसी प्रायोजित था।
याकूब मेनन को फांसी हो जाने के बाद रोहित और ASA ने याकूब को शहीद बताते हुए कई आंदोलन किये थे और अपने होस्टल के कमरे को "याकूब मेमोरियल हाल" बनाकर पेश किया और लोगो को याकूब को श्रधान्जली देने के लिए अपने कमरे में बुलाता था,
इसके सगठन "अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन" ने मुस्लिम संगठनो के साथ मिलकर याकूब की फांसी के विरोध में एक डाक्यूमेंट्री "मुजफ्फरनगर बाकी है " बनाई इस डाक्यूमेंट्री में मुसलमानो से मुज़फ्फरनगर का बदला लेने की बात कही गई है।
अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ASA) के ऐसे कार्यो का जब ABVP ने विरोध किया तो युनिवर्सिटी प्रसाशन ने छात्रों को तीन बार चेतावनी दी ..और उनके अभिभावकों को पत्र लिखकर सूचित किया गया की आपका बच्चा पढाई में नही बल्कि नेतागिरी और राष्ट्रविरोधी कार्यो मेंलिप्त रहता है ।
फिर भी जब सुधार नही हुआ तब पांच छात्रों को होस्टल से निकाल दिया गया
बाद में रोहित द्वारा ABVP के समर्थक छात्र नेताओ को पीटने की भी बात आई थी ।
इन सब घटनाओ के बाद यूनिवर्सिटी ने हास्टल से निलंबित कर दिया था, फिर निकाले जाने के बाद 5 दिन तक खुले में रहकर प्रदर्शन करने के बाद और ओवैसी की AIMIM से समर्थन ना मिलने पर इसने आत्महत्या की ।
ऐसे में हमारे नेताओ और जनता को ये सोचने की बात है की क्या रोहित वेमुला विश्वविद्यालयों में हो रही घातक छात्र राजनीति का शिकार हुआ है,
या इसका सम्बन्ध कही भी दलित होने से है लेकिन आखिर इसके पीछे जिम्मेदारी किसकी है,
बंगारू दत्तात्रेय की 'ओवैसी की या दलित के नाम पर चिल्लाने वाले नेताओ की ।
Exclusive report
TheLogicalNews

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