14.8.17

गोरखपुर त्रासदी पर LogicalNews की रिपोर्ट, डिम्पल यादव कनेक्शन, कमीशन का खेल और CM योगी के प्रति साजिश का परदा फाश


लख़नऊ

प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने जिले की 3 घंटे समीक्षा बैठक करके जानना चाहता था कि इंसिफेलाइटिस से जूझ रहे बच्चों  के इलाज में कोई कमी तो नही है, दवाएं और अन्य आवश्यक उपकरण मौजूद तो है? रोगियों को कोई दिक्कत तो नही आएगी, कोई कमी हो तो हमको अभी बताइए???

अस्पताल प्रशासन के इंचार्ज राजीव मिश्रा और DM राजीव रौतेला  ने पूरी तरह आश्वस्त कर दिया कि साहब आप तो लखनऊ जाओ इँहा हम संभाल लेंगे.. सब कुछ मौजूद है सही है चिंता की कोई बात नहीं

एक मुख्यमंत्री इससे ज्यादा क्या चाहेगा वो सिर्फ अपने अधीन लोगो से रिपोर्टिंग ही ले सकता है नाकि खुद सब चेक करने लगे इसके बाद भी CM योगी ने अस्पताल जाकर रोगियों का हालचाल लिया और इसेफिलाइटिस से होने वाली मौतें जिनसे वो 1978 से लड़ रहे है के विषय मे हिदायत देकर वापस चले गए

अब इस मामले में योगी जी को गलत बताने वाले लोग हमको बताएं कि इससे ज्यादा कोई CM क्या कर सकता है जब हर आदमी झूठ बोले।

साजिश की आती है बू

गैस सप्लाई करने वाली कम्पनी पुष्पा_सेल्स का मालिक मनीष भंडारी उत्तराखंड मूल से है जो लखनऊ में निवास करता है, डिम्पल_यादव (पूर्व में डिम्पल रावत) के परिवार से घनिष्ठ सम्बन्धो का लाभ उठाकर इसे कई अस्पतालों में गैस सप्लाई का ठेका मिला था जहां ये ओवर बिलिंग करके मनमाने बिल भेजकर कमीशन देकर भुगतान लिया करता था,
जब तक सपा सरकार रही तब तक इसका गोरखधंधा चलता रहा।

पर bjp सरकार बनते ही अस्पताल प्रशासन इसे सबक सिखाने के मूड में आ गया, अब अस्पताल प्रशासन के उच्चाधिकारियों द्वारा इससे ज्यादा कमीशन की मांग की गई और इसके बिल लटका दिए गए, और दूसरी कम्पनियों को ठेका देने की कवायद शुरू हो गयी।

कमीशन के झगड़े में 31 मार्च को इस मद का सारा बजट खर्च न होने के कारण लैप्स हो गया, जिससे कम्पनी का भुगतान लटक गया। और अब बढ़ते बढ़ते 69 लाख हो गया था,
पर मनीष भंडारी बड़ा सप्लायर था, मात्र 69 लाख के लिए बड़ी कम्पनी का मालिक सैंकड़ो बच्चों की जान नही ले सकता था!!

अब मुख्यमंत्री के अस्पताल दौरे के तुरन्त बाद जिस प्रकार अचानक से ऑक्सिजन सप्लाई बंद कर दी गयी और सैंकड़ो मासूमो की एक प्रकार से निर्मम हत्या कर दी गयी इसमे निश्चित रूप से कमीशन के झगड़े के साथ साथ राजनैतिक साजिश की भी बू आ रही है।।

इस मनीष भंडारी के राजनैतिक कनेक्शन की पूरी जांच कर साजिश का खुलासा होने बेहद जरूरी है और अस्पताल के प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्रा, मनीष भंडारी ,डीएम राजीव रौतेला, स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर इन्हें जेल में डालना जरूरी है।

ये आपराधिक negligence का केस है इसमें कठोर सजाएं देनी होंगी और छोटे कर्मचारियों को नही बल्कि उच्च पदाधिकारियों को नापना होगा....... क्योंकि बड़े अधिकारी एक हो छोटे को फंसवा देते है.
मीडिया का योगी विरोधी चेहरा सामने आया

CM योगी ने गलत तथ्य पेश करने वाले ठेकेदार व अन्यों के खिलाफ जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कह दिया गया है। यह भी पता चला है कि गैस ठेकेदार अखिलेश यादव के ससुराल पक्ष का जानकार है,CM योगी ने जो प्रेस से कहा उससे कुछ बातों का निष्कर्ष निकलता है, वह है:-

1) योगी सरकार के पास अस्पताल प्रशासन का बकाया वाला पत्र 4 अगस्त को पहुंचा था और उस पर तुरंत एक्शन लेते हुए सरकार ने एक दिन बाद ही 5 अगस्त को अस्पताल प्रशासन को गैस ठेकेदार के 68 लाख बकाए के एवज में 2 करोड़ रुपया जारी कर दिया था।

3) प्रिंसिपल यह पैसा दबा ले गया और उसने 68 लाख का बकाया 11 अगस्त को ठेकेदार को जारी किया, यानी रकम मिलने के 6 दिन बाद।

4) योगी स्वयं 9 अगस्त को वहां गये थे, लेकिन प्रिंसिपल ने बकाया का मुद्दा नहीं उठाया, क्योंकि उसे तो फंड मिल चुका था! वह झूठ बोल कर फंस जाता!

5) 9 अगस्त की बैठक के बाद प्रिंसिपल सीधे ऋषिकेश भाग गया, जो संदेह उत्पन्न करता है। उसे इसीलिए तत्काल बर्खास्त किया गया है।

6) लिक्विड आक्सीजन की आपूर्ति कुछ समय के लिए ठप हुई, हालांकि उस दौरान सिलेंडर आक्सीजन उपलब्ध था और उस दौरान किसी बच्चे की भी मृत्यु नहीं हुयी , बार-बार स्वयं मुख्यमंत्री व स्वास्थय मंत्री द्वारा औपचारिक बयान के बावजूद कि सिलेंडर की कमी से एक भी बच्चे की मौत नहीं हुयी; मीडिया द्वारा केवल इस पर जोर देना संदेह पैदा करता है!

7) हर साल अगस्त महीने में प्रतिदिन 19 से 22 बच्चों की मौत उस अस्पताल में होती रही है।
इसीलिए अगस्त में ही प्रिंसिपल द्वारा ठेकेदार के बकाए रकम की मांग सरकार को भेजना,
चिट्ठी के अगले ही दिन फंड रिलीज होने पर उसे दबा कर बैठ जाना, और सबसे बड़ी बात कि कुछ समय के लिए आक्सीजन सप्लाई में ठेकेदार द्वारा कोताही;
लगता है न्यूजमेकरों ने बड़ी साजिश के साथ जाल को बुना था!

डॉक्टर कफील की भूमिका संदिग्ध- 

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कई बच्चों की मौत के बाद जिस डॉक्टर कफील अहमद को हीरो बनाने की कोशिश हो रही है उनकी सच्चाई भी सामने आ रही है। मेडिकल कॉलेज से जुड़े कई लोगों ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर हैरानी जताई है जिनमें कफील को किसी फरिश्ते की तरह दिखाया गया है। जबकि सच्चाई बिल्कुल अलग है। डॉ कफील मोहम्मद बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफेलाइटिस डिपार्टमेंट के चीफ नोडल ऑफिसर हैं। वो मेडिकल कॉलेज से ज्यादा अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए जाने जाते हैं। आरोप है कि वो अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर चुराकर अपने निजी क्लीनिक पर इस्तेमाल किया करते हैं। न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक कफील और प्रिंसिपल राजीव मिश्रा के बीच गहरी साठगांठ थी और दोनों इस हादसे के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। लेकिन बच्चों की मौत के बाद उसने मातम मना रहे कुछ मां-बाप के पास खड़े होकर रोनी सी शक्ल बनाकर फोटो खिंचवा ली और अपने करीबी पत्रकारों की मदद से फर्जी खबरें छपवा दीं।

कफील की भूमिका की जांच जरूरी

मेडिकल कॉलेज के कई कर्मचारियों ने हमें बताया कि शुक्रवार को जब बच्चों की मौत की खबर पर हंगामा मचा तो कफील अपने प्राइवेट अस्पताल में थे। वहां से उन्होंने कुछ सिलेंडरों को अस्पताल भिजवा दिया। क्योंकि ये वो सिलेंडर थे जो वो खुद मेडिकल कॉलेज से चोरी करके ले गए थे। उन्होंने मीडिया को बताया कि इन सिलेंडरों का इंतजाम उन्होंने अपनी जेब से किया है। जबकि ऐसा कुछ नहीं था। एक डॉक्टर जो खुद परचेज कमेटी का मेंबर हो वो ऐसा करने के बजाय सरकारी तरीके से पहले ही सिलेंडर खरीद सकता था। दिन में भी जब मीडिया पहुंची तो बार-बार कफील ही बाहर आकर मीडिया से बात करने लगे। जबकि वो इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। बाकी डॉक्टरों का ध्यान बच्चों की देखभाल में था, लेकिन कफील का ध्यान मीडिया पर था। आखिरकार उन्होंने अपने बारे में झूठी खबरें प्लांट करके खुद को पूरे वाकये का हीरो बनवा ही लिया।

त्रासदी और उसके बाद सरकार की किरकिरी के जिम्मेदार हैं ये IAS और मंत्री भी-

अनिता भटनागर- 

UP की चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव अनिता भटनागर जैन जो कि पिछली सरकार में कई क्रीम विभागों में रही उनको इस सरकार में भी कई पैरवीकारों ने फिर के अच्छे विभाग दिलवा दिए अनिता भटनागर की भूमिका भी कमीशन खोरी में संदिग्ध है आखिर क्यों फरवरी से आ रहे पत्रों को सचिव ने कूड़े की टोकरी में फेंका, 
 आखिर क्यों मार्च में बजट लेप्स हो गया पर किसी मेडिकल कॉलेज का भुगतान नही किया गया।
आखिर जब पूरी दुनिया मे हल्ला मचा था तो अनिता भटनागर अपन आफिस बंद करने बैठी थी इनके ऊपर सख्त कार्यवाही जरूरी है।

सिद्धार्थ नाथ सिंह- 

UP की पार्ट टाइम स्वास्थ्य मंत्री जी ने भी योगी सरकार की इमेज बिगड़ने में कोई कास्ट नही रखी पहले तो चीजों पर इनकी कोई पकड़ नाजी है उंसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले 3 सालों में हुई मौतों का आंकड़ा देते दिखे और बेशर्मी से हंस रहे थे इनके नाना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने रेल दुर्घटना पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था और ये बेशर्मी से बच्चो की मौत पर हंस रहे थे।

DM गोरखपुर राजीव रौतेला- 

जब सबसे पहले ये मामला आया तो DM रौतेला ने ये स्वीकारा की 30 बच्चों की मौत ऑक्सीजन रुकने से हुई उंसके बाद आशुतोष टंडन से बात करते समय झूठ बोल दिया की सिर्फ 7 लोगों की मौत हुई है उंसके बाद अपनी रिपोर्ट में फिर स्वीकार किया कि ऑक्सीजन रुकने से हुई घटना, इसके अलावा जिले के स्वास्थ्य समिति का अध्यक्ष होने के बाद भी BRD में चल रही अनियमितता की DM कोई जानकारी नहीं थी जो कि घोर लापरवाही है।

आशा है कि चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार अपनी रिपोर्ट में इन बिंदुओ का जरूर ध्यान रखेंगे।


TheLogicalNews
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