*LogicalNews Learning Series*
*क्या व्यापार अब केवल अर्थव्यवस्था नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का हथियार बन चुका है*
तीन दशकों तक दुनिया की अर्थव्यवस्था एक ही सिद्धांत पर चलती रही: जहां उत्पादन सबसे सस्ता हो, वहीं फैक्ट्री लगाओ।
जहां श्रमिक सस्ते हों, वहीं सप्लाई चेन बनाओ और जहां सबसे बड़ा बाजार हो, वहां व्यापार बढ़ाओ लेकिन अब यह मॉडल तेजी से बदल रहा है वैश्विक व्यापार विश्लेषकों के हालिया आकलनों के अनुसार, दुनिया “Efficiency-driven Globalization” से “Security-driven Globalization” की ओर बढ़ रही है।
अमेरिका, चीन, यूरोप और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब व्यापार को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति के रूप में देखने लगी हैं। सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, दुर्लभ खनिज, AI, डेटा नेटवर्क और सप्लाई चेन अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं।
इसी कारण दुनिया भर में टैरिफ, व्यापार प्रतिबंध और नए Free Trade Agreements एक साथ बढ़ रहे हैं। एक तरफ अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी व व्यापारिक संघर्ष गहरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत, यूरोप, ब्रिटेन और अन्य देश नए व्यापार समझौतों के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
दुनिया किस दिशा में बढ़ रही है?
आज वैश्विक व्यापार का सबसे बड़ा लक्ष्य “सस्ता उत्पादन” नहीं, बल्कि “विश्वसनीय उत्पादन” बनता जा रहा है। कंपनियां अब केवल लागत नहीं देख रहीं, बल्कि यह भी देख रही हैं कि संकट या युद्ध की स्थिति में सप्लाई चेन कितनी सुरक्षित रहेगी।
कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा ने दुनिया को दिखा दिया कि अत्यधिक निर्भरता कितनी खतरनाक हो सकती है। यही कारण है कि अब “China Plus One” रणनीति तेजी से बढ़ रही है। कंपनियां चीन के अलावा वैकल्पिक उत्पादन केंद्र खोज रही हैं इसी बदलाव के बीच भारत को लेकर वैश्विक रुचि तेजी से बढ़ी है। अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते, भारत-EU FTA और UK-India trade negotiations इसी बड़े भू-आर्थिक बदलाव का हिस्सा हैं।
लेकिन यह नया दौर पूरी तरह स्थिर नहीं है टैरिफ युद्ध, व्यापारिक राष्ट्रवाद और सप्लाई चेन की राजनीतिककरण से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ रही है कई विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह प्रवृत्ति और बढ़ी, तो दुनिया दो या तीन बड़े आर्थिक ब्लॉकों में बंट सकती है।
*भारत पर असर: अवसर भी, दबाव भी*
इस बदलती व्यवस्था में भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में उभर रहा है पश्चिमी कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं और भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा निर्माण और डिजिटल सेवाओं में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ सकती है।
भारत ने हाल के वर्षों में कई बड़े व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। यूरोप, ब्रिटेन, EFTA और अन्य देशों के साथ बढ़ते आर्थिक संबंध भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बना सकते हैं।
लेकिन चुनौतियां भी उतनी ही गंभीर हैं।
ऊर्जा आयात पर भारत की भारी निर्भरता उसे वैश्विक संकटों के प्रति संवेदनशील बनाती है। पश्चिम एशिया तनाव के कारण बढ़ती तेल कीमतों ने भारत के व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ाया है।यानी भारत को एक साथ दो काम करने होंगे:
वैश्विक व्यापार अवसरों का लाभ उठाना और अपनी रणनीतिक आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत करना।
*LogicalNews Insight*
1990 के दशक की दुनिया कहती थी “व्यापार से शांति आती है।” 2020 के दशक की दुनिया कह रही है:
“व्यापार भी शक्ति संघर्ष का हथियार है।”
भविष्य की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा केवल GDP की नहीं होगी।
यह प्रतिस्पर्धा सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नियंत्रण और विश्वसनीय साझेदारियों की होगी और इसी नए दौर में भारत पहली बार केवल “उभरती अर्थव्यवस्था” नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक पुनर्संतुलन का केंद्रीय खिलाड़ी बन सकता है।
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